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लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे हार्दिक पटेल

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“पाटीदार नेता हार्दिक पटेल नेतृत्व में 23 जुलाई 2015 को पहली बार पाटीदारों की रैली में हिंसा हुई थी। इस मामले में साल 2018 में कोर्ट ने हार्दिक को दोषी ठहराते हुए 2 साल की जेल की सजा सुनाई थी…….”

INR. गुजरात हाईकोर्ट ने हार्दिक पटेल को झटका दिया है। कोर्ट ने हार्दिक पटेल के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। हार्दिक पटेल पर हिंसा भड़काने के आरोप में गुजरात हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।

गुजरात में लोकसभा चुनावों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 4 अप्रैल है। हार्दिक पटेल ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर उन्हें हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो वो जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे।

कांग्रेस में शामिल होने से चार दिन पहले पटेल ने हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि विसनगर के बीजेपी विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय पर तोड़फोड़ और दंगा करने के मामले में मिली सज़ा के ख़िलाफ़ स्थगन आदेश दिया जाए।

राज्य सरकार ने उनकी इस याचिका के ख़िलाफ़ दस्तावेज़ पेश करने के लिए कोर्ट से दो बार समय मांगा और कोर्ट ने उन्हें मोहलत दे दी।

हार्दिक के वक़ील ने सरकार के और समय मांगने की याचिका का जमकर विरोध किया और इसे ‘मामले को लंबा खींचने की चाल’ बताया ताकि उनके ख़िलाफ़ मामला लंबित रहे और इस वजह से उनकी चुनावी राजनीति आगे नहीं बढ़ पाए।

सरकार ने कोर्ट में हलफ़नामा दायर कर पटेल के ख़िलाफ़ पिछले चार सालों में दर्ज 24 एफआईआर का हवाला दिया।

सरकार ने अपने हलफ़नामे में दावा किया कि उन्होंने जो बार-बार अपराध किया है, वह हाईकोर्ट से उन्हें कोर्ट की अवमानना मामले में मिली ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन है।

सरकार ने कहा कि पिछले अगस्त में जब पटेल ने हाईकोर्ट में अपील की तो कोर्ट ने दोष सिद्धि के ख़िलाफ़ उनके आवेदन पर ग़ौर नहीं किया, बल्कि सिर्फ़ उनकी सज़ा को निलंबित किया।

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