एक ऐसा गांव, जहां सुबह 8 से 11 बजे तक हर गली बन जाती है ‘क्लासरूम’

इंडिया न्यूज रिपोर्टर डेस्क। क्या कभी आपने ‘गली स्टडी’ के बारे में सुना है ? जी हां, कोरोना की इस मुश्किल घड़ी में इन दिनों देश में एक ऐसा गांव सामने आया है, जहां चारों ओर लगे खंभों पर लाउडस्पीकर नजर आ रहे हैं।

यह लाउडस्पीकर किसी मंदिर या सामाजिक कार्यक्रम की घोषणा के लिए नहीं बल्कि पालनपुर के एक सरकारी स्कूल और यहां की एक व्यवस्था के लिए लगाए गए हैं।

ये उन बच्चों के लिए हैं, जिनके पास न तो टीवी है और न ही इंटरनेट। ऐसे में इन बच्चों की शिक्षा में यही लाउडस्पीकर मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

दरअसल, कोरोना महामारी के कारण बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ा है। ऐसे में जब सभी जगह स्कूल और शिक्षण संस्थान बंद थे, तब गुजरात के पालनपुर के परपड़ा गांव में जून महीने से कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक का शिक्षण कार्य शुरू हुआ, लेकिन यह शिक्षण कार्य कुछ अलग अंदाज में शुरू हुआ।

बकौल शिक्षिका चेनतबेन, कोरोना महामारी के कारण फिलहाल, सभी शिक्षण संस्थान बंद हैं, लेकिन ऐसे में भी विद्यालय का शिक्षण कार्य जारी है। इस बात को सार्थक करने के लिए हमारी ग्राम पंचायत द्वारा गांव में लाउडस्पीकर लगवाए गए हैं।

शिक्षक अपनी बारी के अनुसार आते हैं और कक्षा तीन, चार, पांच को सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और कक्षा छह, सात, आठ को मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को पढ़ाते हैं।

इसके अलावा यदि किसी बच्चे को पढ़ने में कुछ समझ में नहीं आता है तो शिक्षक उनके घर पर जाकर उन्हें समझाते हैं।

गांव में लोगों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है। ऐसे में ग्राम पंचायत द्वारा स्पीकर के माध्यम से बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है।

यहां सुबह आठ बजे से 11 बजे तक गांव की गलियां, आंगन, ओटला सब एक कक्षा में परिवर्तित हो जाते हैं। शिक्षक माइक की सहायता से बोलते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं और विद्यार्थी स्पीकर में सुनकर पुस्तक में देखकर उसे समझ लेते हैं।

लाउड स्पीकर के साथ ही हर गली में बच्चों पर नजर रखने के लिए एक-एक कैमरा भी लगाया गया है। इस प्रकार से जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा की पहुंच को सुनिश्चित करने का यह अनूठा तरीका सभी को भा रहा है।

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