मेनका गाँधी ने पत्रकारों को कहा था ब्लैकमेलर, कोर्ट ने की मामला खारिज

राजनामा.कॉम। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से भाजपा सांसद मेनका गांधी को गुरुवार को एमपी/एमएलए कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

पत्रकारों को ‘ब्लैकमेलर’ बताए जाने वाले मेनका गांधी के बयान पर दाखिल परिवाद को एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया है।

बता दें कि तीन महीने पहले सांसद मेनका गांधी ने जिला सतर्कता और निगरानी समिति की बैठक में कथित रूप से पत्रकारों को ब्लैकमेलर कहा था।

जिले के पत्रकार एवं मामले के परिवादी राजेश मिश्रा ने बीते 28 अगस्त को एमपी/एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सांसद ने विगत 10 अगस्त को दूबेपुर ब्लॉक में आयोजित जिला एवं निगरानी समिति की बैठक में आम लोगों द्वारा मास्क न लगाने पर पुलिस द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को लेकर विवादित बयान दिया था। साथ ही उन्होंने पत्रकारों को बिना ठोस बयान के ब्लैकमेलर कहा था।

परिवाद में कहा गया था कि मेनका गांधी ने बैठक में यह बयान दिया था कि लॉकडाउन के दौरान हॉट स्पॉट की स्थिति में व्यावसायिक गतिविधियां चलने पर पत्रकार द्वारा खबर बनायी जाती है। उसके बाद व्यापारी को ब्लैकमेल किया जाता है। पत्रकार ब्लैकमेलर होते हैं।

उस कार्यक्रम में जिलाधिकारी सी. इंदुमती, पुलिस अधीक्षक शिव हरी मीणा समेत निगरानी समिति से सम्बंधित अधिकारी और मीडिया से जुड़े लोग भी मौजूद थे।

परिवादी राजेश ने सांसद को तलब कर दंडित करने की मांग किया था। उधर सांसद ने अपनी ओर से संतोष कुमार पाण्डेय को अधिवक्ता नामित किया।

अधिवक्ता संतोष ने कोर्ट से कहा कि सांसद के बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने ये भी कहा कि परिवादी राजेश की पत्रकार मान्यता ही नहीं है़ और वो कई पेशी पर गैर हाजिर रहे और अन्य कई साक्ष्य भी कोर्ट में पेश नहीं किया।

इस क्रम में स्पेशल जज पीके जयंत ने साक्ष्य को केस चलाने के काबिल नहीं मानते हुए और महामारी अधिनियम के संबंध में किसी लोकसेवक के जरिए ही परिवाद करने की बात कहते हुए केस को खारिज कर दिया।

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