» पटना साहिब सीट नहीं छोड़ेंगे ‘बिहारी बाबू’, पार्टी के नाम पर कहा ‘खामोश’   » राहुल ने ‘अनुभव-उर्जा’ को सौंपी राजस्थान की कमान   » शपथ ग्रहण से पहले किसान कर्जमाफी की तैयारी शुरू   » यूं टूट रहा है ब्रजेश ठाकुर का ‘पाप घर’   » भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » कांग्रेस पर मोदी के तीखे वार और पांच राज्यों में बीजेपी के हार के मायने ?   » पत्रकार वीरेन्द्र मंडल को सरायकेला SP ने यूं एक यक्ष प्रश्न बना डाला   » …तो नया मोर्चा बनाएँगे NDA के बागी ‘कुशवाहा ‘   » पुलिस सुरक्षा बीच भरी सभा में युवक ने केंद्रीय मंत्री को यूं जड़ दिया थप्पड़   » SC का बड़ा फैसलाः फोन ट्रैकिंग-टैपिंग-सर्विलांस की जानकारी लेना है मौलिक अधिकार  

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के सामने राष्ट्रभाषा का अपमान किया राँची विश्वविद्यालय ने

Share Button
२ अक्टूबर.. .. संकल्प समृद्ध मानवता की याद को दोहराने का दिन………क्योंकि विश्व में सर्वप्रथम हमारेराष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को ही ये दृष्टि मिली कि राजनीति, अर्थ और अधिकार मानवता को चरम शिखर तकपहुंचाने का एकमात्र रास्ता है.
…लेकिन ये सब सिर्फ कहने-सुनाने के लिए है? जीवन में कोई मायने नहीं रखते? यदि रखते हैं तो कल मैनेंझारखंड की राजधानी के राँची विश्वविद्यालय परिसर स्थित “ मौलाना आजाद सभागार ” में उनके पावन जन्म दिनके अवसर पर आयोजित एक क्वीज प्रतियोगिता में शामिल होने के दौरान मैनें जो महसूस किया, वह गांधी केसिद्धांतों के अनुरूप माने जा सकते हैं?
…राँची विश्वविद्यालय के कुलपति समेत दर्जनों विद्वान शिक्षक मौजूद थे.उन सबों की मौजूदगी में राष्ट्रभाषा हिन्दीका इतना बड़ा अपमान! आज हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जिंदा होते तो वेशक उनकी आत्मा कराह उठाती….अरेमूर्खों मैंने अंग्रेजों की दासता से तो मुक्ति दिला दी, अंग्रेजी मानसिकता से मुक्ति कब पाओगे?
मैं अंग्रेजी भाषा का विरोधी नहीं हूँ. ये सब मैं इस लिए लिख रहा हूँ कि मेरे आँखों के सामने भाषा के नाम परप्रतिभाओं का दमन किया गया है. करीब दो सौ प्रतिभागियों के बीच प्राथमिक चयन के क्रम में अग्रेंजी भाषा में जोप्रश्नपत्र बांटे गये, उसे अस्सी फीसदी से प्रतिभागी समझ नहीं पाए. क्या राष्ट्रपिता के सामने राष्ट्रभाषा हिन्दी केअपमान और हिन्दीभाषी प्रतिभाओं का दमन नहीं है?
…….और तो और, लोगों को गाँधी के रास्तो पर चलने का आह्वान करनेवाले विद्वान शिक्षकों ने अपने राष्ट्रपिता कोसिर्फ अग्रेंजी भाषा में श्रदान्जली ही न दिए अपितु प्रतियोगिता के दौरान चयनित प्रतिभागियों से अग्रेंजी भाषा मेंही सवाल पूछे गये. प्रतिभागियों ने करीब सत्तर फीसदी सबालों के जबाब कड़े अग्रेंजी भाषा के कारण देने में विफलरहे. प्रश्नकर्ता ने अपना परिचय दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल के विश्लेषक के रूप में दिया और कुलपति ने दिल्ली केवातानुकूलित कमरे से निकल कर राँची जैसे(!) शहर में आने पर तहे दिल से धन्यवाद प्रकट किया था.

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
» भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क   » …और खून से लथपथ इंदिरा जी का सिर अपनी गोद में रख सोनिया चल पड़ी अस्पताल   » ‘लालू के खिलाफ आपस में मिले थे सुशील मोदी, नीतीश कुमार, राकेश अस्थाना और पीएमओ’   » धर्मांतरण, घर वापसी और धर्मयुद्ध   » जयंती  विशेषः एक सच्चा पत्रकार, जो दंगा रोकते-रोकते हुए शहीद   » ‘लोकनायक’ के अधूरे चेले ‘लालू-नीतीश-सुशील-पासवान’   » जो उद्योग तम्बाकू महामारी के लिए जिम्मेदार हो, उसकी जन स्वास्थ्य में कैसे भागीदारी?   » इस बार उखड़ सकते हैं नालंदा से नीतीश के पांव!   » जानिये मीडिया के सामने हुए अलीगढ़ पुलिस एनकाउंटर का भयानक सच  
error: Content is protected ! india news reporter