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समझिये, केजरीवाल की ‘ईमानदारी’ की पोल खोलने वाला टैंकर घोटाला

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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जल मंत्री के पद से हटाए गए कपिल मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने एक बार फिर टैंकर घोटाले को लेकर पूर्व की शीला दीक्षित सरकार और मौजूदा आम आदमी पार्टी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर संगीन आरोप लगाते हुए उन पर दो करोड़ रुपए नकद लेने का आरोप तक लगा डाला।

आपको बता दें कि कपिल मिश्रा काफी समय से टैंकर घोटाले को लेकर कार्रवाई की मांग करते आ रहे हैं। आखिर दिल्ली की राजनीति में हलचल मचाने वाला टैंकर घोटाला है क्या…

कहा जाता है करीब 400 करोड़ रुपए का टैंकर घोटाला तब हुआ था, जब दिल्ली पर कांग्रेस का राज था और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी। शीला दीक्षित ने 2013 तक दिल्ली का नेतृत्व किया है।

जब ये घोटाला हुआ तब शीला दीक्षित न सिर्फ मुख्यमंत्री थीं, बल्कि वो दिल्ली जल बोर्ड की चेयरपर्सन भी थीं।

इस घोटाले में दिल्ली में पानी सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर हायर किए गए प्राइवेट टैंकर्स में अनियमितताएं सामने आईं।

जून 2015 में आम आदमी पार्टी सरकार ने घोटाले की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की।

कमेटी ने अगस्त, 2015 में ही अपनी रिपोर्ट पेश की और 2012 में 400 करोड़ रुपए का घोटाला होने की बात कही।

रिपोर्ट में कहा गया कि प्राइवेट कंपनियों से लिए गए 385 स्टेनलैस-स्टील वॉटर टैंकरों की खरीद में गड़बड़ी हुई। टैंकरों को उनकी असल कीमत से तीन गुना मंहगे दाम पर खरीदा गया।

एक साल तक इस मामले में दिल्ली सरकार द्वारा ज्यादा कुछ नहीं किया गया।

हालांकि पिछले साल रिपोर्ट पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई। अपने सुझावों में कपिल मिश्रा ने सीबीआई और एसीबी से मामले की जांच कराने की मांग की।

इसके बाद नजीब जंग ने कमेटी की रिपोर्ट को एसीबी के पास भेज दिया. जिसके बाद एसीबी ने शीला दीक्षित और अरविंद केजरीवाल दोनों के ही खिलाफ मामला दर्ज किया।

इस घोटाले की सबसे पहले शिकायत करने वाले व्हिसल ब्लोअर इंजीनियर जेपी गौड़ को टर्मिनेट कर दिया गया।

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