कोरोना संकट काल में जहां सरकारी डाक्टर बिना छुटटी लिए मानवता की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं। वे खतरे से खेल रहे हैं और उसके बाद भी मरीजों की सेवा कर रहे हैं। वहीं निजी अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को लेकर इंसानियत को शर्मसार करने में कोई कोर कसर नहीं छेड़ रहे

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। बिहार के बक्सर जिले में एक अस्पताल की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। इसमें ट्रे में मां अपने बच्चे को ली है जबकि पिता कंधे पर ऑक्सीजन लिए हैं।

खबर है कि चौसा से नवजात को लेकर आया दंपत्ति चौसा के ही एक निजी अस्पताल से रेफर होकर सदर अस्पताल आया था।

निजी अस्पताल में नवजात की हालत बिगड़ने पर परिजन हो-हल्ला न करें, इसके लिए अस्पताल ने बच्चे को रेफर करने के साथ उसके परिजनों को ऑक्सीजन सिलेंडर भी थमा दिया और वहीं ऑक्सीजन सिलेंडर लिए नवजात के माता-पिता जब सदर अस्पताल पहुंचे तो किसी ने तस्वीर ले ली।

फिर तस्वीर वायरल हो गई और उसके लिए सदर अस्पताल की सरकारी व्यवस्था को कसूरवार ठहरा दिया गया।

उधर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक का कहना है कि नवजात के परिजन चौसा के किसी निजी अस्पताल से बच्चे को लेकर आए थे। अस्पताल में एसएनसीयू में उसे भर्ती किया गया। हालांकि नवजात की हालत गंभीर थी। ऐसे में उसे बचाया नहीं जा सका। सदर अस्पताल में इतना छोटा सिलेंडर भी नहीं है, जिसे नवजात के परिजन कंधे पर लेकर घूम रहे थे।

सिविल सर्जन डॉ.जितेन्द्र नाथ के अनुसार दो किलो का ऑक्सीजन सिलेंडर सदर अस्पताल का हो ही नहीं सकता है। सबसे बड़ी बात कि एसएनसीयू में आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भी नहीं है। वहां तो पाइप लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है।

सिविल सर्जन की मानें तो इस मामले की जांच चौसा एवं राजपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सौंपी गई है। उनसे मामले की जांच करने के लिए कहा गया है कि किस निजी अस्पताल में इस तरह से मरीज के साथ खिलवाड़ किया गया और उसे ऑक्सीजन सिलेंडर थमा कर सदर अस्पताल भेज दिया गया।

सीएस के अनुसार सदर अस्पताल में जब नवजात के परिजन उसको लेकर आए थे तो उसकी हालत ठीक नहीं थी। मौके पर मौजूद डाक्टर ने नवजात को पटना रेफर कर दिया। लेकिन वे लोग ले जाने को तैयार नहीं हुए और एसएनसीयू में इलाज के दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया।

बक्सर डीएम अमन समीर के अनुसार, इस तरह का मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन से इसके बारे में पूछताछ की गई थी। सिविल सर्जन का यही कहना था कि वे निजी अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर सदर अस्पताल आए थे। सिविल सर्जन ने इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट दे दी है। उनसे मामले की जांच कर जांच प्रतिवेदन देने के लिए कहा गया है। (इनपुटःजागरण)

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