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Me Too से घिरे एम जे अकबर का मोदी मंत्रिमंडल से अंततः यूं दिया इस्तीफा

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मी टू के तहत एम जे अकबर 16 महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जबकि 20 महिलाएं इन आरोपों के समर्थन में आईं थीं…….”

INR. मी टू के आरोपों के चलते विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मी टू के तहत एम जे अकबर पर 16 महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जबकि 20 महिलाएं इन आरोपों के समर्थन में आईं हैं। पिछले रविवार को विदेश दौरे से लौटने के बाद अकबर ने न सिर्फ इस्तीफा देने से इन्कार किया था बल्कि अपने उपर लगे सारे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था।

इस्तीफा देने के बाद एम जे अकबर ने मीडिया में अपना लिखित बयान जारी कर अपनी बात कही है। अकबर ने कहा कि वह अपने उपर लगे आरोपों को अदालत में चुनौती दी है। व्यक्तिगत स्तर पर भी इन गलत आरोपों का जवाब देंगे। भारत सरकार की सेवा करने का अवसर देने के लिए उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज को  धन्यवाद देते हुए कहा है कि उनके चलते मुझे देश की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ जिसका मैं जीवन भर आभारी रहूंगा।

एम जे अकबर के इस्तीफा देने के बाद उन पर सबसे पहले आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी ने ट्वीट कर कहा है कि आज मैं एक महिला के रूप में एमजे अकबर के इस्तीफे को सही तरीके से महसूस कर सकती हूं, लेकिन मुझे अभी भी उस दिन की प्रतीक्षा है जब इसके लिए मुझे अदालत से न्याय मिलेगा।, वहीं गजाला वहाब ने कहा कि यह तीन दिन पहले ही हो जाना चाहिए था।

इसके पहले यौन शोषण के आरोपों से घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ पत्रकार प्रिया रमानी समेत कई महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया था। एमजे अकबर द्वारा मानहानि का केस दर्ज कराने के बाद प्रिया रमानी के समर्थन में 20 महिला पत्रकार सामने आई थी, जिसके बाद अकबर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। आरोप लगाने वाली ये सभी महिला पत्रकार ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकी हैं। इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही है। साथ ही, अदालत से निवेदन किया है कि अकबर के खिलाफ उन्हें सुना जाए।

मी टू के तहत एम जे अकबर के खिलाफ जारी संयुक्त बयान में दावा किया गया है कि उनमें से कुछ (महिला पत्रकारों) का अकबर ने यौन उत्पीड़न किया है, जबकि कई अन्य महिलाएं भी इसकी गवाह हैं।

महिला पत्रकारों ने अपने हस्ताक्षर वाले संयुक्त बयान में कहा है, ‘इस लड़ाई में प्रिया रमानी अकेली नहीं हैं। हम मानहानि के मामले सुनवाई कर रही माननीय अदालत से आग्रह करते हैं कि याचिकाकर्ता (एमजे अकबर) के हाथों हममें से कुछ के यौन उत्पीड़न को लेकर और अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं (महिला पत्रकारों) की गवाही पर विचार किया जाए, जो इस उत्पीड़न की गवाह थीं।’

एम जे अकबर पर मी टू के तहत ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकीं पत्रकारों जिन्होंने संयुक्त बयान पर दस्तखत किए हैं, उनमें मीनल बघेल (1993-1996), मनीषा पांडेय (1993-1998), तुषिता पटेल (1993-2000), कणिका गहलोत (1995-1998), सुपर्णा शर्मा (1993-1996), रमोला तलवार बादाम (1994-1995), होइहनु हौजेल (1999-2000), आयशा खान (1995-1998), कुशलरानी गुलाब (1993-1997), कनीजा गजारी (1995-1997), मालविका बनर्जी (1995-1998), ए टी जयंती (1995-1996), हामिदा पार्कर (1996-1999), जोनाली बुरागोहैन, मीनाक्षी कुमार (1996-2000), सुजाता दत्ता सचदेवा (1999-2000), रेशमी चक्रवाती (1996-98), किरण मनराल(1993-96) और संजरी चटर्जी शामिल हैं। डेक्कन क्रॉनिकल की एक पत्रकार क्रिस्टीना फ्रांसिस (2005-2011) ने भी इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं।

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