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अन्ना हजारे के अनशन पर लगाईं गई शर्तें मौलिक अधिकारों का हननः गडकरी

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बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि  ‘विचारों में मतभेद हो सकते हैं लेकिन हर किसी को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है। अन्ना हजारे के अनशन के लिए लगाई गई शर्तें हमारे मौलिक अधिकारों का हनन हैं। यह भाषण की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। जब मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है तो प्रधानमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप क्यों नहीं करते।’ 
16 अगस्त से प्रस्तावित अनशन के लिए दिल्ली पुलिस की लगाई गई शर्तों पर मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने की हजारे की मांग पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीवादी कार्यकर्ता की शिकायतों पर वह वैधानिक प्राधिकार गौर करेगा, जिसने फैसला किया है। उन्होंने कहा कि उनका ऑफिस फैसला करने की प्रक्रिया में किसी भी तरह से शामिल नहीं है। 
दिल्ली पुलिस ने एक शर्त यह रखी है कि हजारे का विरोध प्रदर्शन अधिकतम तीन दिन का होगा और उसमें पांच हजार से अधिक लोग इकट्ठे नहीं होने चाहिए। 
गडकरी ने कहा कि योगगुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान पर पुलिस कार्रवाई और हाल ही में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के बाद हजारे के अनशन पर शर्तें लगाना आपातकाल के दिनों की याद दिलाता है।

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