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कोई बिछड़ा यार मिला दे…ओय रब्बा

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मेरे दोस्तों की तो काफी लम्बी लिस्ट है, लेकिन मैं आज एक खास दोस्त के बारे में बताऊंगा जिसे मैं इस दिन बहुत मिस करता हूँ। बात १९९३-९३ की है। उस समय मैं थर्ड क्लास में गाव के सबसे अच्छे स्कूल बाल विकाश विद्यालय में पड़ता था। मेरे क्लास में लड़का – लड़की तो बहुत पढते थे। लेकिन उसमे मेरी एक खास दोस्त थी जिसका नाम था, “तन्मीर जहाँ ” बड़ा अच्छा नाम था। वो गावं के थाने के बड़ा बाबु की बेटी थी। उसके नाम से ही लग रहा होगा की कोई सहजादी होगी। और सही में वो सहजादी ही थी सिर्फ देखने में ही नहीं बल्कि बात करने और सभी मामले में। दोनों साथ में खेलते कूदते थे लेकिन अचानक एक दिन पता चला की उसके पापा जी का ट्रान्सफर हो गया और वो जाने लगी, तभी तो संचार क्रांति नहीं था और न ही मेरे घर में फ़ोन था। और वो जहाँ जा रही थी उसका नंबर भी नहीं था। बस ४ साल की दोस्ती मैं हमेशा याद करता हूँ। और उसे खोजने की कोशिस करता हूँ। फसेबूक की आबादी भी इतनी बढ गयी है इसीलिए सोचा शायद वो इस पर हो इसीलिए किसी को मालूम हो उसके बारे में तो जरुर बताएं । “हैप्पी फ्रेंडशिप डे तन्नु”      

@सन्नी शरद

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