हाउ डी मोदी की तर्ज पर अब केम छो ट्रंप!

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उम्मीद की जाना चाहिए कि डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ज्वलंत मुद्दे पर भी डोनाल्ड ट्रंप से चर्चा कर इसका हल निकालने का प्रयास करेंगे…”

 ✍लिमटी खरे

INR डेस्क. अमेरिका को दुनिया का चौधरी माना जाता है। अमेरिका की बादशाहत समूचे विश्व में है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। अमेरिका की नाराजगी कोई भी मोल लेना नहीं चाहता है।

दुनिया के चौधरी के पहले नागरिक अर्थात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24 व 25 तारीख को भारत दौरे पर होंगे। उनका दौरा मुख्यतः दिल्ली और अहमदाबाद पर ही केंद्रित रहेगा। लोक सभा चुनावों के पहले नरेंद्र मोदी अमेरिका गए थे।

डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा परोक्ष तौर पर जिस तरह से होस्टन में हाउडी मोदी का कार्यक्रम करवाया गया था, अब कमोबेश उसी तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा अहमदाबाद में केम छो मोदी कार्यक्रम का आयोजन कराया जा रहा है।

कहा जाता है कि अमेरिका में अप्रवासी भारतीयों के देशी रिश्तेनातेदारों को मोदी के पक्ष में करने के लिए होस्टन का कार्यक्रम कराया गया था तो अब अमेरिका में होने वाले चुनावों के मद्देनजर केम छो मोदी कार्यक्रम कराए जाने की बात भी कही जा रही है, पर इसी बीच अमेरिकन प्रशासन ने भारत को विकाससीश देशों की सूची से बाहर कर दिया है, जिसका असर देश के निर्यात पर पड़ने की संभावना है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसी माह की 24 व 25 तारीख को भारत दौरे पर आ रहे हैं। देखा जाए तो किसी भी शासनाध्यक्ष की भारत यात्रा का अपना अलग ही महत्व होता है। डोनाल्ड ट्रंप बतौर राष्ट्रपति पहली बार भारत का रूख कर रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की इस यात्रा के बाद किस तरह के समीकरण सामने आते हैं यह तो वक्त ही बताएगा, पर उनके स्वागत में जिस तरह की तैयारियां की जा रही हैं, वह देखने लायक ही मानी जा सकती हैं। इस यात्रा में कारोबारी चर्चाओं के अलावा आपसी रिश्तों, दुनिया भर में चल रही सियासत पर भी बात होने की उम्मीद है।

भारत और अमेरिका के बीच दशकों से व्यापारिक संबंध रहे हैं। वैसे यह भी बता दें कि बतौर राष्ट्रपति यह उनके कार्यकाल का आखिरी साल है। माना जा रहा है कि वे भारत के साथ अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं, इसमें रक्षा सौदों पर देश की नजरें हैं। इसके अलावा आपसी व्यापार को बढ़ाने के लिए भी समझौते होंगे।

विश्व में चीन एक महाशक्ति बनकर उभर चुका है यह बात किसी से छिपी नहीं है। हिन्द महासागर में चीन के बढ़ते कदमों को थामने के लिए अमेरिका को भारत के साथ की जरूरत है और डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के पीछे कहीं न कहीं चीन को एक संदेश देना भी प्रतीत होता है। अब यह अमेरिका पर ही निर्भर करता है कि वह भारत का साथ किस तरह से ले पाता है।

जानकारों की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप की इस यात्रा का एक मकसद भारत को एकीकृत वायु हथियार प्रणाली बेचना भी दिख रहा है। यह सौदा 1.9 अरब डालर का है, जो काफी समय से लंबित ही दिख रहा है।

इस यात्रा के दौरान ट्रंप इस सौदे को अंतिम रूप भी दे सकते हैं। अमेरिका के द्वारा भारत को ढाई अरब डालर लागत वाले दो दर्जन सी हॉक हेलीकॉप्टर भी बेचे जाने हैं। इससे देश की सेन्य ताकत तो बढ़ेगी, पर अमेरिका का कारोबार भी फल फूल जाएगा।

भारत में अनेक अमरीकि उत्पाद प्रतिबंधित हैं, इस प्रतिबंध को समाप्त करने की दिशा में भी डोनाल्ड ट्रंप कोशिश कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि भारत के द्वारा अमेरिका को सामग्री निर्यात नहीं की जाती है, भारत भी निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में पहल कर सकता है।

अमेरिका इसके पहले भी अनेक बार भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे भेदभाव को रेखांकित करता आया है। उधर, पाकिस्तान भी अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर बारीक नजर रखेगा, क्योंकि उसे भी अमेरिका की दरकार है।

पाकिस्तान के लिए कश्मीर का मसला सबसे अहम है। अमेरिका कई बार कश्मीर मामले में मदद, मध्यस्थता आदि की बातें करता आया है, इस लिहाज से पाकिस्तान भी इस दौरे में यह जरूर देखेगा कि इस दौरे से भारत को क्या हासिल हुआ!

