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    बक्सर सीवीसी ने तीन न्यूज़ पोर्टलों को भेजा लीगल नोटिस, जानिए क्यों?

    ये तीनो न्यूज़ पोर्टल बाल संरक्ष्ण अधिनियम का उलंघन किया है। न्यूज़ पोर्टल पंजाब केशरी, प्रतेयक न्यूज़  तथा 24 वल्ड न्यूज़- इन तीनों पोर्टलो के रिपोर्टरों को नोटिश भेजकर आठ दिनों के अंदर जबाव माँगा है....

    राजनामा.कॉम (शेषनाथ पाण्डेय)। बक्सर जिले की बाल कल्याण समिति बक्सर ने गलत तथा भ्रामक खबर चलाने को लेकर बक्सर के तीन न्यूज़ पोर्टलो को लीगल नोटिस भेज कर जबाब तलब किया है।

    सीवीसी ने माना है कि ये तीनो न्यूज़ पोर्टल बाल संरक्ष्ण अधिनियम का उलंघन किया है। न्यूज़ पोर्टल पंजाब केशरी, प्रतेयक न्यूज़  तथा 24 वल्ड न्यूज़- इन तीनों पोर्टलो के रिपोर्टरों को नोटिश भेजकर आठ दिनों के अंदर जबाव माँगा है।

    बता दें कि सिकरौल थाना क्षेत्र के बधार (धान के खेत) से एक नवजात शिशु मिला था। गाँव वालों ने इसकी सूचना जिला बाल कल्याण समिति को दी।

    सूचना के बाद उक्त नवजात शिशु को सीवीसी अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। जिसकी खबर इन न्यूज़ पोर्टल के रिपोर्टरों ने चलाया और प्रमुखता से दिखाया भी।

    इस खबर की बाबत जब रिपोर्टरों ने सीवीसी के सदस्यों से बच्चा गोद लेने के बारे जानकारी ली तो सीवीसी के सदस्य नवीन कुमार पाठक ने बताया कि बाल संरक्ष्ण अधिनियम के तहत बच्चा गोद लेने का प्रावधान है। कोई भी बच्चा गोद ले सकता है।

    बकौल श्री पाठक, बच्चा गोद लेने के लिए आवेदक को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए आवेदक से दो किश्तों में 60 हजार रूपये जमा करना होता है।

    पहली किश्त में 40 हजार और बच्चा गोद लेने की सारी क़ानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 20 हजार रूपये सरकारी खजाने में जमा करना पड़ता है। जो विधि सम्मत है। बशर्ते कि आवेदक दूसरे प्रदेश का होना चाहिए।

    बताते चलें कि मुज्फरपुर बालिका गृह कांड राज्य ही नहीं, अपितु पूरे देश में चर्चा का बिषय बना।  जिस पर देश की सर्वोच्च न्यायलय ने स्वत संज्ञान ली। इस जघन्य मामले में न्यायालय ने बालिका संरक्षण गृह मुजफरपुर के अध्यक्ष और सदस्य को आजीवन जेल की सजा दी।

    उस मामला से सबक लेते हुए जिला सीवीसी इकाई भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। बच्चा गोद लेने के लिए सरकारी खजाने में पैसा जमा करवाने की बात को इन न्यूज़ पोर्टल के रिपोर्टरों ने रिश्वत के रूप में मानकर दनादन खबर प्रसारित कर दी।

    सदस्य श्री पाठक ने कहा कि बाल संरक्ष्ण अधिनियम के उलंघन तहत छह माह की जेल और दो लाख रूपये तक जुर्माना हो सकती है। अथवा अर्थ दंड के साथ जेल भी हो सकती है।    

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