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‘शत्रु’हन की 36 साल की भाजपाई पारी खत्म, अब कांग्रेस से बोलेंगे खामोश

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“पूरी संभावना  है कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे और महागठबंधन प्रत्याशी के तौर पर पटना साहिब क्षेत्र में सबको बोलेंगे खामोश। कहा जाता है इस संबंध में उनकी बात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हो गई है और सिर्फ औपचारिक ऐलान शेष है….”

पटना (जयप्रकाश नवीन)। आखिरकार 36 साल बाद भाजपा के बागी सांसद सह सिने स्टार शत्रुहन सिन्हा पार्टी से कुछ इस तरह बेदखल किए गए हैं।

भाजपा ने पटना साहिब लोकसभा सीट से इनका पता काटकर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारने की  मूड में आ गई है।

इस तरह सिने स्टार बिहारी बाबू का  भाजपा से 36 साल का सियासी सफर का अंत हो गया। आखिरकार भाजपा ने उन्हें ‘खामोश’ कर ही दिया ।

राजनीति वो तिलिस्म है जहां जनता से किए जाने वाले वादे और सत्ता के बड़े दावे एक साथ गूंजते हैं क्योंकि राजनीति की दुनिया में परदे के पीछे साम, दाम, दंड, भेद हर वो तरीका आजमाया जाता है जहाँ से  नेता  सत्ता के करीब पहुँच पाएं।

आम आदमी की चौखट से निकल कर सत्ता की दहलीज तक पहुंचने में नेताओं को ना जाने कितने चक्रव्यूह तोड़ने पड़ते हैं और इस पूरी कवायद में जब कभी नेताओं की राह में कोई रुकावट खड़ी होती है तो वो हो जाते हैं बागी।

बीजेपी के ऐसे ही एक ‘बागी’ सांसद शत्रुहन  सिन्हा को  बगावती तेवरों की वजह से  पार्टी ने उन्हें पटना साहिब लोकसभा सीट से बेदखल कर दिया है।उनकी जगह केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।

सिने स्टार बिहारी बाबू  का मशहूर डॉयलॉग  ‘खामोश’  सुनते ही जहन में एक ऐसे ‘बिहारी बाबू’ की तस्वीर उभरती है जिसने अपने दमदार व्यक्तित्व के दम पर न केवल बॉलीवुड में बल्कि राजनीति और लोगों के दिलों में भी एक अलग पहचान बनाई है।

शॉटगन के नाम से मशहूर शत्रुहन सिन्हा  पिछले दो साल से  अपनों के  सिर पर ही जिस तरह बयानों की गन तान रखी है उससे साफ प्रतीत हो रहा था कि पार्टी उनका टिकट काट सकती है।

अब श्री सिन्हा  इन दिनों बन गए है बिहार की चुनावी राजनीतिक का एक चर्चित केंद्र। कयास लगाया जा रहा है कि श्री सिन्हा अब ‘हाथ’ के सहारे सियासत की नयी पारी की शुरुआत करेंगे।मतलब महागठबंधन के साथ एक नयी सियासी पारी की शुरुआत ।

कभी नीतीश कुमार की तारीफ तो कभी लालू प्रसाद यादव का महिमा गान बीजेपी के सांसद शत्रुहन सिन्हा के पार्टी विरोधी ऐसे बर्ताव के बावजूद भी बीजेपी उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखा पाई।

खास बात ये है कि हमेशा बेबाक बयानों से लैस नजर आने वाले शत्रुध्न सिन्हा का ऐसा अंदाज रीयल लाइफ से लेकर रील लाइफ तक में नजर आता रहा है।

अपने दबंग अंदाज की वजह से बॉलीवुड में भी शत्रुहन सिन्हा हिट हुए थें। फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ में एक छोटे से किरदार से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले बिहारी बाबू शत्रुध्न शुरु में परदे पर एक विलेन के तौर पर नजर आए थे, लेकिन अपनी एक्टिंग और अंदाज के दम पर जल्द ही उन्होंने बॉलीवुड में बतौर हीरो अपना सिक्का जमा लिया था।

बॉलीवुड की फिल्मों में एक लंबी पारी खेलने के बाद शत्रुहन सिन्हा ने राजनीतिक की पिच पर भी जमकर अपने हाथ आजमाये हैं।

फिल्मी दुनिया से निकलकर उन्होंने उस वक्त भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था जब रामजन्म भूमि आंदोलन के बाद बीजेपी को भी नए मुद्दों और नए चेहरों की तलाश थीं।

शत्रुघन सिन्हा के जीवन पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के ‘जन आंदोलन’, संगत और उनके व्यक्तित्व का भी काफी प्रभाव पड़ा। शत्रुघन 1974 में जयप्रकाश नारायण के सम्पर्क में आए थे, जिसके बाद वह जन आंदोलन से जुड़ गए।

