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रूखाई पैक्स गोदाम में महीनों से जारी था शराब का यह बड़ा गोरखधंधा, संदेह के घेरे में पूर्व अध्यक्ष

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बिहारशरीफ (प्रमुख संवाददाता / जयप्रकाश नवीन)। शराब बंदी कानून लागू होने के बाद शराब माफियाओ पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन के सख्त रूख के आगे शराब माफियाओं की एक नही चल रही है। बाबजूद जिला प्रशासन डाल -डाल तो शराब माफिया भी पात -पात वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। शराब माफिया शराब के तस्करी के लिए एक से एक हथकंडे अपना रही है। एक से एक जुगाड भिडा रही है। अभी  तक शराब लाने के लिए माफिया गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे थे तो वही फ्रीज की आड़ में शराब की तस्करी से जिला प्रशासन भी अंचभे में हैं ।

नालंदा के चंडी थाना क्षेत्र के रूखाई में पैक्स गोदाम में रखे गए 100 कार्टन से भी ज्यादा बरामद शराब के बाद पुलिस के जेहन में कई सवाल कौंध रहे होंगे। वही ग्रामीण भी जानना चाह रहे हैं कि आखिर कौन लोग शराब के धंधे में संलिप्त हैं ।

पैक्स चुनाव के ढाई साल बाद भी उक्त पैक्स कार्यालय तथा गोदाम पर पूर्व पैक्स अध्यक्ष का कब्जा सबसे बड़ा सवाल पैदा करता है।आखिर ढाई साल बाद भी वर्तमान पैक्स अध्यक्ष को प्रभार क्यों नही सौंपा गया ।

जबकि बताया जाता है कि पैक्स अध्यक्ष प्रभार के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं । चुनाव पूर्व पूर्व पैक्स अध्यक्ष इस पैक्स भवन में मतदान केंद्र बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दिया था ।

दूसरा सवाल आखिर किस हैसियत से एक सरकारी भवन को बिना किसी लिखित कागजात के किसी को किराये पर लगा दिया गया?  यह सवाल भी लोगों के जेहन में कौंध रहा है । अगर पैक्स भवन को किराये पर दिया गया तो किस उद्देश्य के लिए यह बात सामने नही आ पाई है।

यहाँ बताते चले कि दो साल पूर्व पुरातत्व विभाग की टीम जब गाँव में ऐतिहासिक पुरास्थल की खुदाई के लिए पहुँची थी तो इसी पैक्स भवन में रूकी थी। खुदाई से निकली सभी पुरातत्व सामग्री को यही रखा गया था। पुरास्थल की खुदाई की सूचना पर तत्कालीन डीएम बी कार्तिकेय भी रूखाई पहुँचे थे ।

उन्होंने पुरातत्व टीम से  पैक्स गोदाम में रखे सभी सामग्रियों की बारीकी से जानकारी हासिल की थी। लेकिन कौन जानता था कि दो साल बाद यह पैक्स गोदाम  शराब अड्डा बन जाएगा ।

सूत्रों का कहना है कि गाँव में शराब का गोरखधंधा महीनों से चल रहा था । लेकिन गाँव वालों को भी अंदाजा नही था कि उनके नाक तले शराब का इतना बड़ा कारोबार फल -फूल रहा था । गाँव के कुछ लोगों ने नाम नही प्रसारित करने के शर्त पर बताया कि गाँव के बाहर स्थित तालाब पर बराबर शराब की खेप उतरती थी और वहाँ से अन्यत्र भेजी जाती थी। लेकिन गाँव के अंदर शराब मिलने की भनक हम लोगों को कभी नही लगी।

इधर चंडी पुलिस ने दावा किया है कि इस मामले में सबसे बड़ा मास्टरमाइंड कुंदन सिंह है। जिसकी गिरफ्तारी के बाद ही और नामों का खुलासा होगा ।

शराब माफियाओ के जखीरे से शराब पैक करने वाली रैपर इस बात का खुलासा करता है कि शराब पैकिंग का धंधा भी गाँव में चल रहा होगा, इससे इंकार नही किया जा सकता है। पुलिस के लिए चुनौती भी है कि आखिर गाँव के किस घर में शराब पैक करने का उपकरण लगा हुआ है।

पुलिस ने इस मामले में दो वाहन को भी जब्त किया है। जो शराबमाफियाओ की बताई जा रही है। फिलहाल पुलिस दो नाम का खुलासा कर रही हैं । उसकी गिरफ्तारी के बाद ही इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है ।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल की गांव के बहुत अंदर घनी आबादी के बीच शराब का कारोबार चल रहा हो,भारी मात्रा में शराब का भंडारण किया जा रहा हो, लेकिन इसकी भनक ग्रामीणों को नही लगी हो विश्वास से परे है, लेकिन उनकी खामोशी सब कुछ बयां कर देती है।

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