देखा जाए तो देश में अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट पड़ी है। देश मंदी के दौर से गुजर रहा है। रोजगार के साधनों का अभाव किसी से छिपा नहीं है। युवा पूरी तरह दिग्भ्रमित नजर आ रहा है। देश में जगह जगह एनसीआर और सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर अगर इन सबकी परछाईं भी पड़ी तो भारत को कुछ मुश्किल हो सकती है।

अब बात की जाए डोनाल्ड ट्रंप की अहमदाबाद यात्रा की। डोनाल्ड ट्रंप का अहमदाबाद प्रवास अनेक मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि अहमदाबाद में उनके लिए केम छो ट्रंप नामक एक कार्यक्रम किया जा रहा है।

अहमदाबाद स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रहीं हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह हाउडी मोदी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, उसी तर्ज पर केम छो मोदी का आयेाजन किया जा रहा है।

मोदी के लिए लगभग पचास हजार लोगों की भीड़ होस्टन में जुटाई गई थी तो डोनाल्ड ट्रंप के लिए अहमदाबाद में एयरपोर्ट से लेकर स्टेडियम तक लगभग पचास से सत्तर लाख लोगों की भीड़ दिखाई दे सकती है।

इस पूरी कवायद को डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा अगली बार भी राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारी करने और अमेरिका में बसे भारतीयों का समर्थन जुटाने की कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु और केरल के लोग बड़ी संख्या में हैं।

अमेरिका के चुनावों में वहां बसे भारतीय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। भारतीय मूल के अमेरिका में बसे नागरिकों की अगर बात की जाए तो उसमें मतदाताओं की तादाद तो कम है पर वे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। भारतीय मूल के लोगों के प्रभावों को डोनाल्ड ट्रंप बखूबी जानते हैं।

इतना ही नहीं सियासी दलों को चंदा देने में भी भारतीय मूल के लोग महती भूमिका निभाते हैं। पिछले अनेक चुनावों में यह बात साफ तौर पर उभर चुकी है कि भारतीय मूल के लोग चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन वर्ष 2000 में भारत आए थे, उसके बाद से कमोबेश हर राष्ट्रपति ने भारत दौरा किया। बराक ओबामा तो दो बार भारत यात्रा पर आए।

वहीं, एक बात बहुत ही खटकने वाली सामने आई है, और वह यह है कि अमेरिका के प्रथम नागरिक के भारत दौरे के पहले ही अमेरिका प्रशासन ने भारत को जबर्दस्त झटका दिया है। अमेरिका ने भारत का विकासशील देश का तगमा छीन लिया है।

इस फैसले से भारत के निर्यात पर बुरा असर पड़ना तय है। इस फैसले के बाद अब भारत से जो भी सामान अमेरिका जाएगा उस सामन की बारीकी से इस बात की जांच की जाएगी कि उसके निर्माण और निर्यात में भारत सरकार की सब्सिडी का उपयोग तो नहीं किया गया है।

इभी तक इस तरह की जांच से पूरी तरह छूट मिली हुई थी और लगभग दो फीसदी तक की सरकारी इमदाद पर ध्यान नहीं दिया जाता था।

भारत को जी 20 का सदस्य होने और वैश्विक स्तर पर चल रहे व्यापार में तय सीमा से अधिक भागीदारी रखने के कारण विकासशील देशों की फेहरिस्त से बाहर किया गया है।

वैश्विक निर्यात में भारत की भागीदारी 1.67 फीसदी और वैश्विक आयात में 2.57 फीसदी है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह उन तमाम देशों से बहुत पीछे है, जिनकी विश्व व्यापार में भागीदारी अपने छोटे आकार के कारण काफी कम है।

वैसे भी चीन में कोरोना वायरस के चलते अभी निर्यात की दर बहुत ही कम चल रही है, अमेरिका के इस फैसले से निर्यात की चाल मंथर गति से चलने की उम्मीद है। भारत में सबसे ज्यादा आयात चीन से होता है निर्यात का सबसे बड़ा भाग अमेरिका को जाता है।

चीन से आयात लगभग बंद है और नए फैसले से अमेरिका में निर्यात बाधित हो जाएगा। (लेखकः समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं)

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