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    Monday, January 24, 2022
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      विश्व प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्यः कांच से बने काले रंग की यूं पोशाक पहनती हैं नृत्यांगनाएं

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      INR.  नृत्य-संगीत मानव जीवन के उल्लास को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। लोक नृत्य हमारे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये लोक नृत्य न केवल भारत के लोगों को बल्कि समूचे विश्व को आकर्षित करते हैं।

      आज हम राजस्थान के लोकनृत्य कालबेलिया के विषय में आपको बताने जा रहे हैं। राजस्थान के सपेरा जाति द्वारा किया जाने वाला यह नृत्य बेहद प्रसिद्ध है।

      नृत्यांगनाएं सांप की तरह बल खाते हुए करती हैं नृत्य
      राजस्थान के प्रसिद्ध नृत्य शैली कालबेलिया की धूम सब तरफ है। यह नृत्य दो महिलाओं द्वारा किया जाता है। नृत्य करते हुए उनमें अद्भुत फुर्ती दिखाई देती है।

      नृत्य के दौरान पुरुष बीन व अन्य वाद्ययंत्र बजाते हैं। महिलाएं नृत्य के दौरान सांप की तरह बल खाते हुए नृत्य की प्रस्तुति देती हैं।

      इस नृत्य के दौरान नृत्यांगनाओं द्वारा आंखों की पलक से अंगूठी उठाने, मुंह से पैसे उठाना, उल्टी चकरी खाना जैसी कलाकारी भी दिखाई जाती है। कालबेलिया नृत्य दर्शकों को सम्मोहित कर लेता है।

      पोशाक भी होते हैं विशेष
      कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति में नृत्यांगनाओं द्वारा पहने जाने वाले पोशाक भी विशेष होते हैं। यह नृत्य अपनी पोशाक और नृत्य के अनूठे तरीके के कारण भी जाना जाता है।

      नृत्यांगनाओं में गजब का लोच और गति देखकर, दर्शक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं। नृत्य के दौरान नृत्यांगनाएं काला घाघरा चुनरी और चोली पहनती हैं।

      इस काले रंग के पोशाक में कांच की गोटियां भी लगी होती है। इसके अलावा पोशाक में बहुत सी चोटियां गुंथी होती हैं, जो नृत्यांगना की गति के साथ बहुत मोहक लगती हैं। तीव्र गति पर घूमती नृत्यांगना जब विभिन्न भंगिमाएं करती हैं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठते हैं।

      कालबेलिया नृत्य को संयुक्त राष्ट्र की इकाई यूनेस्को ने, वर्ष 2010 से मानवता की सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया है।

      फोक सफर में कालबेलिया की प्रस्तुति
      राजस्थान के कालबेलिया नृत्य के कलाकार फोक सफर में भी प्रस्तुति देंगे। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में 12 से 15 फरवरी 2021 तक तीन दिवसीय फोक सफर का आयोजन किया जा रहा है। लोक कला और संस्कृति को समर्पित इस एनजीओ का निर्माण वर्ष 2000 में हुआ था।

      यह एनजीओ प्रतिवर्ष सुरगान नामक समारोह का आयोजन करता है, पर कोरोना के चलते इस वर्ष यह संभव नहीं हो पाया। इसलिए इस साल फोक सफर का आयोजन किया गया है। कालबेलिया के अतिरिक्त गंभीरा नाट्य और बाउ फकीरी की प्रस्तुति भी दी जाएगी।

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