Tuesday, April 13, 2021

पुराने दिनों की यादें ताजा करती है दार्जिलिंग का टॉय ट्रेन सफर

INR. पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग को ऐसे ही पहाड़ों की रानी नहीं कहा जाता है। यहां के प्राकृतिक नजारें हर किसी को अपनी ओर खींचते हैं।

इतना ही नहीं अगर फिल्मों की बात की जाए तो यह जगह फिल्मों की शूटिंग के लिए भी लोकप्रिय रही है। अगर ये भी कहा जाए कि दार्जलिंग पर बॉलीवुड फिदा है तो शायद यह कहना गलत नहीं होगा।

दार्जिलिंग टॉय ट्रेन में हुई दर्जनों फिल्मों की शूटिंग
यहां अभी तक दर्जनों फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। चाहे ”मैं हूं ना” की बात की जाए या ”बर्फी”, ”यारियां” या फिर ”जग्गा जासूस” हर कहीं दार्जिलिंग ने फिल्मों में अपनी अलग छाप छोड़ी है।

ऐसे ही अगर पुरानी फिल्मों की बात की जाए तो राजेंद्र कुमार और सायरा बानो की फिल्म ”झुक गया आसामान” में यहां के अलग ही नजारे देखे जा सकते हैं।

सबसे ज्यादा जिस फिल्म की वजह से लोग दार्जिलिंग को जानते हैं वो है फिल्म ”आराधना” जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर का ”मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू” का गाना सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा। गाने में टॉय ट्रेन के साथ दार्जिलिंग की वादियों के दीदार होते हैं।

भाप के इंजन से चलने वाली ट्रेन को नहीं किया जा सकता अनदेखा
ट्रेन की बात की जाए तो यहां के उस भाप के इंजन से चलने वाली ट्रेन को अनदेखा नहीं किया जा सकता है जिसने फिल्मों को लेकर सैलानियों के दिल को जीता है।

हम बात कर रहे हैं दार्जिलिंग हिमालयन ट्रेन की जिसे टॉय ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है। यह पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच चलने वाली एक छोटी लाइन की रेलवे प्रणाली है।

यूनेस्को ने साल 1999 में दार्जिलिंग रेलवे को विश्व धरोहर में किया शामिल
यूनेस्को ने साल 1999 में दार्जिलिंग हिमालय रेलवे को विश्व धरोहर का दर्जा दिया था। भाप इंजन से चलने वाली ये ट्रेन पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।

इसका निर्माण 1879 से लेकर 1881 के बीच किया गया था। इस रेलवे लाइन की कुल लंबाई 78 किलोमीटर है जिसमें 13 स्टेशन पड़ते हैं। इस टॉय ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 20 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

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