स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने इसे सभी जिलों के डीसी को भेजकर प्रोटोकॉल के मुताबिक ही काम करने का निर्देश दिया है। सरकार ने इसे चार हिस्सों में बांटा है। वे हैं कांटैक्ट ट्रैसिंग, कंटेनमेंट जोन, होम आइसोलेशन और डिस्चार्ज के प्रोटोकॉल। झारखंड सरकार ने इसे ICMR की गाइडलाइन के तहत ही बनाया गया है

INR डेस्क.   कोरोना हो या फिर आस-पास के किसी को संक्रमण का खतरा हो,होम आइसोलेशन लेना हो या फिर अस्पताल में भर्ती लेना हो, झारखंड सरकार ने हर किसी के लिए नियम बनाए हैं।

कॉन्टैक्ट ट्रेसिंगः कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मरीज मिलने के 72 घंटे के अंदर की जानी चाहिए। हाइ रिस्क और लो रिस्क कांटैक्ट की पहचान करनी है। हाई रिस्क वो लोग हैं जो संक्रमित के साथ एक ही घर में रहते हैं। संक्रमित का सामान साझा करते हैं।

गाड़ी में एक साथ सफर करने वाले भी हाई रिस्क में आते हैं। लो रिस्क में वो लोग आते हैं जो एक ही रूम, क्लास, कार्यस्थल में रहने वाले लोग, एक ही साथ बस, ट्रेन, फ्लाइट या अन्य वाहन से सफर करते हैं।

हाई रिस्क वाले लोगों को बाहर के क्वारंटाइन सेंटर में रखना है, जबकि लो रिस्क वाले लोगों को होम क्वारंटाइन का पालन करना है।

होम आइसोलेशनः होम आइसोलेशन में वो लोग होते हैं जो एसिम्पटोमेटिक हों या कोरोना के हल्के फउल्के लक्षण दिखायी दें। वो बुजुर्ग जिनमें हाइपरटेंशन, डायबिटीज, दिल की बीमारी सहित गंभीर रोग हो तो उन्हें होम आइसोलेशन जांच के बाद ही दी जा सकती है।

घर पर एक केयर गिवर होना चाहिए जो 24 घंटे मरीज की देखभाल कर सके। जिस घर में मरीज हो वो हवादार होना चाहिए। साथ में बाथरूम भी अटैच होना चाहिए। इसके अलावा एक डिजिटल थर्मामीटर और एक लॉग शीट हो जिसमें लगातार शरीर का तापमान दर्ज किया जा सके।

ऑक्सीमीटर भी जरुरी है ताकि ऑक्सीजन लेवल की जांच की जा सके। मेडिसिन भी होना चाहिए जिसमें हाइड्रोक्लोरोक्वीन, बी-कंपलेक्स, जिंक, विटामिन सी, विटामिन डी टैबलेट है।

प्रोटोकॉलः कोरोना संक्रमित मरीज को जरुरत के मुताबिक अस्पताल, कोविड-19 केयर सेंटर या होम आइसोलेशन में रखा जाना है। एक बार मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गयी और वह अस्पताल में भर्ती हो गया तो उसकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उसे डिस्चार्ज किया जा सकेगा।

मरीज के इलाज प्रबंधन के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था की गयी है। इसके तहत एसिम्पोटोमैटिक को कोविड केयर सेंटर या होम आइसोलेशन में रखा जा सकता है। 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग को डीसीएचसी या डीसीएच में रखा जाना है।

डिस्चार्ज नियमः माइल्ड और एसिम्पटोमैटिक मरीज की सात दिन बाद जांच होगी। सिम्पटोमैटिक मरीज की जांच 10 दिनों में होगी। किसी भी मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए यह अनिवार्य है कि उसका कम से कम एक बार निगेटिव रिजल्ट आना चाहिए। डिस्चार्ज किये जाने के बाद मरीज को 14 दिनों तक होम क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य है।

टेस्ट निगेटिव आने के बाद भी बुखार और सांस लेने में तकलीफ हो, तो डिस्चार्ज नहीं किया जायेगा। (इनपुटः द फॉलोअप टीम)

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