» बच सकती थी एम्स में आग से हुई तबाही, अगर…   » तीन तलाक और अनुच्छेद 370 के बाद एक चुनाव कराने की तैयारी   » बोले रक्षा मंत्री-  अब सिर्फ POK पर होगी बात   » अफसरों से बोले नितिन गडकरी- ‘काम करो नहीं तो लोगों से कहूंगा धुलाई करो’   » तीन तलाक को राष्ट्रपति की मंजूरी, 19 सितंबर से लागू, यह बना कानून!   » तीन तलाक कानून पर कुमार विश्वास का बड़ा रोचक ट्विट….   » मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युग प्रवर्तक   » बिहार के विश्व प्रसिद्ध व्यवसायी सम्प्रदा सिंह का निधन   » पत्नी की कंप्लेन पर सस्पेंड से बौखलाया था हत्यारा पुलिस इंस्पेक्टर   » कर्नाटक में सरकार गिरना लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय : मायावती  

“पूर्णतः तीन वर्गों में बँट चूका है झारखंड का आदिवासी समुदाय”

Share Button
भारत जैसे विश्व के सबसे लोकतान्त्रिक देश में अन्य राज्यों में आदिवासी समुदाय की हालत क्या है,यह एक गहन छानबीन का विषय हो सकतें हैं लेकिन झारखण्ड में सब कुछ उपरी सतह पर दिखता है.
यहाँ आदिवासी समुदाय पूर्णतः तीन वर्गों में विभक्त हो गया है. पहला वर्ग अलग राज्य गठन के बाद सत्तासुख भोग रहा है । दूसरा वर्ग वही पुराना दीन-हीन जीवन जीने को अभिशप्त हैं। तीसरा वर्ग ईसायत की चपेट में आकर एक ऐसा जीवन जीने लगा है जिसमें न तो झारखंडी संस्कृति बची है और न ही भारतीयता।
पहले ईसायत की चपेट में प्रायः आदिवासी समुदाय की बालाएं आती है जो धीरे-धीरे पूरे परिवार-खानदान को अपनी रंग में रंग लेती है। सुच पूछिए तो इसाई मीशिनारियां ऎसी महत्वाकांक्षी बालाओं आर्थिक तौर पर इतनी मजबूत बना देती है कि उसका समूचा परिवार उसी पर निर्भर हो जाता है। अच्छे खासे रसूख वाले दूर-देहात के भोले -भाले आदिवासी युवक भी आधुनिक चकाचौंध में आकर आसानी से इनके गले बंध जाते हैं ।
मूल आदिवासी से बने इस नए इसाई वर्ग में एक नई प्रथा का जन्म हुआ है और वह प्रथा है शादी के पहले माँ बनने तक परस्पर यौन सम्बन्ध स्थापित करना। चूकि इसाई मिशनरियों की मदद से ये बालाएं आत्मनिर्भर अपने परिवार से अलग-थलग रहने लगती है , इसलिए उसे सामाजिक तौर पर किसी भी युवक के साथ रहने में कोई परेशानी नही होती। अगर वह माँ बन जाती है तो बात शादी तक पहुँचती है अन्यथा चल चिरियां दूसरे घोंसले पर वाली कहावत चरितार्थ होने लगती है।
एक सर्वेक्षण के अनुसार मुख्यतः सरकारी गैर सरकारी अस्पतालों,स्कूलों ,दफ्तरों आदि में कार्य करने वाली ऎसी बालाओं की तादात करीव ९८ फीसदी है। जिनमे शादी पूर्व एक से अधिक के साथ खुले यौन- सम्बन्ध स्थापित करना आम बात हो गई ही है।
Share Button

Related News:

कानून से उपर है संत आशाराम बापू ?
देखिए दर्दनाक हादसा का शर्मनाक वीडियो! यही है डिजीटल इंडिया?
देश एक बार फिर आपातकाल की ओर.......
आगामी 30 दिसंबर को शपथ लेगे दो उप मुख्यमंत्री के साथ मोहराबादी मैदान मे शपथ झारखंड के नये मुख्यमंत्...
आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का कड़ा रुख
कानून बनाओ या अध्यादेश लाओ, राममंदिर जल्द बनाओ : उद्धव ठाकरे
कौन है रांची के इस चैनल का मालिक! कौन चला रहा है इसे!
विकास(राँची)-बरही(हजारीबाग) एन.एच.-३३ फोलेनिंग में भारी अनियामियता व गबन-घोटाले की आशंका
मीडिया : अक्ल-शक्ल सब बदला
सुबोधकांत ने खेली मुख्यमंत्री बनने की दांव!
उग्रवाद:शिबू सोरेन की गलतफहमी न.2
कब टूटेगी झारखंडी नेताओ की संकीर्ण मानसिकता?
बिग बी पर लालू हुए लाल, सबसे नापसंद कलाकार बताया
आपके घर-जिले नालंदा में चिराग तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ है सुशासन बाबू.
वैशाली के 3 डीएसपी, 50 इंस्पेक्टर समेत 66 पर एक साथ एफआइआर
“अंकल माओवादी हमारे स्कूल क्यो उडाते है?” नक्सलियो के लिये शर्म है गांव के इन स्कूली बच्चो की चीख
.....और पटना से यूं फुर्र हो गये बिग बी
झारखंड: स्वंय सेवी संस्थाओं हेतु महज कमाई का जरिया बनी राजीव गांधी उद्यमी मित्र योजना
"झारखंड में दिखेगी विनाश की रेखा" !!
झारखण्ड:कौन बनेगा सीएम?तीसरी बार अर्जून मुण्डा!
एक सटीक विश्लेषणः नीतीश कुमार का अगला दांव क्या है ?
अन्ना के अनशन को लेकर दिल्ली में कड़ी व्यवस्था का नजारा
झारखंड:शिबू सोरेन अब भी ताकतवर नेता
अन्ना को धन्यवाद,लेकिन उनका आंदोलन लोकतंत्र के लिए खतरनाकः राहुल गांधी

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
loading...
» तीन तलाक और अनुच्छेद 370 के बाद एक चुनाव कराने की तैयारी   » मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युग प्रवर्तक   » पुण्यतिथिः जब 1977 में येदुरप्पा संग चंडी पहुंचे थे जगजीवन बाबू   » कैदी तबरेज तो ठीक, लेकिन वहीं हुए पुलिस संहार को लेकर कहां है ओवैसी, आयोग, संसद और सरकार?   » डॉक्टरी भी चढ़ गयी ग्लोबलाइजेशन की भेंट !   » विकास नहीं, मानसिक और आर्थिक गुलामी का दौर है ये !   » एक ऐतिहासिक फैसलाः जिसने तैयार की ‘आपातकाल’ की पृष्ठभूमि   » एक सटीक विश्लेषणः नीतीश कुमार का अगला दांव क्या है ?   » ट्रोल्स 2 TMC MP बोलीं- अपराधियों के सफेद कुर्तों के दाग देखो !   » जब गुलजार ने नालंदा की ‘सांसद सुंदरी’ तारकेश्वरी पर बनाई फिल्म ‘आंधी’  
error: Content is protected ! india news reporter