विकास नहीं, मानसिक और आर्थिक गुलामी का दौर है ये !

Share Button

“व्यापार का बड़ा सिंपल तरीका है, पहले क्राइसिस क्रियेट करो, फिर विकल्प सामने कर दो! पब्लिक धन्य हो टूट पड़ती है। ग्लोबलाइजेशन के बाद देश में तेजी से इस फॉर्मूले पर काम हुआ है और अब भी जारी है….”

INR (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। औद्योगिकीकरण के चक्कर में पहले खेती को चौपट किया गया। खेती चौपट हुई तो मंझोले और बड़े किसान भी गाँव से दूर हुए। गाँव में पहले बड़े और मंझोले किसानों की पकड़ होती थी।

विश्लेषकः धनजंय कुमार जाने-माने एक विचारशील सिने-टीवी लेखक है…

हर बात के लिए सरकार का मुंह देखना नहीं होता था, किसान आपस में चन्दा करके बाढ़ और सूखे से बचाव कर लेते थे, लेकिन जब बड़े और मंझोले किसान के बच्चे गाँव से निकल कर शहर में नौकरी करने पर मजबूर कर दिए गए, किसानों की ताकत कम हुई और गाँव कमजोर हुए।

पहले गाँव में सब्जियां बिकती नहीं थीं, क्योकि सबके घर के आँगन के कोने, छप्पर या खांड में सब्जियां होती थी। गरीब लोग भी दुधारू मवेशी और बकरियां पालते थे, लेकिन आज खांड या आँगन में सब्जियां उगाने की प्रथा ख़त्म हो गयी।

मंझोले और बड़े किसानों के गाँव से निकल जाने से गाँवों में अराजकता की हालत है। ज़मीनों पर अतिक्रमण बड़े पैमाने पर हुआ है। गाँव के पोखर, तालाब, खत्ता, पाइन सबको भरकर खेत और घर बना दिए गए। अब तो लोग नदियों को भर भर कर घर बना रहे हैं। गाँवों की गलियाँ लगातार संकरी होती जा रही हैं। कोई रोकने टोकने और पूछने वाला नहीं है।

जबसे पंचायती राज की पुनर्स्थापना हुई है और विकास के नाम पर दिल्ली से गाँवों तक हर साल करोड़ों रुपये भेजे जाने लगे हैं तबसे गाँव के वार्ड मेंबर से लेकर विधायक तक और रेवेन्यु कर्मचारी से लेकर सीओ और बीडीओ तक विकास से ज्यादा लूट में व्यस्त हैं।

ग्लोबलाइजेशन के बाद सरकारें विकास के नाम पर गाँव गाँव सड़क और बिजली पहुंचाने को सबसे बड़ा विकास बता रही हैं, लेकिन ये नहीं बता रही हैं कि इन सडकों और बिजली के बहाने उद्योगपतियों को विशाल बाज़ार उपलब्ध करा रही है।

आम नागरिकों को भले विकास का झुनझुना पकड़ा दिया गया है, लेकिन वास्तविकता ये है कि इसके कंधे पर ग्लोबलाइजेशन की पालकी गाँव में उतारी जा रही है। ताकि देशी-विदेशी कम्पनियां गाड़ी से लेकर सर्फ़ की पुडिया और कोल्ड ड्रिंक तक गाँवों में बेच सके।

हद तो यह हो चुकी है कि बाज़ार से लाकर सब्जियां तक बेची जा रही हैं। दही दूध भी ब्रांडेड कम्पनियों के बिक रहे हैं। मैगी से लेकर चिप्स तक बेचे जा रहे हैं।

किसान का आलू बिक नहीं पा रहा और किसान का बेटा चिप्स का पैकेट बाज़ार से खरीद कर खा रहा है। स्थानीय किसान का टमाटर नहीं बिक रहा, लेकिन दुकानों में अलग अलग कंपनियों के टोमैटो केचअप सजे हैं।

