Saturday, April 17, 2021

पूर्व केंद्रीय मंत्री-वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने उठाया तृणमूल कांग्रेस का झंडा !

INR. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कभी भाजपा के कद्दावर नेता रहे यशवंत सिन्हा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने नई सियासी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के फैसले से अपने समर्थकों अंचभित कर दिया है।

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने पार्टी दफ्तर में सदस्यता दिलाई। पार्टी में शामिल होने से पहले उन्होंने ममता बनर्जी के साथ बातचीत भी की थी। तभी से यह अटकलें लग रही थी कि श्री सिन्हा एक श्री राजनीतिक पारी की शुरुआत टीएमसी के साथ करेंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा बीजेपी के बहुत ही सीनियर नेता रह चुके हैं। वह काफी समय से बीजेपी ने नाराज चल रहे थे और लगातार पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे।
टीएमसी में शामिल होने के बाद बीजेपी की आलोचना करते हुए यशवंत सिन्हा ने मीडिया से कहा, ‘प्रजातंत्र की ताकत प्रजातंत्र की संस्थाएं होती हैं।आज लगभग हर संस्था कमजोर हो गई है, उसमें देश की न्यायपालिका भी शामिल है।हमारे देश के लिए ये सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल की चर्चा करते हुए कहा कि  अटल जी के समय में बीजेपी सर्वसम्मति पर विश्वास करती थी, लेकिन आज की सरकार कुचलने और जीतने में विश्वास करती है। अकाली दल, बीजेडी, शिवसेना पहले ही बीजेपी का साथ छोड़ चुकी है। आज बीजेपी के साथ कौन खड़ा है?’
यशवंत सिन्हा मुख्य रूप से बिहार के रहने वाले हैं। यहीं इनकी पढ़ाई लिखाई भी हुई है। 1958 में राजनीति शास्त्र में मास्टर की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्त्वपूर्ण पदों पर रहते हुए 24 साल से अधिक तक सेवा दिए।
श्री  सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति से जुड़ गए।
वर्ष 1988 में उन्हें राज्य सभा सदस्य चुना गया। मार्च 1998 में अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में उनको वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। लोकसभा में यशवंत सिन्हा बिहार के हजारीबाग, जो कि अब झारंखड में है, क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हजारीबाग सीट से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, अगले साल ही 2005 में वे फिर संसद पहुंचे। इसके बाद साल 2009 में वे बीजेपी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इनके पुत्र जयंत सिन्हा भाजपा में केंद्रीय मंत्री हैं।

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