यह वही जन आंदोलन था जिसने भारतीय राजनीति को कई बड़े नेता दिए। शत्रुहन के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1984 में हुई, जब उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।

पार्टी ने उनके व्यक्तित्व और दमदार आवाज की वजह से उन्हें चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंप दी। उन्हें पहली राजनीतिक कामयाबी 1996 में मिली जब उन्हें बिहार से राज्यसभा सांसद चुना गया। इसके बाद एनडीए के शासन में 2002 में दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुना गया। खुद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इनके काम से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने श्री  सिन्हा को अपने कैबिनेट में जगह दे दी।

श्री सिन्हा को 2003 में भारत सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। इसके अगले ही साल उन्हें जहाजरानी मंत्री बना दिया गया। वह ऐसे पहले अभिनेता है जो केंद्रीय मंत्री बने। फिलहाल वह 16वीं लोकसभा के लिए बिहार के पटना साहिब से सांसद हैं।

कभी  शत्रुहन सिन्हा बीजेपी के अहम नेता माने जाते थे। लेकिन पार्टी में कभी भी उन्हें जमीनी नेता नहीं माना गया। उनकी छवि  हमेशा एक भीड़ जुटाने वाले नेता की ही रही है।

 

ब्बे के दशक से लेकर 2014 के पहले   तक शत्रुहन सिन्हा बीजेपी के स्टार प्रचारक बने हुए रहे। लेकिन अपनी राजनीति के इस दो दशकों के सफर के दौरान उनके बागी तेवरों में कभी कोई कमी भी नहीं आई हैं।

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी की करारी हार हुई थी उस वक्त भी उन्होंने बीजेपी में सर्जरी की वकालत कर अपने बेबाक बयानों से पार्टी में हंगामा खड़ा कर दिया था।

बीजेपी के अंदर यूं तो शत्रुहन सिन्हा की बगावत का इतिहास पुराना रहा है लेकिन साल 2012 में जब तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ बीजेपी में ही माहौल बन रहा था उस दौरान शुत्रहन सिन्हा ने भी खुल कर गडकरी के खिलाफ मोर्चो खोल दिया था।

जाहिर है कि बीजेपी के स्टार प्रचारक शत्रुहन सिन्हा का बेबाक अंदाज और उनकी बागी आवाज आज भी बरकरार है। उनके बागी तेवरों में आज भी कोई कमी नहीं आई है।उन्होंने बीजेपी के लिए हवा तो खूब बनाई, लेकिन खुद हवा के साथ नहीं चल सके। पीएम पर उनका तंज उन्हें भारी पड़ गया। जिस कारण उन्हें पटना साहिब लोकसभा सीट से बेदखल कर दिया गया है।

फिलहाल होली की खुमारी नेताओं पर चढ़ी हुई है।एक -दो दिन बाद  चुनावी माहौल तवे की तरह गर्म हो जाएगा। विरोधी दलों के बीच तलवारें भी तन चुकी होंगी। बिहार में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं की रैलियों का रेला भी लगना शुरू हो जाएगा।

लेकिन इन सबके बीच ना सिर्फ पार्टी की रैलियों बल्कि प्रेस कान्फ्रेंस से लेकर बैनर और पोस्टरों तक में बीजेपी सांसद शत्रुध्न सिन्हा का चेहरा नदारद हो चुका है।

ये वो ही शत्रुहन सिन्हा हैं जो कभी बीजेपी के स्टार प्रचारक माने जाते थे। लेकिन बदले राजनीतिक हालत के बीच आज शत्रुहन बीजेपी में दरकिनार हो चुके हैं।

सीएम नीतीश कुमार से उनकी दोस्ती के किस्से, लालू प्रसाद यादव से करीबियत की ये तस्वीरें और अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानों का अंबार शायद इन्ही राजनीतिक हालत से उपजी शत्रुहन सिन्हा की प्रतिक्रियांए है। 

भाजपा से बेटिकट किए जाने के बाद कयास लगाया जा रहा है कि वें सियासत की नयी पारी ‘हाथ’ के साथ शुरू करेंगे। इसके लिए उन्होंने अभी अपने पते नही खोले हैं ।लेकिन राजनीति में कुछ भी हो सकता है।

अब आगे ये देखना भी दिलचस्प होगा कि बिहार के चुनाव से पहले शत्रुहन, दोस्तों से शत्रुता निभाते हैं या फिर शत्रुओं की तरफ दोस्ती का हाथ बढाते हैं।

हालांकि संभावना व्यक्त की जा रही है कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे और महागठबंधन प्रत्याशी के तौर पर पटना साहिब क्षेत्र में सबको बोलेंगे खामोश। कहा जाता है इस संबंध में उनकी बात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हो गई है।

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