» …तो नया मोर्चा बनाएँगे NDA के बागी ‘कुशवाहा ‘   » पुलिस सुरक्षा बीच भरी सभा में युवक ने केंद्रीय मंत्री को यूं जड़ दिया थप्पड़   » SC का बड़ा फैसलाः फोन ट्रैकिंग-टैपिंग-सर्विलांस की जानकारी लेना है मौलिक अधिकार   » जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क   » चारा घोटा की नींव रखने वाले को पर्याप्त सबूत होते भी सीबीआई ने क्यों बख्शा!   » बलिया-सियालदह ट्रेन से भारी मात्रा में नर कंकाल समेत अंतर्राष्ट्रीय तस्कर धराया   » लेकिन, प्राईवेट स्कूलों की जारी रहेगी मनमानी, बोझ ढोते रहेंगे मासूम   » ईको टूरिज्म स्पॉट बनकर उभरेगा घोड़ा कटोरा :सीएम नीतीश   » कानून बनाओ या अध्यादेश लाओ, राममंदिर जल्द बनाओ : उद्धव ठाकरे   » 26 को प्रभातफेरी निकाल बच्चें चमकाएंगे यूं सरकार का चेहरा  

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्मदिन पर ये उनका अपमान नहीं तो क्या है ?

Share Button
२ अक्टूबर.. एक संकल्प समृद्ध मानवता की याद को दोहराने का दिन..क्योंकि विश्व में सर्वप्रथम हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को ही ये दृष्टि मिली कि राजनीति, अर्थ और अधिकार मानवता को चरम शिखर तक पहुंचाने का एकमात्र रास्ता है.
…लेकिन ये सब सिर्फ कहने-सुनाने के लिए है? जीवन में कोई मायने नहीं रखते? यदि रखते हैं तो कल मैनें झारखंड की राजधानी के राँची विश्वविद्यालय परिसर स्थित “ मौलाना आजादसभागार ” में उनके पावन जन्म दिन के अवसर पर आयोजित एक क्वीज प्रतियोगिता में शामिल होने के दौरान मैनें जो महसूस किया, वह गांधी के सिद्धांतों के अनुरूप माने जा सकते हैं?
…राँची विश्वविद्यालय के कुलपति समेत दर्जनों विद्वान शिक्षक मौजूद थे.उन सबों की मौजूदगी में राष्ट्रभाषा हिन्दी का इतना बड़ा अपमान! आज हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जिंदा होते तो वेशक उनकी आत्मा कराह उठाती….अरे मूर्खों, मैंने अंग्रेजों की दासता से तो मुक्ति दिला दी, अंग्रेजी मानसिकता से मुक्ति कब पाओगे?
मैं अंग्रेजी भाषा का विरोधी नहीं हूँ. ये सब मैं इस लिए लिख रहा हूँ कि मेरे आँखों के सामने भाषा के नाम पर प्रतिभाओं का दमन किया गया है. करीब दो सौ प्रतिभागियों के बीच प्राथमिक चयन के क्रम में अग्रेंजी भाषा में जो प्रश्नपत्र बांटे गये, उसे अस्सी फीसदी से प्रतिभागी समझ नहीं पाए. क्या राष्ट्रपिता के सामने राष्ट्रभाषा हिन्दी के अपमान और हिन्दीभाषी प्रतिभाओं का दमन नहीं है?
…….और तो और, लोगों को गाँधी के रास्तो पर चलने का आह्वान करनेवाले विद्वान शिक्षकों ने अपने राष्ट्रपिता को सिर्फ अग्रेंजी भाषा में श्रदान्जली ही न दिए अपितु प्रतियोगिता के दौरान चयनित प्रतिभागियों से अग्रेंजी भाषा में ही सवाल पूछे गये. प्रतिभागियों ने करीब सत्तर फीसदी सबालों के जबाब कड़े अग्रेंजी भाषा के कारण देने में विफल रहे. प्रश्नकर्ता ने अपना परिचय दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल के विश्लेषक के रूप में दिया और कुलपति ने दिल्ली के वातानुकूलित कमरे से निकल कर राँची जैसे(!) शहर में आने पर तहे दिल से धन्यवाद प्रकट किया था.

Related Post

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
» जयरामपेशों का अड्डा बना आयडा पार्क   » …और खून से लथपथ इंदिरा जी का सिर अपनी गोद में रख सोनिया चल पड़ी अस्पताल   » ‘लालू के खिलाफ आपस में मिले थे सुशील मोदी, नीतीश कुमार, राकेश अस्थाना और पीएमओ’   » धर्मांतरण, घर वापसी और धर्मयुद्ध   » जयंती  विशेषः एक सच्चा पत्रकार, जो दंगा रोकते-रोकते हुए शहीद   » ‘लोकनायक’ के अधूरे चेले ‘लालू-नीतीश-सुशील-पासवान’   » जो उद्योग तम्बाकू महामारी के लिए जिम्मेदार हो, उसकी जन स्वास्थ्य में कैसे भागीदारी?   » इस बार उखड़ सकते हैं नालंदा से नीतीश के पांव!   » जानिये मीडिया के सामने हुए अलीगढ़ पुलिस एनकाउंटर का भयानक सच   » कौन है संगीन हथियारों के साये में इतनी ऊंची रसूख वाला यह ‘पिस्तौल बाबा’  
error: Content is protected ! india news reporter