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    Monday, January 17, 2022
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      बिहार-यूपी के दो जज की आपसी मानवता बनी मिसाल, जल्द ही घर पहुंचेगी जेल में बंद नालंदा की बेटी

      “दरअसल, अलीगढ़ के जज मिश्र को जेजेबी नालंदा के जज मानवेन्द्र मिश्रा के कई मानवीय व चर्चित फैसलों की जानकारी थी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जज मिश्रा का फोन नम्बर उपलब्ध कर संपर्क किया और सहयोग मांगा, ताकि महिला अपने घर वालों के पास पहुंच सके…

      इंडिया न्यूज रिपोर्टर डेस्क। उत्तर प्रदेश के जिला कारागार अलीगढ़ में बंदी नालंदा जिले के थरथरी प्रखंड की महिला को उसके परिवार तक पहुंचाने के लिए दो जज द्वारा शुरू की गयी मानवीय पहल अब रंग लाने लगी है।

      महिला के पिता और घर का पता चल चुका है। पिता उसे रखने के लिए भी तैयार हो गये हैं। जल्द ही उक्त महिला निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुक्त होकर अपने पिता के पास आ सकेगी।

      उक्त महिला जुलाई 2019 से ही जिला कारागार अलीगढ़ में बंद है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलीगढ़ के पूर्णकालीन सचिव दीपक कुमार मिश्र ने किशोर न्याय परिषद नालंदा के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा से संपर्क कर उक्त महिला द्वारा बताये गये पता को उपलब्ध कराया था।

      महिला ने अपना पता थरथरी प्रखंड के अस्ता खरजमा निवासी दुर्गेश प्रसाद की पुत्री पुष्पलता के रूप में दी थी।

      जज मिश्रा ने अपने सोर्स के माध्यम से पता का सत्यापन किया। जिसमें महिला द्वारा बताया गया पता सही निकला। थरथरी थाना पुलिस के अनुसार पिता अपनी पुत्री को साथ रखने के लिए तैयार हो गये हैं।

      उन्होंने प्राधिकार के सचिव जज मिश्र से प्रार्थना पत्र लिखकर कहा कि उसके परिवार का कोई भी कभी मिलने नहीं आया। आधार कार्ड खो गया है। उसने पति व माता-पिता से मिलवाने की गुहार लगायी।

      महिला की गुहार के बाद जज मिश्र ने जेजेबी नालन्दा के जज मिश्रा में संपर्क कर घर वालों तक पहुंचाने की मुहिम शुरू की।

      पुष्पलता ने जज को बताया कि उसकी मानसिक स्थिति पूर्व में खराब थी। इलाज पहले भी चला था लेकिन कैसे और किन परिस्थिति में वह जेल पहुंच गयी उसे याद नहीं है।

      उसने यह भी बताया कि अब उसकी मानसिक स्थिति ठीक है। उसने ससुराल का पता झारखंड के लातेहार जिला के गारू निवासी रविरंजन कुमार की पत्नी के रूप में बताया। जबकि मायके का पता नालंदा जिले के थरथरी प्रखंड का दिया।

      जब पुष्पलता को जेल लाया गई थी, तब आठ माह की गर्भवती थी। उसकी मानसिक स्थिति भी सही नहीं थी। मानसिक चिकित्सालय वाराणसी में पुष्पलता का इलाज कराया गया।

      इलाज के बाद अक्टूबर 2020 को वह पुन: जेल लौटी। पुष्पलता को एक पुत्र पैदा हुआ था। उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए बच्चे को शिशु सदन आगरा में रखा गया है। (साभार इनपुटः भास्कर)

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