संविधान दिवस रौशनः अबकी बार खो दी सरकार

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शिवसेना के मनोहर जोशी 1995-1999 तक सीएम थे। 2014 में सीएम पद भाजपा के पाले में गया था। उद्धव ठाकरे ने कहा- ‘मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि सीएम बनूंगा……’

इंडिया न्यूज रिपोर्टर डेस्क।  महाराष्ट्र में रातो-रात बनी भाजपा सरकार संविधान दिवस पर खुद ही मैदान से हट गई। डिप्टी सीएम बने एनसीपी के बागी नेता अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी बहुमत नहीं होने की बात कहकर कुर्सी छोड़ दी।

इस घटनाक्रम से कुछ घंटे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस को मिला 14 दिन का वक्त घटाकर बुधवार शाम 5 बजे बहुमत साबित करने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने आशंका जताई थी कि बहुमत परीक्षण में देरी होने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त हो सकती है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जल्द बहुमत परीक्षण जरूरी है।

देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया। वे 1 दिसंबर को शिवाजी मैदान में शपथ लेंगे।

इसी के साथ फडणवीस के नाम महाराष्ट्र में सबसे कम समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड भी जुड़ गया है। पूरे पांच साल सरकार चलाने वाले एकमात्र सीएम भी वही थे।

सुप्रीम कोर्ट बोला- प्रोटेम स्पीकर विधायकों को 5 बजे तक शपथ दिलाएं। तुरंत बाद बिना गुप्त मतदान फ्लोर टेस्ट हो। इसका टीवी पर सीधा प्रसारण हो। उद्धव ठाकरे 20 साल बाद शिवसेना के दूसरे और ठाकरे परिवार से पहले सीएम होंगे

उधर, सुप्रिया सुले होटल में अजित पवार से मिलीं। शरद पवार का संदेश दिया-‘माफ किया, अब वापस आओ।’ इसके बाद अजित का मन बदला।

अजित पवार पर इस्तीफे के लिए परिवार का दबाव था। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने उनसे लौटने की अपील की। फिर एनसीपी के बड़े नेताओं ने अजित को मनाने की कोशिश की।

सोमवार को छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटिल, जयंत पाटिल ने चार घंटे तक अजित से चर्चा की। मंगलवार सुबह नरीमन पॉइंट पर होटल में सुप्रिया सुले पति सदानंद सुले के साथ अजित से मिलने पहुंचीं।

फोन पर शरद पवार से भी बात करवाई। इसके बाद चाची प्रतिभा ने भी अजित से बात की। इस्तीफे के दबाव के बीच अजित ने राजनीति से संन्यास लेने की बात भी कही।

उधर, दिल्ली से फडणवीस को निर्देश मिले कि कुर्सी छोड़नी चाहिए। देवेंद्र फडणवीस के घर पहुंचे, इस्तीफा सौंप दिया

फडणवीस के अनुसार, अजित ने इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताया। शिवसेना के संजय राउत ने कहा कि अजित भी हमारे साथ हैं।

वेशक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बने हालात के आंकलन के लिए पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्‌डा ने संसद भवन में बैठक की। मुंबई से संकेत मिला कि अजित एनसीपी में अकेले पड़ गए हैं।

इसके बाद तय हुआ कि फडणवीस को इस्तीफा देना चाहिए। इस प्रकरण में भाजपा कहां चूकी, इसके जवाब में पार्टी के एक रणनीतिकार कहते हैं कि फडणवीस और अजित में हुई बातचीत के आधार पर शाह ने सरकार का जिम्मा महाराष्ट्र इकाई पर ही छोड़ दिया। यही सबसे बड़ी चूक थी।

 मोदी और पवार के बीच बैठक में सरकार बनाने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई थी। पवार ने कहा था कि शिवसेना-कांग्रेस के साथ बात नहीं बनने पर वह भाजपा के साथ आने पर विचार करेंगे। लेकिन, गुपचुप शपथ ग्रहण के बाद पवार ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया।

इसके बाद शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस (महाविकास अघाड़ी) ने उद्धव ठाकरे काे नेता चुना। राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

रातों-रात राष्ट्रपति शासन हटवाकर सरकार बनाई थी, फ्लोर टेस्ट में फजीहत से पहले ही छोड़नी पड़ी कुर्सी

22 नवंबर की रात फडणवीस राज्यपाल से मिले। राष्ट्रपति शासन हटा। 23 नवंबर की सुबह सरकार बन गई।

24 नवंबर रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई दोनों पक्षों को सुनकर कोर्ट ने सुनवाई सोमवार तक टाल दी।

अजित के साथ गए सभी विधायक शरद पवार के पास लौट गए। अजित के लिए सारे रास्ते बंद कर दिए।

सोमवार शाम मुंबई के होटल में कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना ने सदन सजा लिया। 162 विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया।

मंगलवार सुबह जब सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कह दिया कि 30 घंटे में बहुमत साबित करना होगा तो फडणवीस के पास कुर्सी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने वही किया।

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