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आपके घर-जिले नालंदा में चिराग तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ है सुशासन बाबू.

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एक ओर जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेक कार्यों एवं विकास के प्रति उनके बुलंद इरादों की सर्वत्र प्रसंशा हो रही है,वही उनके घर-जिले नालंदा जिले में शासन व्यवस्था का कुछ और ही मंजर दिखता है.निचले स्तर पर जहाँ भ्रष्टाचार चरम स्तर पर है,शीर्ष स्तर पर सारे अधिकारी व जनप्रतिनिधि निकम्मे.सच पूछिए तो सुशासन के ढींढोरा पिटने वाली “नीतीश-राजतंत्र” में यहाँ दीया तले अन्धेरा वाली कहावत पूर्णतः चरितार्थ है.आश्चर्य की बात यो यह है कि नालंदा जिले के सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में राजग के ही विधायक हैं और सब के सब सिर्फ खाने कमाने में व्यस्त है.सबसे बुरी स्थिति नालंदा जिले के चंडी क्षेत्र की है.यहाँ छोटी-छोटी जन समस्याओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है. स्थानीय विधायक हरिनारायण सिंह जो “नीतीश मंत्रिमंडल” में काबीना मंत्री (मानव संसाधन विकास मंत्री” है,उन्हें आम जनता में कम और लूट-खसोंट में कहीं अधिक दिलचस्पी झलकती है. जदयू के ग्लैमर नेता श्री नीतीश कुमार(वर्तमान मुख्यमंत्री) के आशीर्वाद से चुनाव जीतने और मंत्री बनाने के बाद आम जनता के दुःख-दर्द से इन्हें सिर्फ मीडीया तक ही मतलब है.प्रखंड,अंचल,थाना स्तर से लेकर अनुमंडल,जिला स्तर तक के आला अधिकारियों का हाल भी कमोवेश यही है.श्री नीतीश कुमार ने अपनी नालंदा संसदीय सीट का उतराधिकारी जिस युवा नेता कौशलेन्द्र कुमार को चुन सांसद बनवाया है,उससे निकम्मा जनप्रतिनिधि तो जिले के अब तक के इतिहास में नहीं हुआ है.

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