हाई कोर्ट ने लगाई बालकृष्ण की गिरफ़्तारी पर रोक

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को योगगुरु बाबा रामदेव के निकट सहयोगी बालकृष्ण की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है.
केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने उन पर फ़र्ज़ी डिग्रियाँ हासिल करने के आरोप लगाए हैं और कहा है कि इन्हीं के आधार पर उन्होंने पासपोर्ट बनवाया था.
न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल के एक सदस्यीय पीठ ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए सीबीआई को एक नोटिस भी जारी किया है और तीन हफ़्ते के भीतर इसका जवाब देने को कहा है.
इसके अलावा अदालत ने बालकृष्ण को जाँच में सीबीआई से सहयोग करने और तीन अगस्त को एजेंसी के सामने पेश होने को कहा है.
वैसे बालकृष्ण की ओर से गुरुवार को न्यायमूर्ति पीसी पंत की अदालत में एक याचिका पेश की गई थी लेकिन उन्होंने इस मामले की सुनावाई करने से इनकार कर दिया था और इस मामले को मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष के पास भेज दिया था.
बालकृष्ण को गुरुवार को ही सीबीआई ने पासपोर्ट और डिग्रियों की मूल प्रति से साथ पूछताछ के लिए बुलवाया था लेकिन बालकृष्ण ने एक फ़ैक्स भेजकर सीबीआई से कहा था कि चूंकि उनका पासपोर्ट ब्रिटिश उच्चायोग में जमा है इसलिए उन्हें 20 दिनों का समय दिया जाए.दिल्ली में रामदेव के अनशन के बाद से सरकार और उनके बीच तनातनी चल रही है इसके बाद ये चर्चा चल रही थी कि सीबीआई बालकृष्ण को गिरफ़्तार कर सकती है.
एजेंसी ने बालकृष्ण के तर्क को ख़ारिज करते हुए कहा है कि वे बिना पासपोर्ट के भी पूछताछ के लिए उपस्थित हो सकते हैं.
गत 25 जुलाई को सीबीआई ने बालकृष्ण के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र रचने का मामला दर्ज किया था इसके बाद से वे दिव्य योग मंदिर आश्रम स्थित अपने निवास से लापता थे.
हालांकि गुरुवार की शाम को बाबा रामदेव ने एक प्रेस कांफ़्रेंस बुलाकर कहा था कि ये ख़बरें ग़लत हैं कि बालकृष्ण लापता हैं क्योंकि वे पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में हैं और आश्रम के कुछ कार्यक्रमों में व्यस्त हैं.
उन्होंने कहा कि बालकृष्ण पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और उन्होंने डिग्रियाँ लेने के लिए बाक़ायदा पढ़ाई की है.उनका कहना था कि बालकृष्ण के ख़िलाफ़ षडयंत्र रचा जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने की मांग को लेकर बाबा रामदेव ने दिल्ली में आमरण अनशन शुरु किया था लेकिन सरकार से बातचीत विफल हो जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने रात में अनशन स्थल को खाली करवा दिया था और बाबा रामदेव को हरिद्वार पहुँचा दिया गया था.
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