अन्य

    भारत के सैटेलाइट मैन यानि प्रो. यू. आर. राव

    INR. 1969 में जिस भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने सफर की शुरुआत बैलगाड़ी से की थी, आज वही इसरो अंतरिक में दुनिया के 38 देशों की 342 विदेशी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है।

    सैटेलाइट भेजने का सिलसिला सैटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ के साथ शुरू हुआ, जिसके मिशन का नेतृत्व प्रो. यू. आर. राव ने किया था।

    अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो आज विश्वास का पर्याय बन चुका है। इस विश्वास को कमाने में कई लोगों ने अपना जीवन खपाया है। उन्हीं में से एक प्रो. राव भी हैं।

    जिस वक्त भारत की पहली सैटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ लॉन्च हुई तब वे इसरो के चेयरमैन थे। इसीलिए उन्हें ‘भारत का सैटेलाइट मैन’ कहा जाता है।

    राव का जन्म आज ही के दिन कर्नाटक के एक दूर दराज गाँव मे हुआ था। एक कॉस्मिक-रे फिज़िसिस्ट के रूप में उन्होंने अपना कैरियर शुरू किया और बाद में वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सानिध्य में काम किया, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का ‘जनक’ कहा जाता है। डॉक्टरेट करने के बाद राव, आगे की रिसर्च के लिए नासा चले गए।

    1966 में भारत लौटने पर, प्रो. राव ने अंतरिक्ष विज्ञान के लिए भारत के प्रमुख संस्थान, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में एक व्यापक उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान कार्यक्रम की शुरुआत की।

    1972 में अपने देश के उपग्रह कार्यक्रम की कल्पना भी उन्हीं की थी। 1984 से 1994 तक प्रो. राव भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के रूप में आसमानी ऊंचाइयों तक अपने राष्ट्र के अंतरिक्ष कार्यक्रम को पहुँचाने के लिए काम करते रहे है।

    राव पहले भारतीय थे जिन्हें 2013 में ‘सैटेलाइट हॉल ऑफ फेम’ में जगह मिली। यह वही वर्ष था जब इसरो ने पहली बार अंतर्ग्रह सैटेलाइट ‘मंगलयान’ लॉन्च किया था। जो इस तरह का दुनिया का सबसे सस्ता और कम समय में तैयार किया हुआ मिशन था।

    दुनिया कि सबसे बेहतर माने जाने वाली एजेंसी नासा को इसी मिशन के लिए 690 मिलियन डॉलर और 5 साल का समय लगा था। जबकि इसके विपरीत इसरो ने सिर्फ 18 महीने और 69 मिलियन डॉलर में ही इसे तैयार कर दिया था।

    इसी तरह चंद्रयान मिशन नासा के बजट के 10% में ही तैयार हो गया था। इसरो के चंद्रयान का बजट हॉलिवुड मूवी ‘ग्रैविटी’ से भी कम था । भले ही इसरो का वार्षिक बजट नासा के बजट के लगभग 12 गुना कम है। लेकिन उपरोक्त तथ्य अपने आप में इसरो की क्षमता को दर्शाते हैं।

    इसरो ने 2017 में एक साथ 104 सैटेलाइट को लॉन्च कर पूरी दुनिया को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया था। ऐसा करने वाली वो दुनिया की एकमात्र अंतरिक्ष एजेंसी है ।

    इससे पहले रूस की एजेंसी एक बार में सिर्फ 34 सैटेलाइट लॉन्च कर सकी थी। अफसोस इसी वर्ष जुलाई महीने में भारत ने राव को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया। तारों की दुनिया का शौकीन तारा बन गया।

    भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया है। उनके सम्मान में आज गूगल ने भी डूडल बनाकर उन्हें याद किया है।

    Comments

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Expert Media News_Youtube
    Video thumbnail
    वोट के सौदागरः ले मुर्गा, ले दारु!
    00:33
    Video thumbnail
    बिहारः मुजफ्फरपुर में देखिए रावण का दर्शकों पर हमला
    00:19
    Video thumbnail
    रामलीलाः कलयुगी रावण की देखिए मस्ती
    00:31
    Video thumbnail
    बिहारः सासाराम में देखिए दुर्गोत्सव की मनोरम झांकी
    01:44
    Video thumbnail
    पटना के गाँधी मैदान में रावण गिरा
    00:11
    Video thumbnail
    झारखंड की राजधानी राँची में बवाल, रोड़ेबाजी, लाठीचार्ज, फायरिंग
    04:29
    Video thumbnail
    बिहारः 'विकासपुरुष' का 'गुरुकुल', 'झोपड़ी' में देखिए 'मॉडर्न स्कूल'
    06:06
    Video thumbnail
    बिहारः विकास पुरुष के नालंदा में देखिए गुरुकुल, बेन प्रखंड के बीरबल बिगहा मॉडर्न स्कूल !
    08:42
    Video thumbnail
    राजगीर बिजली विभागः एसडीओ को चाहिए 80 हजार से 2 लाख रुपए तक की घूस?
    07:25
    Video thumbnail
    देखिए लालू-राबड़ी पुत्र तेजप्रताप यादव की लाईव रिपोर्टिंग- 'भागा रे भागा, रिपोर्टर दुम दबाकर भागा !'
    06:51