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संजय यादव : विधायक नहीं,1नं.गुंडा है

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विधायक संजय यादव ने कल गोड्डा के एक कर्तव्यनिष्ठ डी सी को अपनी पत्नी के साथ मिलकर दफ्तर में ही पीट दिया..वेशक संजय यादव विधायक नहीं,1नं. का गुंडा है…आइए डालते हैं एक नज़र इस गुंडे की  उत्थान और कारनामे की… 
संजय यादव ! एक बहुत ही साधारण सा यादव परिवार का एक लड़का . बचपन से लेकर जवानी उन्होंने बस स्टेंड और ट्रेकर स्टेंड पर गुजरा है. ढाका मोड़ से जो भी ट्रेकर बांका और अमरपुर कि ओर जाती वो पसेंजेर को आवाज देकर बुलाता था. हर गाड़ी वाला उसे बदले में एक या दो रुपये का सिक्का थमा देता था. आप सोच रहे होंगे कि एक दो रुपये में खेलने वाला यह लड़का आखिर में करोडपति विधायक कैसे बन गया. धैर्य रखिये आगे कि कहानी भी सुनाता हूँ. धीरे-धीरे वो पूरी तरह गाड़ी के धंधे में आ गया…..फिर उसे यह भी पता चलने लगा कि कौन किस गाड़ी से कितने पैसे लेकर रोज आता जाता है…. फिर वह दिन को गाड़ी में काम करता और संध्या होते ही हर गाड़ी को लुटने लगा. उस जिले में उसके खिलाफ गाड़ी लुटने के कई मामले दर्ज होते चले गए….धीरे-धीरे अपनी गाड़ी की लाइन लगा दिया. अब उसके पास इतना हराम का पैसा हो गया कि वह ऊपर से लेकर नीचे तक आसानी से मैनेज कर सकता था. उसके खौफ से उस इलाके का हर कोई उसे जानने लगा. फिर उसकी शादी पथरगामा के आगे नुनाजोर में हो गयी…. तभी से ही उसकी नज़र गोड्डा पर पड़ी. क्यूंकि गोड्डा के ज्यादातर लोगों का नजदीक का बाजार भागलपुर है और हर दिन सैकड़ों व्यापारी उसके घर होकर ही गुजरते थे. ये सब पर अपनी रंगदारी फिक्स करता चला गया.
उस समय बिहार में लालू जी कि सरकार थी……उन्होंने पटना के गाँधी मैदान में “तेल पिलावन रैली” का आयोजन किया था. उस रैली में सबसे अधिक गाड़ी और भीड़ लेकर जाने वाले में संजय यादव का ही नाम आ गया…… तब लालू जी ने उसे अपने पास बुलाया और चुनाव लड़ने का नेयुता दिया. उसे पता था कि उसके डर से गोड्डा के सभी व्यपारी और जात वाले वोट देंगे ही…….इसलिए वो लालू जी के सामने गोड्डा से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रख दिया. और उस समय गोड्डा में रजनीश आनंद कोंग्रेष के ऐसे विधायक थे जो एक बार जीत कर जाते तो फिर वोट मांगने ही आते थे…..सभी लोग उससे खार खाए हुए थे ही……. इसी का पूरा फायदा संजय यादव को मिला और वो पहली बार में ही अपनी जीत दर्ज की…… जितने के बाद कई ऐसे ऑफिसर के नाम लिस्ट में हैं जिनकी वे धुलाई कर चुका है.
दूसरी बार जब चुनाव हुआ तो जनता उसके आतंक से टांग आकर बी जे पी के साधारण से उम्मीदवार मनोहर टेकरीवाल को अपना विधायक चुनी. लेकिन पार्टी बदलते रहने के कारण टेकरीवाल दूसरी बार नहीं जीत पाए और जनता ने फिर से संजय यादव को अपना विधायक चुन लिया.
संजय यादव पर लगे आरोप :

१. विधायक बनने से पहले सैकड़ों सड़क लुट कांड में संलिप्तता !

२. बांका और गोड्डा जिले के कई व्यपारियों से रंगदारी तसिलना !

३. चुनाव में बूथ लुटने में संलिप्तता !

४. बेवजह सरकारी कर्मचारियों कि धुनाई करना !

५. जिले में हर सरकारी ठीके पर अपना एकाधिकार जाताना !
फ़िलहाल गोड्डा से पिरपैती तक फॉर लेन सड़क का निर्माण हो रहा है. और ये काम भी सभी काम कि तरह संजय यादव ने खुद लिया है. हमेशा कि तरह एक महीने में टूटने वाला सड़क संजय यादव बनवाना चाहता था. लेकिन दिलीप झा अपनी निगरानी में अच्छा सड़क बनवाना चाहते थे इसलिए सड़क को कहीं भी कोड़ कर जाँच शुरू कर देते थे. इसी बात को ले कर संजय यादव और झा कि पटती नहीं थी. वो इस बात को लेकर विधानसभा में भी हंगामा किया था.

उल्लेखनी है कि  संजय यादव कि पत्नी जब जिला परिषद् कि चेयरमेन बनी थी तो हवा में सैकड़ो गैर लाइसेंसी हथियार लहराया गया था. सभी प्रमुख मीडिया में खबर छाई रही लेकिन उस पर कोई कार्यवाई नहीं हुई. और आज संजय यादव ने उस इमानदार ऑफिसर के गिरिबान पर हाथ दाल दिया है जो झारखण्ड जैसे प्रदेश में अपने आप में एक मिसाल है. कोई भी ऐसा शक्स नहीं जी बैमानी कि ऊँगली उनकी ओर उठा सके. तो क्यूँ न झारखण्ड को सवारने और प्रगति के पथ पर लाने के लिये हम सब इस इमानदार ऑफिसर का साथ दें. और दिन रात राजनीतिक कि आग में जल रहे इस प्रदेश को एक नयी दिशा दें?


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