देश के आर्थिक हालात चिंताजनक :आरबीआई

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वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से कर्ज लेना तो सस्ता होगा लेकिन जमा योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है। बैंक आम लोगों को कर्ज सस्ता देने के लिए एफडी पर ब्याज घटाएंगे। इससे एफडी करने वाले निवेशकों का रिटर्न घटेगा..   

INR. रिजर्व बैंक ने कोरोना महामारी के चलते उपजे आर्थिक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की रफ्तार शून्य के नीचे ही रहेगी।

हालांकि, उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी छमाही यानी सितंबर के बाद से हालात सुधरने की उम्मीद जताई है।

देश में आर्थिक हालात का जिक्र करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत में मांग घट रही है, बिजली, पेट्रोलियम उत्पाद की खपत के साथ साथ निजी खपत में भी गिरावट हुई है।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण निजी उपभोग को सबसे ज्यादा झटका लगा है। साथ ही निवेश की मांग रुक गई है।

आने वाले दिनों में महंगाई की स्थिति में अनिश्चितता बना रहेगी और इसके सितंबर तक बढ़ने के आसार हैं। उसके बाद ही कमी के आसार है।

अनुमान के मुताबिक अक्तूबर नवंबर महीनों में इसमें नरमी देखने को मिलेगी। रिजर्व बैंक का आकलन है कि दालों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी चिंताजनक है।

शक्तिकांत दास के मुताबिक वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में ही महंगाई दर संतोषजनक स्तर चार फीसदी के नीचे देखने को मिलेगी।

 देश की शीर्ष छह राज्यों के ज्यादातर हिस्से रेड या फिर ऑरेंज जोन में हैं।

सेबी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी ने बताया कि एफडी पर मिलने वाला रिटर्न काफी कम हो गया है। इसके चलते इस पर महंगाई के मुकाबले मिलने वाला रिटर्न नकारात्मक है।

ऐसे में निवेशकों के पास पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि, एसआईपी के जरिये म्यूचुअल फंड और ईएलएस बेहतर विकल्प हैं। इसमें निवेशक अपने लक्ष्य के अनुसार निवेश कर सकते हैं।

लंबी अवधि में इनमें किसी भी निवेश पर बहुत जोखिम नहीं है और निवेशकों को उनके निवेश पर एफडी के मुकाबले काफी अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोरोना संकट की इस घड़ी में कर्ज सस्ता करने के लिए एक बार फिर से रेपो रेट में 40 आधार अंकों की कटौती की है। आरबीआई ने रेपो रेट 4.4 फीसदी से घटाकर चार फीसदी कर दिया है।

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