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30 साल के जालसाजों पर कहर ढायेगी बिहार शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर का यह फैसला

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बिहार बोर्ड शिक्षा को सुधारने के साथ-साथ चल रहे फर्जी कार्यों को रोकने के लिए पूरी तरह से लगी हुई है। जो लोग मैट्रिक की परीक्षा नाम बदल कर दो दो बार देते आया रहे है थे, वैसे फर्जी विद्यार्थियों को बोर्ड अब जोड़ का झटका देने जा रही है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति एक ऐसा ऐप बनवा रही है, जिससे डबलिंग होने पर ऐप खुद ब खुद उन परीक्षार्थियों का नाम शार्ट लिस्ट कर लेगा, जिन्होंने अपनी उम्र कराने के लिए 10वीं की परीक्षा दोबारा दी है। 

बोर्ड इस ऐप के जरीय पिता का नाम, एक ही पता तथा कई अन्य ऑप्शन्स के जरिए फर्जी विद्यार्थियों को बेनकाब करने की तैयारी कर रही है। बोर्ड को ये फैसला गणेश की वजह से लेना पड़ा, जिसने उम्र कम कराने के लिए 10वीं की परीक्षा दोबारा दी और इंटर में टॉप कर गया।

गणेश ने 1990 में बिहार बोर्ड से पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। उसके बाद दोबारा उसने 2015 में मैट्रिक की परीक्षा उम्र कम कराने के लिए पास की, ताकि वो सरकारी नौकरी पा सके।

गणेश जैसे हजारों लोग हैं जो मैट्रिक यानि 10वीं की परीक्षा दोबारा देते हैं। बोर्ड अगर ऐप लांच कर देती है तो हजारों छात्रों के सर्टिफिकेट रद्द हो सकते है। बोर्ड अगले तीन महीनों के अंदर पिछले 30 सालों के रिकॉर्ड को इस ऐप में अपलोड करेगा।

बोर्ड 1986 से लेकर अब तक के रिकॉर्ड को इस ऐप में अपलोड करेगा। यानि इन 30 वर्षों में जिसने भी मैट्रिक की परीक्षा दोबारा दी है, उनका पता लग सकता है।

बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर का कहना है कि जिसका भी पता चलेगा कि उन्होंने दोबारा मैट्रिक की परीक्षा दी है तो उनके सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया जायेगा। अगर 10वीं या मैट्रिक की परीक्षा का सर्टिफिकेट रद्द हो जाता है तो उस व्यक्ति की आगे की सारी डिग्रियां अपने आप अमान्य हो जायेगी।

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