कोरोना के चलते डूबने के कगार पर इन देशों की अर्थव्यवस्था

बीते 20 साल से अलेजांद्रो कार्रिलो अमरीका में काम कर रहे थे और इस दौरान वे हमेशा अपने घर पर पैसे भेजते रहे…

फ्लोरिडा में कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले दल के साथ काम करके अलेजांद्रो इतना पैसा कमा रहे थे जिससे ना केवल गुज़र बसर हो रही थी बल्कि उन्होंने अपने सातों बच्चों को पढ़ाया-लिखाया। साथ ही, पत्नी और बच्चों के रहने के लिए अपना घर भी बना लिया।

इतना ही नहीं, टैक्सी का बिज़नेस शुरू करने के लिए 33 साल के बेटे जोसे कार्रिलो को एक छोटी ग्रीन कार ख़रीदने में भी मदद की।

कोर्रिलो के परिवार की तरह ही विकसित देशों में काम करने वाले प्रवासी मज़दूर सेंट्रल अमरीकी देशों में पैसा भेजते हैं ताकि उनके परिवार की गुज़र बसर हो सके। लगातार आने वाले पैसों के चलते कई परिवार ग़रीबी से बाहर निकल आते हैं और यह पैसा मुश्किल समय में सुरक्षा घेरा का काम भी करता है।

2019 में अमरीका में काम करने वाले प्रवासी मज़दूरों ने ग्वाटेमाला में क़रीब 10.5 अरब डॉलर की रक़म अपने परिवारों के पास भेजी थी। कोविड-19 संक्रमण से पहले यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था। लेकिन अब यह अर्थव्यवस्था संकट में है।

ग्वाटेमाला में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 1600 मामलों की पुष्टि हुई है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में कई प्रावधान उठाए गए हैं, जिसमें रात के वक्त कर्फ्यू और आवाजाही पर पाबंदियां लगाई गई हैं। हालांकि दूसरे लैटिन अमरीकी देशों की सरकारों ने अपने अपने देशों में लॉकडाउन घोषित किया है।

अमरीका के कई प्रांतों ने भी अपने यहां लॉकडाउन लागू किया जिसके बाद अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और बेरोज़गारी काफ़ी बढ़ गई है। कोरोना संक्रमण की शुरुआत से लेकर 7 मई तक अमरीका में 3.3 करोड़ से भी ज़्यादा लोगों ने बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन दिया है। अमरीकी इतिहास में रोज़गार को लेकर यह सबसे भयावह संकट है।

मार्च में अलेजांद्रो का काम भी व्यवहारिक रूप में कम होता हो गया। इसके चलते वह अपने घर यानी ग्वाटेमाला में पैसा नहीं भेज पा रहे हैं। यह अलेजांद्रो के अकेले परिवार की कहानी नहीं है, लैटिन अमरीका के लाखों परिवार अचानक से इस संकट का सामना कर रहे हैं। इन परिवारों का कोई एक सदस्य अमरीका में घरेलू मजदूरी या शारीरिक श्रम का कोई काम कर रहा था। लेकिन अमरीका में काम बंद होने से ग्वाटेमाला में रह रहे परिवारों के सामने संकट का दौर शुरू हो चुका है।

जोसे कार्रिलो ने अपने पिता के बारे में बताया, “अब तो वह जो भी कमाते हैं वह वहां रहने में ही ख़र्च हो जा रहा है। वे अब कुछ भी नहीं भेज पा रहे हैं। ईमानदारी से कहूं तो मैं चिंतित हूं क्योंकि ढेरों परिवारों का ख़र्च इन पैसों से चलता है। अगर पैसे नहीं आएंगे तो लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा।”

वर्ल्ड बैंक के हाल के अनुमान के मुताबिक 2020 में अमरीका से लैटिन अमरीका भेजे जाने वाले पैसों में करीब 20 प्रतिशत की कमी होगी। दुनिया भर के बारे में माना जा रहा है कि यह 2008 की आर्थिक मंदी की तुलना में चार गुना ज़्यादा बड़ा सकंट सामने है।

विश्लेषकों के मुताबिक दुनिया भर के सामने अभूतपूर्व संकट पैदा हो रहा है। ग्वाटेमाला, होंडुरास और अ सल्वाडोर जैसे देशों के सामने यह संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि ये दूरी पूरी तरह से अमरीका से आने वाले पैसों पर निर्भर हैं।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजलिस में समाजशास्त्र की प्रोफेसर सेसिलिया मेनजिवर ने बताया, “इन देशों में की अर्थव्यवस्था में अमरीका से आने वाले पैसों का अहम योगदान है। यह पहला मौका है जब उनके आमदनी के स्रोत के सामने ऐसा संकट आया है।”

सेसिलिया सेंट्रल अमरीकी मामलों का अध्ययन भी करती रही हैं, उन्होंने कहा, “हम अभी इसके पूरे असर के बारे में नहीं जानते लेकिन इससे भुखमरी का संकट उत्पन्न हो सकता है।”

