Saturday, April 17, 2021

जानिए, बिहार के ‘पटना’ से 10 हजार किलोमीटर दूर स्कॉटलैंड के इस ‘पटना’ का है सीधा नाता

बिहार आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। बिहार आज 109 साल का हो गया है। 22 मार्च,1912 को यह बंगाल प्रेसीडेंसी से एक अलग प्रांत बना था। बिहार में हर साल 22मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। लेकिन बिहार से 10 हजार किलोमीटर दूर एक और पटना में भी ऐतिहासिक संबंधों को मनाने के लिए बिहार दिवस बहुत ही शानदार ढंग से मनाया जाता है....

INR. अंग्रेजी साहित्य के पिता विलियम शेक्सपियर ने कहा था नाम में क्या रखा है। बिहार में ही ‘पाकिस्तान’ और ‘तुर्की’ देश के नाम पर गांव का नाम है।

वैसे ही बिहार की राजधानी पटना से दस हजार किलोमीटर दूर स्कटॉलैंड के पूर्वी आयरशायर में एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम ‘पटना’ है। प्राकृतिक रूप से यहां की सुंदरता देखते ही बनती है।

इसका नाम पटना रखा जाना महज एक संयोग नहीं है, बल्कि बिहार की राजधानी पटना से इसका एक सीधा संबंध है। यहीं नहीं बिहार की राजधानी पटना और स्काटलैंड के पटना में बहुत समानताएं हैं।

पटना की तरह यहां एक नदी है जिसका नाम गंगा है और उस पर बने पुल का नाम महात्मा गांधी सेतु। यही नहीं यहां पटना चर्च, पटना गोल्फ क्लब, पटना यूथ क्लब , पटना ओल्ड ब्रिज, पटना रेलवे स्टेशन न जाने और कितने नाम। बिहार की राजधानी पटना का मिनी पटना कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

कहा जाता है कि 1745 में जब यहां के एक व्यवसायी विलियम फुलर्टन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ बिहार गये, जो तब बंगाल हुआ करता था। वहां से चावल ब्रिटेन भेजा जाता था।

बाद में उनके भाई जान फुलर्टन भी पटना आएं, जो ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में मेजर जनरल हुआ करते थें। वहीं 1774 में उनके बेटे विलियम फुर्लटन का जन्म हुआ। जॉन फुलर्टन का निधन भारत में ही हुआ।

उसके बाद फुर्लटन परिवार स्कॉटलैंड लौट आया। फुर्लटन परिवार के विलियम ने यहां माइंस का कारोबार शुरू किया। जहां कोयला और चूना काफी पर्याप्त मात्रा में था।

उन्होंने विचार किया कि कोयला खदान में काम करने वाले मजदूरों के लिए एक गांव बसाया जाएं।इसी सोच को उन्होंने मूर्त रूप दिया। धीरे-धीरे गांव का निर्माण कर लिया। मजदूर बसने भी लगे थे। लेकिन विलियम के मन में गांव का नाम को लेकर मंथन चल रहा था।

उन्होंने 1802 में अपने जन्मभूमि पटना का नाम इस गांव को दिया “पटना”। इस नाम के साथ विलियम के पिता की यादें भी जुड़ी हुई थी।

स्कॉटलैंड के पटना की आबादी महज पांच हजार है। न कोई शोरगुल न कोई परेशानी। गांव में दो नदी है। एक बड़ी नदी जिसे गंगा कहा जाता है दूसरी छोटी नदी जिसे दून कहा जाता है।

स्कॉटलैंड के पटना की सबसे पहले जानकारी 1972 में इतिहासकार जाॅन मूरे द्वारा लिखी गई किताब “जेंटली फ्लॉस द दून” में मिलती है।

मूरे के मुताबिक आयरशायर काउंसिल में दून नदी के बसे पटना का बिहार के पटना से पुराना नाता है। यहां के प्राइमरी स्कूल में बच्चों को भारतीय नृत्य कला भी सीखाई जाती है।

गाँव, गाँव ही होता है, सपनों की सीमाएँ होती हैं। सीमाएँ और सिमट जाती हैं जब साधन सिमट जाएँ। समय के साथ पटना की खदानें बंद हो चुकी हैं, साथ-साथ कारखाना भी और रेलवे स्टेशन भी। गाँव में रोज़गार की बेहद कमी है, लोग काम की तलाश में शहर जाते हैं।

1964 में पटना रेलवे स्टेशन को ध्वस्त कर दिया गया। बेकारी बढ़ी है। काम के लिए गांव वाले शहर की ओर भाग रहे हैं। बिहार के पटना में भीड़ है, आपाधापी है। स्कॉटलैंड के पटना में शांति है, ठहराव है।

पटना गाँव में लोग तारीख़-इतिहास को जाने या न जाने, ये अवश्य जानते हैं कि दूर भारत में एक पटना है। पटना प्राइमरी स्कूल के बच्चों को उनके गाँव के इतिहास के बारे में बताया जाता है।

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