» पटना साहिब सीट नहीं छोड़ेंगे ‘बिहारी बाबू’, पार्टी के नाम पर कहा ‘खामोश’   » राहुल ने ‘अनुभव-उर्जा’ को सौंपी राजस्थान की कमान   » शपथ ग्रहण से पहले किसान कर्जमाफी की तैयारी शुरू   » यूं टूट रहा है ब्रजेश ठाकुर का ‘पाप घर’   » भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » कांग्रेस पर मोदी के तीखे वार और पांच राज्यों में बीजेपी के हार के मायने ?   » पत्रकार वीरेन्द्र मंडल को सरायकेला SP ने यूं एक यक्ष प्रश्न बना डाला   » …तो नया मोर्चा बनाएँगे NDA के बागी ‘कुशवाहा ‘   » पुलिस सुरक्षा बीच भरी सभा में युवक ने केंद्रीय मंत्री को यूं जड़ दिया थप्पड़   » SC का बड़ा फैसलाः फोन ट्रैकिंग-टैपिंग-सर्विलांस की जानकारी लेना है मौलिक अधिकार  

अर्जुन मुंडा:झारखंडी राजनीति में बलि का नया बकरा

Share Button
अभी तक मीडिया और राजनीति जगत से जिस तरह की प्रामाणिक सूचनाएं आ रही है,उससे यह तय है कि यदि कोई अनहोनी नहीं हुआ तो आगामी २५ मई को राज्य में अब तक की सबसे निकम्मी-आलसी “शिबू सरकार” का पतन हो जायेगा और उसके स्थान पर भाजपा सांसद अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में सरकार बनाने-चलाने के तिकडम दिखने लगेगें.अर्जुन मुंडा वह शख्स हैं.जो झामुमो की गोद में पले हैं और आज भाजपा के आँचल में बढ़ रहे हैं.ऐसे में ये मान लेना कि वे सब कुछ संभाल लेगें,फिलहाल यह कहना बड़ा मुश्किल है क्योंकि यहाँ के राजनीतिक हालात इतने जटिल है कि मुंडा के सामने उनके राजनीतिक गुरू सोरेन से भी अधिक कांटे बिछे नज़र आते हैं.
झामुमो सुप्रीमो के सामने तो मेरी समझ में एकमात्र समस्या मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए विधानसभा चुनाव लड़ना और उसे जीतने की थी,जो कि तमाड विधानसभा उपचुनाव की तरह आगे की हार का भय,पारिवारिक कलह के बीच अपनी ही पार्टी के अंदरूनी असहयोग के कारण संभव नहीं हो सका तथा उनकी समूची सरकार जन्मकाल से ही “पालिटिकल कौमा” में है.
भाजपा-झामुमो-आजसू-जदयू के असहज गठबंधन के द्वारा घोषित भावी मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की हालत देखिये : शपथ ग्रहण के पहले ही उपमुख्यमंत्री-मंत्री के कोटे व विभाग तय कर लिए गये हैं. ५०-५०- के फार्मूले पर झामुमो-आजसू को उपमुख्यमंत्री के अलावे क्रमशः पांच-तीन मंत्री और सहयोगी जदयू को एक मंत्री पद मिलेगें. भाजपा के खाते में मुख्यमंत्री,विधानसभा अध्यक्ष व तीन मंत्री पद रहेगें. उसपर तुर्रा यह कि झामुमो के कुल १८ विधायकों में १२ विधायक विदक रहे हैं.अंदर ही अंदर कांग्रेस की यूपीए गठबंधन के साथ खिचड़ी पकाने की सूचना है.
हालांकि आज बिहार के गर्भपात से जन्में इस झारखंड में जिस तरह की परिस्थतियां उत्पन्न है,उस आलोक में संभावित “मुंडा सरकार” की लंबी उम्र की कामना होनी चाहिए लेकिन जहां झारखंड की कुत्सित राजनीति की वेदी पर अर्जुन मुंडा सरीखे एक और बकरे की बलि देने की तैयारी कर ली गई हो, ऐसे में कोई कब तक खैर मनाएगा?

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
» भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आत्म मंथन का जनादेश   » जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क   » …और खून से लथपथ इंदिरा जी का सिर अपनी गोद में रख सोनिया चल पड़ी अस्पताल   » ‘लालू के खिलाफ आपस में मिले थे सुशील मोदी, नीतीश कुमार, राकेश अस्थाना और पीएमओ’   » धर्मांतरण, घर वापसी और धर्मयुद्ध   » जयंती  विशेषः एक सच्चा पत्रकार, जो दंगा रोकते-रोकते हुए शहीद   » ‘लोकनायक’ के अधूरे चेले ‘लालू-नीतीश-सुशील-पासवान’   » जो उद्योग तम्बाकू महामारी के लिए जिम्मेदार हो, उसकी जन स्वास्थ्य में कैसे भागीदारी?   » इस बार उखड़ सकते हैं नालंदा से नीतीश के पांव!   » जानिये मीडिया के सामने हुए अलीगढ़ पुलिस एनकाउंटर का भयानक सच  
error: Content is protected ! india news reporter