More
    10.1 C
    New Delhi
    Monday, January 24, 2022
    अन्य

      तेलंगाना के एक किसान की खोज, बिना पकाए चावल बन जाएगा भात

      85,124,792FansLike
      1,188,842,671FollowersFollow
      6,523,189FollowersFollow
      92,437,120FollowersFollow
      85,496,320FollowersFollow
      40,123,896SubscribersSubscribe

      INDIA NEWS REPORTER 1 1भारत के तेलंगाना के करीमनगर के एक अन्य किसान ने खेती के प्रति लगन, नई सोच और प्रयोगधर्मिकता का उदाहरण पेश किया है।

      किसान ने चावल की ऐसी किस्म की खोज की है जिसमें खाने के लिए उसे पकाए जाने की जरूरत नहीं होगी। चावल को कुछ देर के लिए पानी में भिगो देना ही काफी होगा।

      अगर आप गरमागरम चावल खाना चाहते हैं तो उसे गर्म पानी में भिगो सकते हैं। अन्यथा सामान्य पानी से भिगोकर खाने पर भी चावल उसी तरह तैयार हो जाता है।

      करीमनगर के श्रीराममल्लापल्ली गांव के किसान श्रीकांत का कहना है कि उसे एक बार असम जाने का मौका मिला था। जहां चावल की ऐसी किस्म के बारे में पता चला जो बिना पकाए ही खाया जा सकता है।

      उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय से संपर्क करके चावल की इस अनूठी प्रजाति के बारे में जानकारी ली। पता चला कि असम के पहाड़ी इलाकों में कुछ जनजातियां इस तरह का चावल पैदा करती हैं जिसे खाने के लिए पकाने की जरूरत नहीं होती।

      बोकासौल नाम से जाना जाता है यह चावल
      पहाड़ी जनजातीय इलाकों में इस किस्म के चावल को बोकासौल नाम से जाना जाता है। चावल की यह किस्म सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है।

      चावल में 10.73% फाइबर और 6.8% प्रोटीन मौजूद है। किसान श्रीकांत ने बताया कि इस चावल को गुड़ केला और दही के साथ खाने से स्वाद लाजवाब होता है।

      श्रीकांत असम के जनजातीय इलाके से इस किस्म के चावल के बीज लेकर आए थे। 12 वीं शताब्दी में असम में राज करने वाले अहम राजवंश को बोकासौल चावल बहुत पसंद था लेकिन बाद में चावल की दूसरी प्रजातियों को मांग बढ़ती चली गई।

      किसान श्रीकांत ने बताया कि लगभग विलुप्त हो चुकी चावल की इस किस्म को विकसित करने का फैसला उन्होंने लिया और आधा एकड़ खेत में उसकी बुवाई कर दी।

      श्रीकांत को उम्मीद थी कि आधे एकड़ में करीब 5 बोरी चावल का उत्पादन हो जाएगा। दूसरी प्रजातियों के बराबर ही इस चावल की फसल 145 दिनों में तैयार हो जाती है।

      श्रीकांत ने कहा कि आधुनिक युग में इस चावल की उपयोगिता को समझा जा सकता है। खासकर जब रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

      उन्होंने बताया कि कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर उनके लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने प्राकृतिक आध्यात्मिक कृषि का आविष्कार किया और ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें कृषि के लिए न ही किसी रासायनिक कीटनाशक का उपयोग किया जाता और न ही बाजार से अन्य औषधियाँ खरीदने की आवश्यकता पड़ती है।

      LEAVE A REPLY

      Please enter your comment!
      Please enter your name here

      Expert Media Video News
      Video thumbnail
      पियक्कड़ सम्मेलन करेंगे सीएम नीतीश कुमार के ये दुलारे
      00:58
      Video thumbnail
      देखिए वायरल वीडियोः पियक्कड़ सम्मेलन करेंगे सीएम नीतीश के चहेते पूर्व विधायक श्यामबहादुर सिंह
      04:25
      Video thumbnail
      मिलिए उस महिला से, जिसने तलवार-त्रिशूल भांजकर शराब पकड़ने गई पुलिस टीम को भगाया
      03:21
      Video thumbnail
      बिरहोर-हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश के लेखक श्री देव कुमार से श्री जलेश कुमार की खास बातचीत
      11:13
      Video thumbnail
      भ्रष्टाचार की हदः वेतन के लिए दारोगा को भी देना पड़ता है रिश्वत
      06:17
      Video thumbnail
      नशा मुक्ति अभियान के तहत कला कुंज के कलाकारों का सड़क पर नुक्कड़ नाटक
      02:36
      Video thumbnail
      झारखंडः देवर की सरकार से नाराज भाभी ने लगाए यूं गंभीर आरोप
      02:57
      Video thumbnail
      भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं सांसद ने राँची में यूपी के पहलवान को यूं थप्पड़ जड़ा
      01:00
      Video thumbnail
      बोले साधु यादव- "अब तेजप्रताप-तेजस्वी, सबकी पोल खेल देंगे"
      02:56
      Video thumbnail
      तेजस्वी की शादी में न्योता न मिलने से बौखलाए लालू जी का साला साधू यादव
      01:08