» पटना साहिब सीट नहीं छोड़ेंगे ‘बिहारी बाबू’, पार्टी के नाम पर कहा ‘खामोश’   » राहुल ने ‘अनुभव-उर्जा’ को सौंपी राजस्थान की कमान   » शपथ ग्रहण से पहले किसान कर्जमाफी की तैयारी शुरू   » यूं टूट रहा है ब्रजेश ठाकुर का ‘पाप घर’   » भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » कांग्रेस पर मोदी के तीखे वार और पांच राज्यों में बीजेपी के हार के मायने ?   » पत्रकार वीरेन्द्र मंडल को सरायकेला SP ने यूं एक यक्ष प्रश्न बना डाला   » …तो नया मोर्चा बनाएँगे NDA के बागी ‘कुशवाहा ‘   » पुलिस सुरक्षा बीच भरी सभा में युवक ने केंद्रीय मंत्री को यूं जड़ दिया थप्पड़   » SC का बड़ा फैसलाः फोन ट्रैकिंग-टैपिंग-सर्विलांस की जानकारी लेना है मौलिक अधिकार  

झारखंडी मीडिया ने तो शहीदों की परिभाषा ही बदल दी

Share Button
यह कतरन है रांची से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र दैनिक हिन्दुस्तान की। कमोवेश यही आलम यहां से प्रकाशित सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से छापी गयी है।इस कहानी के मूल जनक हैं झाविमो सुप्रीमों बाबूलाल मरांडी।जब अलग राज्य गठन के बाद यहां भाजपा की सरकार बनी तो वे उसके मुखिया (प्रथम मुख्यमंत्री) बनाये गये।बिहार में लालू जी तो झारखंड में मरांडी जी।
जब मरांडी जी को लगा कि उनकी कमजोर पड़ रही है,राज्य में डोमिसाइल नीति लागू करने की चर्चा छेड़ दी।फिर क्या था…समूचा झारखंड इसकी आग में धू-धू कर जलने लगा। जिधर देखो तनाव ही तनाव। कथित मूलवासी और बाहरी के बीच हिंसा ही हिंसा।इस हिंसा में दोनों गुटों के कई लोग मारे गए और उसे छुटभैये नेताओं ने शहीद बना दिया।
मैं ऐसे नेताओं की ज्यादा बात नहीं करता।यहां पर मीडिया की बात करना चाहूंगा।जिसने भी गुटीय हिंसा में मारे गये लोगों को एक दशक से शहीद होने की पूंगी हर साल बजाते आ रहा है।क्या वे लोग वाकई शहीदों की श्रेणी में आते हैं..जिनकी टीस आज भी असहनीय है। 

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
» भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क   » …और खून से लथपथ इंदिरा जी का सिर अपनी गोद में रख सोनिया चल पड़ी अस्पताल   » ‘लालू के खिलाफ आपस में मिले थे सुशील मोदी, नीतीश कुमार, राकेश अस्थाना और पीएमओ’   » धर्मांतरण, घर वापसी और धर्मयुद्ध   » जयंती  विशेषः एक सच्चा पत्रकार, जो दंगा रोकते-रोकते हुए शहीद   » ‘लोकनायक’ के अधूरे चेले ‘लालू-नीतीश-सुशील-पासवान’   » जो उद्योग तम्बाकू महामारी के लिए जिम्मेदार हो, उसकी जन स्वास्थ्य में कैसे भागीदारी?   » इस बार उखड़ सकते हैं नालंदा से नीतीश के पांव!   » जानिये मीडिया के सामने हुए अलीगढ़ पुलिस एनकाउंटर का भयानक सच  
error: Content is protected ! india news reporter