» बड़ा रेल हादसाः रावण मेला में घुसी ट्रेन, 100 से उपर की मौत   » देश में 50 करोड़ मोबाइल सीम कार्ड बंद होने का खतरा   » नीतीश की अबूझ कूटनीति बरकरारः अब RCP की उड़ान पर PK की तलवार   » Me Too से घिरे एम जे अकबर का मोदी मंत्रिमंडल से अंततः यूं दिया इस्तीफा   » ……और तब ‘मिसाइल मैन’ 60 किमी का ट्रेन सफर कर पहुंचे थे हरनौत   » बिहारियों के दर्द को समझिए सीएम साहब   » 70 फीट ऊँची बुद्ध प्रतिमा के मुआयना समय बोले सीएम- इको टूरिज्म में काफी संभावनाएं   » ‘लोकनायक’ के अधूरे चेले ‘लालू-नीतीश-सुशील-पासवान’   » नीतीश-जदयू से जुड़े ‘आम्रपाली घोटाले’ के तार, धोनी को भी लग चुका है चूना   » पीएम मोदी के ‘स्टार हमशक्ल’ को यूं महंगे पड़ रहे ‘अच्छे दिन’  

झारखण्ड: कौन बनेगा सीएम? आदिवासी या सदान?

Share Button

इस बार होगी निर्णायक जंग!

आसन्न झारखण्ड विधानसभा चुनाव के बाद नया मुख्यमंत्री पुनः आदिवासी नेता होगा या गैरआदिवासी यानि सदान वर्ग का ? इन दिनो समुचे प्रदेश मे एक प्रमुख चर्चा का विषय बना गया है. बिहार से अलग राज्य गठन के बाद पिछले नौ वर्षो मे शाषित सभी छः बार मुख्यमंत्री बदले गये. लेकिन बाबूलाल मरांडी,अर्जून मुण्डा, शिबू सोरेन से लेकर मधु कोडा तक. जिस तरह एक नई उम्मीद के साथ उन्हे सत्तासीन किया गया,वे जन भावनाओ पर खरे नही उतरे और उनमे सता संचालन की प्रतीभा की भारी कमी देखी गई. वेशक मौका मिलते ही उपरोक्त सारे आदिवासी नेताओ ने मौका मिलते ही लूट-खसोंट मे शामिल होकर राज्य की दूर्गति कर दी है.इन लोगो मे किसी को मौका मिलने का सीधा अर्थ है पूर्व के ‘तंत्र ’ को बिकसित करना.
अन्य आदिवासी नेताओ मे जो प्रबल दावेदार के नाम सामने आ रहे है, वे मात्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू व पूर्व सांसद रामेश्वर उरांव है.जिनके पास मजबूत ईमानदार अनुभव नही मानी है.
उधर गैर आदिवासी यानि सदान समाज के नेता को भी इस बार मौका मिल सकता है. यदि भाजपा और कांग्रेस गठबन्धन बहुमत हासिल करता तो आदिवासी नेताओ की विफलता का मुद्दा रखकर भाजपा के पूर्व वित मंत्री यशवंत सिन्हा ,प्रदेश अध्यक्ष रघुवर दास ,पूर्व सांसद रामटहल चौधरी तथा कांग्रेस के वर्तमान केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी सरीखे लोग भारी दवाव बना सकते है. ये लोग खुद सत्तसीन हो सकते है या एक नई राजनीतिक समीकरण बना कर किसी अन्य सदान को आगे कर सकते है.
उल्लेख्ननीय है कि नाना प्रकार के समस्याओ का दंश झेल रहे झारखण्ड जैसे बदहाल प्रांत मे करीव 68 प्रतिशत सदान समाज के लोग रह्ते है, जबकि एक अदना गांवप्रधान से लेकर मुख्यमंत्री तक का पद मात्र 32 प्रतिशत आवादी वाली आदिवासी समुदाय ही संभालते आ रही है. जिसमे अपेक्षित योग्यता का नितांत अभाव है. वे लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को भी अपनी ‘जंगली मान्यतायो’ के बल ही चलाना चाहते है

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

» ‘लोकनायक’ के अधूरे चेले ‘लालू-नीतीश-सुशील-पासवान’   » जो उद्योग तम्बाकू महामारी के लिए जिम्मेदार हो, उसकी जन स्वास्थ्य में कैसे भागीदारी?   » इस बार उखड़ सकते हैं नालंदा से नीतीश के पांव!   » जानिये मीडिया के सामने हुए अलीगढ़ पुलिस एनकाउंटर का भयानक सच   » कौन है संगीन हथियारों के साये में इतनी ऊंची रसूख वाला यह ‘पिस्तौल बाबा’   » पटना साहिब सीटः एक अनार सौ बीमार, लेकिन…   » राम भरोसे चल रहा है झारखंड का बदहाल रिनपास   » नोटबंदी फेल, मोदी का हर दावा निकला झूठ का पुलिंदा   » फालुन गोंग का चीन में हो रहा यूं अमानवीय दमन   » सड़ गई है हमारी जाति व्यवस्था  
error: Content is protected ! india news reporter