गाँव की नदियों के बालू, पानी सब सरकार ठेके पर दे रही है, नतीजा है किसी को बालू चाहिए तो बाज़ार से खरीदिये। पहले नदी में पानी लगभग सालों भर होते थे, और जिसका मन होता था, मछली पकड़ लेता था, लेकिन अब नदी में ना पानी रहा, ना मछली।

जहां कहीं है भी तो टेंडर हो चुका है, इसलिए मछलियाँ भी अब बाहर से आती हैं। और आपको जानकार हैरत होगी कि बालू से लेकर मछली का कारोबार देश में लाखों करोड़ का हो गया है।

गाँव के नदी, पोखर, पाइन में पानी सालों भर या कम से मार्च तक तो होते ही थे, अब गाँव में न पोखर तालाब बचे, ना नदी में पानी। नतीजा है पानी के लिए गाँवों में हाहाकार मचा है। पानी की बोतलें अलग अलग कंपनियों की लगातार आ रही हैं, लेकिन गाँवों में जल स्तर लगातार नीचे जाते जा रहा है। लेकिन सरकार परेशान नहीं है।

पानी के नाम पर वाटर हार्वेस्टिंग उपकरण लगाए जा रहे हैं। ये नहीं हो रहा कि पोखर, तालाब और नदी को सूखने और अतिक्रमण से बचाएं। पर्यावरण को उजाड़ने का काम सरकारें और उनके द्वारा पोषित उद्योगपति पहले करते हैं, फिर पर्यावरण के नाम पर पेड़ लगाने का खर्चीला ढोंग किया जाता है।

इसी तरह सरकारी स्कूलों-कॉलेजों को सरकारों ने सुनियोजित तरीके से खस्ताहाल किया, ताकि शिक्षा को बाज़ार बनाया जा सके। महंगे प्राइवेट स्कूल, कोचिंग क्लासेज, इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज आज खूब तेजी से फूल फल रहे हैं, लेकिन सरकारी स्कूल लगातार बंद हो रहे हैं। क्यों ?

यह भी ग्लोबलाइजेशन और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का ही तरीका है। भारत सरकार का बीएसएनएल घाटे में है, कर्मचारियों की छंटनी हो रही है, जबकि रिलायंस का जिओ देश को सबसे सस्ता नेटवर्क उपलब्ध करवा रहा है !

सरकारी बैकों से ज्यादा अच्छे प्राइवेट बैंक साबित हो रहे हैं क्यों ? सरकारी कम्पनियां लगातार प्राइवेट हाथों में बेचे जाने की तैयारी चल रही है क्यों ? और हद तो यह है कि आम नागरिकों के मन में भी बिठा दिया गया है कि सरकारी कर्मचारी ठीक से काम नहीं करते, खामखा परेशान करते हैं, जबकि प्राइवेट वाले तुरंत सर्विस देते हैं।

इसलिए अच्छा है कि सारी सरकारी कंपनियों को प्राइवेट के हवाले कर दिया जाय। विडम्बना तो देखिये रेलवे को भी प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी है।

ये सब क्या है ? क्यों है ? दुःख की बात है कि हमारे देश की बहुसंख्य आबादी इस बात को समझ नहीं पा रही है। सच यह है कि यह जो विकास और सुख सुविधा हमारे सामने परोसा जा रहा है, उसकी भारी कीमत हमसे वसूली जा रही है।

ग्लोबलाइजेशन हमारी सुख शान्ति लील रहा है। यह केवल बाजार को ध्यान में रखकर आगे बढाया जा रहा है। आम आदमी की कीमत यहाँ बस मजदूर या उपभोक्ता की है। आप लाखों रुपये खर्च कर बेटे-बेटी को पढ़ा रहे हैं और पढ़ लिखकर वह किसी कॉर्पोरेट कंपनी में गुलामी करने को मजबूर है।

उसे अच्छी सेलेरी दी जा रही है, लेकिन बदले में उसका पूरा समय ले लिया जा रहा है। और महंगी शिक्षा के चलते जो पढ़ नहीं पा रहे, वो लाचार मजदूर बनने को अभिशप्त हैं।

