» बच सकती थी एम्स में आग से हुई तबाही, अगर…   » तीन तलाक और अनुच्छेद 370 के बाद एक चुनाव कराने की तैयारी   » बोले रक्षा मंत्री-  अब सिर्फ POK पर होगी बात   » अफसरों से बोले नितिन गडकरी- ‘काम करो नहीं तो लोगों से कहूंगा धुलाई करो’   » तीन तलाक को राष्ट्रपति की मंजूरी, 19 सितंबर से लागू, यह बना कानून!   » तीन तलाक कानून पर कुमार विश्वास का बड़ा रोचक ट्विट….   » मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युग प्रवर्तक   » बिहार के विश्व प्रसिद्ध व्यवसायी सम्प्रदा सिंह का निधन   » पत्नी की कंप्लेन पर सस्पेंड से बौखलाया था हत्यारा पुलिस इंस्पेक्टर   » कर्नाटक में सरकार गिरना लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय : मायावती  

बदल रही है दोस्ती की परिभाषा

Share Button
दिलीप कुमार गुप्ता
बात अगर दोस्ती की हो और हम प्रेमचंद की कहानी के पात्र अलगू चौधरी व जुम्मन मियां की बात न करें ऐसा हो ही नहीं सकता। ठीक वैसे ही जैसे बिहारशरीफ की बात हो और बाबा मख्दुम साहब व मणिराम की दोस्ती की मिसाल न पेश हो ऐसा हो ही नहीं सकता। चाहे महाभारत काल के कृष्ण सुदामा की दोस्ती की बात हो या फिल्म शोले के जय-वीरू की, दोस्ती हर मायने में काफी खास है। आज फ्रेंडशीप डे है और पूरे देश में इसे काफी धूमधाम से मनाया जाता है। दोस्तों के बीच ग्रिटिंग्श कार्ड व उपहार देने का एक चलन सा बन गया है। हर कोई इस दिन को अपने दोस्तों के लिए खास बनाना चाहता है। एक नये अंदाज में, एक नये माहौल में, लेकिन वर्तमान में दोस्ती जैसे पवित्र रिश्तों की डोर लोगों के हाथ से छुटती जा रही है। जिसकी जगह मतलबी, स्वार्थ से भरी अपेक्षाओं ने ले ली है। पहले की दोस्ती बिना स्वार्थ, बिना किसी उम्मीद के की जाती थी। अपने समय को याद करते हुए कमरूद्दीनगंज निवासी रंजीत कुमार सिंह बताते हैं कि पहले की दोस्ती अद्भुत होती थी। लोग भले-बुरे का फर्क समझते थे। दोस्त अपने दोस्तों को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरणा देते थे। सुख-दुख के साथी होते थे, दोस्तों के बीच विश्वास व प्रेम था, मगर आज की दोस्ती काफी मतलबी है। लव से ज्यादा दोस्ती में व्यस्त है।
दोस्ती काफी अनमोल है डिम्पल को कहना है कि
एंग्लो मेनिया स्पोकेन सेंटर की छात्रा डिम्पल की माने तो दोस्ती उसके जीव का हिस्सा है। बिना दोस्त के जीवन अधूरा है। अच्छी, बुरी सभी मेमरी आप दोस्तों से शेयर कर सकते हैं।
सोच समझ कर दोस्ती करें आज जो माहौल है, दोस्त-दोस्त की हत्या कर रहा है। अपराध में दोस्तों को धकेल रहा है। गलत चीजों के लिए प्रेरित कर रहा है। ऐसे में दोस्त वो भी अच्छा व सच्चा बनाना काफी बड़ी चुनौती है। इसलिए सोच-समझकर दोस्ती करें।
दोस्ती से पवित्र रिश्ता कुछ हैं ही नहीं।भैंसासुर निवासी तुलसी की मानें तो दोस्ती से अच्छा व पवित्र रिश्ता कुछ हो ही नहीं सकता। लोग कहते हैं कि लड़के-लड़की कभी अच्छे दोस्त नहीं होते। जरूरत है मानसिकता को सही करने की।
Share Button

Related News:

बीए फेल धोनी को मिलेगी डॉक्टर ऑफ लॉ की डिग्री !
सही सलामत घर लौटे निवर्तमान राजद विधायक का राज
बताईये: दोनों में कौन है क्रिकेटर युसूफ पठान?
बिहार:गरीबों को टरकाते हैं हिलसा अनुमंडल के पदाधिकारी
सरकार बताए कि MBBS छात्राओं पर पुरुष पुलिस ने क्यूं की ऐसी बर्बरताः हाई कोर्ट
अनिल अंबानी के नहीं आए अच्छे दिन, तिलैया अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट रद्द
अर्जुन मुंडा का आत्मघाती खेल
चिराग पासवान की दो टूक- मुश्किल होगी 2019 में NDA की डगर
काफी दुर्भाग्यजनक है सुदेश महतो की राजनीतिक महत्वाकान्क्षा
बाल ठाकरे-राज ठाकरे देशद्रोही मानसिकता के लोग : नीतीश कुमार
झारखंडी सत्ता का फिफ्टीकरण: ढाई साल तक "गुरूजी" मुख्यमंत्री और उसके बाद उनका बेटा हेमंत सोरेन बनेगा ...
जंतर मंतर पर अब कैसे करेंगे अनशन अन्ना
ये न्यूज़ चैनल नहीं, अभिशाप है
झारखण्ड:इस बार होगी निर्णायक जंग !
BSNL देगी यूजर्स को फ्री 1जीबी डेटा
पत्नी अपूर्वा शुक्ला ने की थी रोहित शेखर तिवारी की गला दबा हत्या
राहुल ने मुंह खोला, कहा लोकपाल से नहीं मिटेगा भ्रष्टाचार
गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से 30 बच्चों की मौत
नीतिश के खिलाफ कांग्रेस के आक्रामक स्टार प्रचारक होगें तेजस्वी
झारखंड की बदहाली कांग्रेस की गलत नीतियो की देन : नीतिश
गोविन्दाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट से की रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत से बाहर करने की मांग
भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्नामय हुआ नालन्दा
रांची के अखबार : सेमिनार एक,लेकिन समाचार बने अनेक
'इ जनता बा मोदी जी! दौड़ा-दौड़ा के सवाल पूछी'

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
loading...
» तीन तलाक और अनुच्छेद 370 के बाद एक चुनाव कराने की तैयारी   » मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युग प्रवर्तक   » पुण्यतिथिः जब 1977 में येदुरप्पा संग चंडी पहुंचे थे जगजीवन बाबू   » कैदी तबरेज तो ठीक, लेकिन वहीं हुए पुलिस संहार को लेकर कहां है ओवैसी, आयोग, संसद और सरकार?   » डॉक्टरी भी चढ़ गयी ग्लोबलाइजेशन की भेंट !   » विकास नहीं, मानसिक और आर्थिक गुलामी का दौर है ये !   » एक ऐतिहासिक फैसलाः जिसने तैयार की ‘आपातकाल’ की पृष्ठभूमि   » एक सटीक विश्लेषणः नीतीश कुमार का अगला दांव क्या है ?   » ट्रोल्स 2 TMC MP बोलीं- अपराधियों के सफेद कुर्तों के दाग देखो !   » जब गुलजार ने नालंदा की ‘सांसद सुंदरी’ तारकेश्वरी पर बनाई फिल्म ‘आंधी’  
error: Content is protected ! india news reporter