बिहारः कबूतर उड़ा कर बाज को दबोचने पर उतारु हुए कुशासन के नुमाइंदे!

राजनामा.कॉम। सरकारें कहती हैं मीडिया जरूरी है,मीडिया अहम है। लेकिन सरकार को पत्रकार और पत्रकारिता नहीं चाहिए,उनकी कुव्यवस्था,अराजकता जनता को न दिखाएं,उनका गुणगान करें। अगर मीडिया ऐसा नहीं करती है तो उसपर कानूनी शिकंजा डाल दो।

कुछ ऐसा ही बिहार में हो रहा है कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने अपने खिलाफ या फिर अधिकारियों, मंत्री, विधायकों के खिलाफ लिखे गए पोस्ट पर साइबर अपराध के दायरे में ला दिया है तो वही पत्रकारों के खिलाफ एक और वायरल पत्र ने पत्रकारिता के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।

सूचना क्रांति ने जहां आम लोगों को नए तरह के हथियार दिए हैं, वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समक्ष नए तरह के खतरे भी पैदा कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चुनौती मीडिया को सरकारों से मिल रही है।

अभी हाल ही में बिहार सरकार ने आदेश जारी किया है जिसके तहत सरकार,अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लिखे गये सोशल मीडिया पोस्ट को साइबर अपराध के दायरे में रख दिया है। उनके खिलाफ मानहानि के मुकदमें की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं अब सोशल मीडिया में दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड के शिक्षा पदाधिकारी का एक पत्र वायरल हो रहा है। जिसमें अब कोई भी मीडिया कर्मी प्रखंड के संकुल स्कूलों समेत किसी भी स्कूल में जाकर उस स्कूल के प्रधानाध्यापक की अनुमति लेकर ही फोटो या विडियो रिकार्डिंग कर सकते हैं। बिना अनुमति ऐसा करने पर इसे दंडनीय अपराध मानते हुए उनके खिलाफ मानहानि की कारर्वाई की जाएगा।

हालांकि राजनामा.काम इस वायरल पत्र की अधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर कुशेश्वरस्थान प्रखंड में ऐसा क्या भूचाल आ गया, जो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को ऐसा निर्देश प्रखंड के सभी संकुल संसाधन केंद्र तथा सभी विधालयों के प्रधानाध्यापकों को कार्यालय के पत्रांक 26 दिनांक -30.01.2021 पत्र जारी किया गया।

हालांकि जो बीईओ के द्वारा पत्र जारी किया है उसमें बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के आदेश का हवाला दिया है। जिसमें वर्णित है कि गिरिवर दयाल सिंह,सचिव सह निदेशक शिक्षा विभाग,बिहार सरकार,पटना के पत्रांक 11/विविध118-06/2018 दिनांक 10.05.2018 में दिये गये आलोक में।जिसके अनुसार कोई भी प्रिंट या इलेक्ट्रानिक्स मीडिया कर्मी बिना प्रधानाध्यापक के स्कूल की फोटो या विधालय भवन या विधालय परिसर की रिकार्डिंग नही कर सकते हैं।

बिना अनुमति के ऐसा करना मीडिया कर्मियों के लिए दंडनीय अपराध है। ऐसा करने पर प्रधानाध्यापक थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करायेंगे।

इसमें कोई संदेह नहीं कि तकनीक के घोड़े पर सवार होकर मीडिया पोस्ट बिजली की रफ्तार से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रही हैं। साधारण जनता के लिए सोशल मीडिया एक ऐसा हथियार बन गया है, जिससे वह ताकतवर जमात को नई तरह से चुनौती दे सकती है।

सबसे ज्यादा चुनौती सरकारों को मिलने लगी है। खासकर उन सरकारों को जिनके व्यवहार में लोकतांत्रिक उसूलों का सम्मान नहीं दिखता है। शायद यही वजह है कि शिक्षा विभाग अपने स्कूलों में बंत इंजामियों को बाहर आने देने से रोक देना चाहती है।

बिहार के सरकारी स्कूलों में फर्जी शिक्षक बहाली से लेकर मीड डे मिल घोटाला या फिर सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है, यह किसी से छिपी हुई नही है।

शायद विभाग इन सब कुव्यवस्था को मीडिया में आने से रोकना चाहती है। तभी तो फिर से बिहार बिल लाने जैसी तुगलकी फरमान जारी किया जा रहा है।

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