और चिंता की बात यह है कि कोई सरकार विकास के नाम पर तो कोई राष्ट्रवाद के नाम पर आम जनता को बेवकूफ बना रही है। सच ये है कि नेता और बड़े नौकरशाह अपने तात्कालिक फायदे के लिए न केवल देश बल्कि देश के युवा को भी उद्योगपतियों के हाथ बेच रहे हैं।

आम आदमी को इस विकास का अर्थ समझना होगा, तभी यह देश बचेगा, नहीं तो एक बार गुलामी की राह पर चल पड़े हैं हम। ये मानसिक और आर्थिक गुलामी का दौर है।

आप पर शासन करने के लिए गोरों, कालों और हरे नीलों को आपके देश आने की ज़रुरत नहीं है। आपके देश के नेता खुद उनके एजेंट बने हैं। और आप हैं कि फूले नहीं समा रहे।

वक्त को पहचानिए, नहीं तो एक बार फिर आपकी पहचान खो जायेगी और इस बार शायद गांधी आपके देश में ना जन्में!

0 0
0 %
Happy
0 %
Sad
0 %
Excited
0 %
Angry
0 %
Surprise
Share Button

Related News:

दोधारी तलवार बनती वर्ल्ड टेक्नोलॉजी
DC का अंतिम फैसला- भू-माफियाओं के खिलाफ राजगीर CO जाएं कोर्ट, SDO हटाएं अतिक्रमण
राजनीतिक नेपथ्य में धकेले गए राम मंदिर आंदोलन के नायक और भाजपा का भविष्य
बढ़ते अपराध को लेकर सीएम की समीक्षा बैठक में लिए गए ये निर्णय
रूखाई पैक्स गोदाम में महीनों से जारी था शराब का यह बड़ा गोरखधंधा, संदेह के घेरे में पूर्व अध्यक्ष
कांग्रेस की जन आकांक्षा रैली में राहुल गांधी का मोदी पर आक्रामक हमला
अपने बच्चों को बाज़🦅बनाईए, ब्रायलर🐥नहीं
PM मोदी ने दी बधाई, लेकिन बिहार में बच्चों की मौत से आहत राहुल गांधी नहीं मनाएंगे अपना जन्मदिन
अजातशत्रु स्तूपा को लेकर भारतीय पुरातत्व विभाग बना अंधा, छेड़छाड़ जारी
राम रहीम उर्फ कैदी नंबर1997 को दफा 376, 511, 501 के तहत 10 साल की सजा
'बिहारी बाबू' के दही-चूड़ा भोज से बीजेपी नेताओं के किनारे के मायने
अर्थ व्यवस्था पर जयंत के हाथों यशवंत की घेराबंदी में फंस गई मोदी सरकार
'PUBG' की लत से ग्रस्त युवा बन रहे हैं निकम्मा और अपराधी
गैंग रेप-मर्डर में बंद MLA से मिलने जेल पहुंचे BJP MP साक्षी महाराज, बोले- 'शुक्रिया कहना था'
नीतीश-जदयू से जुड़े ‘आम्रपाली घोटाले’ के तार, धोनी को भी लग चुका है चूना
जदयू नेता से यूं मांगे 5 लाख और यूं 2 लाख लेते धराए गया के एसडीओ
यहां तो गूंगे बहरे बसते है, खुदा जाने कहां जलसा हुआ होगा ?
भाजपा के 'शत्रु'हन सिन्हा का एलान- पटना साहिब से ही लड़ेगें चुनाव
दुनिया के यह सबसे अमीर शख्स रखता है ओल्ड फ्लिप फोन !
न भूलेंगे, न माफ करेंगे, बदला लेंगे :CRPF
सिद्धांतहीन नीतीश की इस बार अंतिम पलटीः लालू यादव
राजगृह के वैभारगिरी पहाड़ी पर हुई थी बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक की पहली संगीति
वीडिय़ोः MP  ने मंत्री-पुलिस के सामने MLA को जूतों से यूं जमकर पीटा
पी चिदंबरम के आवास पर CBI छापे के बाद लालू के कथित 22 ठिकानों पर IT की रेड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
Close
error: Content is protected ! india news reporter