फ्रेंडशिप डे मनाइये जरा संभलकर

Share Button
@सन्नी शरद

दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के एक पल….
हर साल भारत में फ्रेंडशिप डे (यानि कि सिर्फ और सिर्फ दोस्ती का दिन) मानाने की एक नई परम्परा का आगाज हुआ है। अब ये कहाँ तक सही है और कहाँ तक गलत है, ये बहस का मुद्दा हो सकता है। हर कोई इसे अपने अंदाज में देखता है और इसके रंग में मगन हो जाता है। कोई इसे अच्छा कहता है तो कोई लाठी और डंडा लेकर इसका विरोध करता है।
आज के इस गला काट प्रतियोगिता के युग में दोस्ती का ये जो नया संस्करण हुआ है मुझे तो बड़ा भाता है। इस प्रतियोगितावादी जिंदगी में तिल और तंडुल के चक्कर में आज हम सभी पिसते चले जा रहे हैं और अपनों से दूर चले जा रहे हैं। रात को देर तक जागना और सुबह होते ही बॉस का फ़ोन आना और बिना नहाये ऑफिस भागना। बस आज हमारी जिंदगी यहीं तक सीमीत हो गयी है। तनाव, ब्लड प्रेसर बढ रहा है। सुबह का नास्ता दोपहर को और दोपहर का रात को भी करने की भी फुर्सत नहीं मिल रही है. ज्यादातर लोग ६० से पहले ही जिंदगी से रिटाएर हो जा रहे हैं। ऐसी जिंदगी में यदि लोग दो पल खुशी का मना ले तो इसमें क्या हर्ज़ है।
शाहरुख़ खान ने एक फिल्म में कहा है की एक लड़का और लड़की कभी दोस्त हो ही नहीं सकते हैं. और अब लोग भी कहते हैं फ्रेंडशिप का मतलब अब वल्गर हो गया है। ये अब सिर्फ लडको और लड़कियों में ही जयादा होता है। लेकिन ये गलत बात है। आज भी अपने आप में आधी दुनिया को समाने वाला फेसबुक इस बात का गवाह है की दोस्तों के मन में दोस्ती अभी जिन्दा है. फेसबुक पर कई ऐसी बात पड़ने को मिलेगी जिसमे कोई अपनी जिंदगी में कुछ हांसिल करके अपने बचपन के दोस्त को खोज रहा है।
दोस्त कोई भी किसी का हो सकता है। यहाँ तक आज एक पिता जी भी अपने बेटे के साथ दोस्त जैसा वैव्हार रखते हैं। ताकि उनका बेटा क्या कर रहा है ये उन्हें पता चल सके।
मेरी नज़र में फ्रेंडशिप डे मनाने के फायदे:
·                     दोस्त को समय देने का एकलौता पर्व।
·                     दोस्तों को याद करने का अच्छा मौका।
·                     दोस्तों के साथ समय बिताने का अच्छा बहाना।
·                     उन दोस्तों को भी याद करने का अच्छा मौका जिनसे छोटी – मोटी बात पर जगडा हुआ हो।
·                     इसमें दोस्त अपने दोस्त को कार्ड और फूल देते हैं, ऐसे में ऐसे में कार्ड और फूल वाले को 
     रोजगार मिलता है।
·                     किसी कैंटीन या ढाबे में गए तो उस दुकान वाले को फायदा।
·                     भूले बिछड़े दोस्तों को याद करने और उन्हें खोजने का अच्छा मौका।
·                     ऑफिस से छुट्टी लेने का एक अच्छा बहाना।
·                     इसी बहाने कई और नए दोस्त बन जाती हैं।
·                     सभी ढाबे और पार्क वाले का बल्ले बल्ले।
फ्रेंडशिप डे मनाने की हानियाँ
·                     अपनी संस्कृति को भूलते जाना और पश्चिमी संस्कृति को अपनाना।
·                     इम्पोर्टेड गिफ्ट दोस्तों को देना। न की देश में गरीबों द्वारा बनाया गया गिफ्ट देना।
·                     लडको द्वारा लड़की का इस दिन का गलत फायदा उठाना।
·                     लड़की के लिए आज का दिन बुरा क्यूंकि घरवाले घर से निकलने नहीं देते हैं।

निष्कर्ष:

दोस्ती के लगभग सभी पहलु को मैंने आज के परिदृश को देखते हुए दर्शाया है। वैसे मुझे ये अच्छा लगता है क्यूंकि इस पर्व में सभी दोस्त एक जगह मिल कर मस्ती करते हैं। और अपना हाले दिल एक दुसरे से बायाँ करते हैं।
0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Share Button

Related News:

शिबू सोरेन की गलतफहमी न.1 : झारखण्ड की ताजा बदहाली के लिये बिहारियो को दोषी ठहराया
चौथा चरण: 9 राज्य,71 सीट, इन नेताओं की किस्मत ईवीएम में होगी बंद
सिर्फ मनमोहन और राहुल गांधी से बात करेंगे अनशन पर बैठे अन्ना !
सिल्ली MLA अमित कुमार ने केन्द्रीय मंत्री से मुलाकात कर रखी ये समस्याएं
शिबू सोरेन:झारखंड का सबसे कद्दावर नेता
झारखंड सरकार के संरक्षण में अमेरिका से चल रही है फर्जी 'आपका सीएम.कॉम' वेबसाइट
एक पत्रकार ने खोली सोहराबुद्दीन केस की असलीयत, कांग्रेस वेनकाब
मंत्री पद से हटाये जा सकते है सुबोधकांत सहाय
राखी सावंत ने अन्ना को राम और केजरीवाल को रावण बताया
नालन्दा:शैक्षणिक चेतना का प्रमुख पर्यटन स्थल
जमशेदपुर में एक हाई प्रोफाइल सेक्‍स रैकेट का भंडाफोड़ः तीन युवतियां समेत 6 धराए
झारखंड:कांग्रेस ने कई इतिहास रचे... सुषमा स्वराज
जज मानवेन्द्र मिश्रा ने यूं उकेरी शिवहर के अतीत-वर्तमान का सच
जॉर्ज साहब चले गए, लेकिन उनके सवाल शेष हैं..
गुरुघंटाल "गुरूजी" के कारण एक बार फिर झारखंड में राष्ट्रपति शासन के आसार
धौनी के बाद सुबोध महतो बने झारखंड की शान, कभी साथ खेले धौनी मे इर्ष्या इतनी कि दो शब्द भी न बोले, ने...
विदेशी लहर है भारत पहुंची “बेशर्मी मोर्चा”
"शादी पूर्व ही यौन-सम्बन्ध स्थापित करने का आम प्रचलन है इस 'नव इसाई समुदाय' में "
बिफरे न्यायमूर्तिः ‘ये क्‍या हो रहा है? अदालत बंद कर दें? देश छोड़ के चले जाएं’
बिहारः क्यों वायरल हो रहे हैं औरतों से अपराध के वीडियो?
रांची के रिम्स में लालू से मिलकर यूं गरजे बिहारी बाबू- ‘खामोश’
न.1 दैनिक जागरण के 2न. संवाददाता
नीतिश के खिलाफ कांग्रेस के आक्रामक स्टार प्रचारक होगें तेजस्वी
भाजपा-झामुमो में आज ११:३० बजे होगा तलाक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
Close
Menu
error: Content is protected ! india news reporter