अन्ना के अनशन से छंट रही है धूंध

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नीरज कुमार मिश्र (दिल्ली के रामलीला मैदान से)
दिल्ली का आँखों देखा हाल लिखना बहुत मुश्किल लग रहा है मैं आज दिन भर रामलीला मैदान में ख़ाक छनता रहा और लोगों से बात करता रहा | अधिकांश तो यह भी नहीं बता पा रहे हैं की वो यहाँ क्यों आये हैं | मिडिया में जो कुछ दिखाया जा रहा है सत्य से उसका कोई वास्ता नहीं है | सब कुछ प्रायोजित सा लग रहा है | कैमरे भी खाश जगह पे लगाये हैं | भीड़ तंत्र होता जा रहा है हमारा लोकतंत्र | 
साफ़ लग रहा है की यह कोई बड़ी साजिश है टू- जी,, सी डब्लू जी,, आदर्श,, आदि घोटाले को छुपाने की | अभी शीला जेल जाने की स्तिथि में आ गयी थी, लोग यह भी भूल गए | जन लोकपाल बिल भी फूल प्रूफ है इसकी कोई गारंटी नहीं है | रोमन मग्सेसे प्राईज़ को भारत में अधिकांश लोग नहीं जानते हैं और जो जानते हैं उन्हें पता है कि यह पुरस्कार केवल लोब्बिंग एवं सेटिंग से मिलती है | अन्ना कहते हैं की यही लोग सदस्य होंगे,यानि भारत के तक़दीर का फैसला वो विदेशी करेंगे जो केजरीवाल के एनं जी ओ “परिवर्तन” और मनीष शिशोदिया के एनं जी ओ “कबीर फौंडेशन” की फंडिंग करते हैं।
कुल मिलाकर,जनलोकपाल के नाम पर मदारी डमरू बजा रहा है और बंदर नाच रहे हैं यह मिडिया, कांग्रेश और अन्ना की त्रिकोणीय मिलीभगत जान पड़ती है | जनता महंगाई से त्रस्त है और मति भ्रम की स्तिथि में है | जय प्रकाश नारायण की गंभीरता दूर दूर तक कही नज़र नहीं आ रही है | सब कुछ प्रायोजित सा लग रहा है
एक दूसरा नज़ारा पेश कर रहा हूँ | झंडे सौ रूपये, टी-शर्ट जिस पर लिखा है – मैं अन्ना हूँ – डेढ़ सौ रूपये , टोपी पचास रूपये में बिक रहा है| स्थानीय व्यापारी वर्ग भी गजब का मौका परस्त है | आज ही आन्दोलन शुरू हुआ और आज ही इन चीज़ों का अम्बार लग गया यहाँ| धड़ल्ले से बिक्री हो रही है|
…………(अगला अपडेट थोड़ी देर में).

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