राहुल गाँधी : देश का “युवराज” और वंशवाद के “विरोधी” कैसे?

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राहुल गांधी. आज की भारतीय मानक समय में देश का भावी नेतृत्वकर्ता. मीडीया ने बाकायदा उन्हें तत्काल “युवराज” और भावी प्रधानमंत्री घोषित किये नहीं थक रही है. लेकिन एक बात कहीं नहीं पढ़ने-सुनने को मिल रहा है कि आखिर लोग-बाग राहुल को युवराज क्यों माने.हाँ भारत जैसे देश में जब राजद के स्वंयभू नेता लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी बिना विधायक बने और निर्दलीय चुनाव जीत कर जब कांग्रेस की महिमा से मुख्यमंत्री और “देवगौड़ा” सरीखे लोग प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो राहुल गांधी का भी देश की बागडोर संभालना भविष्य की गर्त में छुपा हो सकता है.
वाहरहाल कांग्रेस जैसी एतिहासिक पार्टी की बागडोर संभाल रही सत्तारूढ़ सप्रंग संचालिका श्रीमति सोनिया गांधी के लाडले श्री राहुल गांधी के सन्दर्भ में एक बात समझ में नहीं आती है कि वे देश का युवराज तो दूर अपने पार्टी का भी युवराज कैसे घोषित किये जा सकते है. इन दिनों समूचे देश में स्कूल-कॉलेजों तक में जाकर अध्ययनरत युवा वर्ग को कांगेस पार्टी के सदस्य बनने को उकसा रहे खुद राहुल ने युवा कांग्रेस पार्टी की सदस्यता हेतु अधिकतम उम्र ३५ वर्ष निर्धारित की है. साथ ही वे राजनीति में वंशवाद का प्रबल विरोधी घोषित किये हुये हैं.जबकि खुद राहुल की उम्र ४० वर्ष छू रही है और वे किस “वाद” की उपज हैं,इस बात से भारत की मीडीया तो दूर,समूचा विश्व अवगत है.

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