ऐसा नहीं है कि केवल आश्रित परिवारों के सामने ही तनाव की स्थिति है, जो लोग अपने अपने घरों पर पैसा भेजते रहे हैं, उनके लिए भी यह तनाव की स्थिति है। थिंक टैंक इंटर अमरीकन डॉयलॉग के प्रवासी मजदूर, उनके द्वारा घर भेजे जाने वाले पैसों और उनके विकास से जुड़े कार्यक्रम के निदेशक मैनुएल ओरोजको के मुताबिक प्रवासी मजदूर जब तक गुंजाइश रहेगी तब तक पैसा भेजना जारी रखेंगे।

उनके मुताबिक जो लोग अपने परिवार को छोड़कर अमरीका में मज़दूरी के लिए आते हैं वे परिवार को ग़रीबी को दूर करना अपना दायित्व समझते हैं, घर पैसे भेजना उनके लिए अमरीका में भोजन और रहने पर किए जाने वाले ख़र्च जितना ही अहम है।

बावजूद इसके ग्वाटेमाला के सेंट्रल बैंक के मुताबिक मार्च महीने में अमरीका से आने वाले पैसों में पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। यह गिरावट तब आंकी गई थी जब अमरीका ने अपने यहां पूरी तरह लॉकडाउन की घोषणा नहीं की थी।

ग्वाटेमाला के ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी ख़राब है। काजोला के सामुदायिक नेता एडुआर्डो जिमिनेज के मुताबिक संकट की शुरुआत में ही अमरीका से आने वाले पैसों में 50 प्रतिशत की कमी हो चुकी है।

1980 के दशक में ग्वाटेमाला में जब सिविल संघर्ष छिड़ा था तब लोगों ने अमरीका का रूख़ किया था। 15000 की आबादी वाले काजोला की तस्वीर भी अमरीका गए लोगों की बदौलत बदल गई है।

प्रवासी मज़दूरों के भेजे पैसों की बदौलत काजोला में नई इंडस्ट्री दिखाई देने लगी है। कंस्ट्रक्शन, कारपेंटर का काम, इलेक्ट्रिक वर्क और दूसरे छोटे मोटे काम धंधों ने खेती किसानी की जगह ले ली।

जिमिनेज ने बताया, “ख़ासकर काजोला में काफी असर होगा। उत्तरी अमरीका से आने वाले पैसों पर यहां के लोगों का अस्तित्व ठिका हुआ है।”

जिमिनेज खुद प्रवासी मज़दूर के तौर पर अमरीका में काम कर चुके हैं। 10 सालों तक वे अमरीका में बिना किसी काग़ज़ात के अवैध प्रवासी मजदूर की तरह काम करते रहे। 2006 में वे ग्वाटेमाला लौट आए। अपने देश में लौट कर उन्होंने ग्रामीण लोगों को कारपेंटर और बुनाई की कार्यशालों का आयोजन किया ताकि उन्हें पलायन नहीं करना पड़े।

अब ग्वाटेमाला में कारपेंटर और बुनाई करने वालों की भरमार हो चुकी है। अब वे अपने शहर में पलायन रोकने के लिए दूसरी रणनीतियां बनाने में जुटे हैं ताकि लोग स्थानीय स्तर पर अपने परिवार का पेट भर सकें। जिमिनेज कहते हैं कि यहां के लोगों ने दशकों से अपनी पूंजी को छोड़ रखा है।

जिमिनेज के मुताबिक काजोला के लोगों के लिए यह पूंजी खेती किसानी है। उनके मुताबिक अमरीका पलायन करना आत्मघाती है।

जिमिनेज ने बताया, “हम ग्वाटेमाला के लोग काफी क्रिएटिव होते हैं। यही उम्मीद की वजह भी है। काफ़ी सीमित संसाधन होने के बाद भी ग्वाटेमाला के लोग आगे बढ़ने में यक़ीन रखते हैं। अस्तित्व बचाने के लिए हम लोग रास्ता तलाश लेते हैं।”

ठीक यही बात कार्रिलो के दिमाग में भी आ रही है। शहर के बाहर एक फॉर्मलैंड से वे अपने नियोन ग्रीन कैब चलाते गुजर रहे हैं। कार्रिलो डरे हुए हैं क्योंकि उनके पिता के साथ साथ उनके एक भाई की नौकरी भी चली गई है। कार्रिलो का भाई घर बनवाने के लिए पैसे भेज रहा था ताकि उनकी पत्नी और बच्चे आराम से रहे सकें। लेकिन अब वह काम रूक गया है।

टैक्सी के बिजनेस में भी बहुत कमाई नहीं हो रही है। कार्रिलो कहते हैं कि वे अपने परिवार को चलाने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे लेकिन अगर पिता और भाई की ओर से पैसे नहीं आए तो मुश्किल होगी।

उन्होंने कहा, “टैक्सी की सवारियां भी कम हो गई हैं। संघर्ष कर रहे हैं। पहले वाली स्थिति नहीं रही। अगर एक या दो महीने तक ऐसा ही रहा तो हमलोग काफ़ी मुश्किलों से घिर जाएंगे।” ✍️  बीबीसी न्यूज़ पर मेगन जानेतस्की

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