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राजगीर वाइल्ड लाइफ सफारी पार्क निर्माण पर रोक

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“बिहार सरकार और उसका प्रशासन तंत्र केन्द्रीय शक्ति प्रावधानों को मजाक समझ लिया है। यही कारण है कि उसे आए दिन अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के हाथों जलील होना पड़ता है

(INR). खबर है कि राजगीर वाइल्ड लाइफ सफारी पार्क के चल रहे निर्माण कार्य पर स्थानीय थाना पुलिस ने रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग द्वारा थाने में लिखित शिकायत दर्ज किये जाने के बाद हुआ है।

यह काम विभागीय टेंडर होने के बाद कुमार हाइट प्रोजेक्ट द्वारा शुरू किया गया था। लेकिन पुरातत्व विभाग ने जरासंध अखाड़े के आस पास चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाने के लिये स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कर दी।

विभाग के स्थानीय वरीय संरक्षण सहायक अधिकारी बीएन वर्मा के निर्देश पर थाने में शिकायत की गई। थानाध्यक्ष विजेन्द्र कुमार सिंह ने पुरातत्व विभाग द्वारा बिना परमिशन के कार्य किए जाने की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कार्य स्थल पर पुलिस बल भेजकर काम को रोकवा दिया और कहा कि जो भी कागजी कमी है, उसे विभागीय स्तर से पूरा करने के बाद ही आगे काम हो।

कहा जाता है कि वन विभाग द्वारा बिना किसी अनुमति के जरासंध अखाड़े के पास खुदाई कर कार्य किया जा रहा था। जोकि पूर्णतः संरक्षित क्षेत्र है।

राजगीर वाइल्ड लाइफ सफारी पार्क निर्माण के दौरान इस तरह के दो मामले सामने आये हैं, जिसमें पुरातत्व विभाग और वन विभाग के आमने-सामने की स्थिति दिख रही है। एक स्थान पर वन विभाग ने रोक लगाई है तो दूसरे स्थान पर पुरातत्व विभाग ने आपत्ति दर्ज कराते हुए रोक लगा दिया है।

बता दें कि कुछ दिन पूर्व पुरातत्व विभाग द्वारा वनगंगा के समीप न्यू स्तूपा का बाउंड्रीवाल कराया जा रहा था। जिस पर वन विभाग ने रोक लगा दी थी।

विभाग के रेंजर अमृतधारी सिंह के अनुसार यह एरिया वन विभाग के सेंचुरी एरिया है। जहां बिना अनुमति के काम किया जा रहा है, वहीं अब पुरातत्व विभाग द्वारा सफारी पार्क के चल रहे चहारदीवारी निर्माण कार्य पर जरासंध अखाड़ा के इलाके में रोक लगाई गई है।

राजगीर वाइल्ड लाइफ सफारी पार्क मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। पिछले वर्ष 17 जनवरी को उन्होंने और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसका शिलान्यास किया था। उस दिन राजगीर में कैबिनेट की मीटिंग थी और शिलान्यास के मौके पर लगभग पूरी कैबिनेट उपस्थित थे।

इस सफारी का निर्माण 2 साल के अंदर पूरा होना है। पहले फेज में 56 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। कुछ माह पहले बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू किया गया है। काफी तेजी से काम किया जा रहा था कि दो साल के अंदर पूरा हो सके। निर्माण कार्य जंगल या किसी तरह की प्राकृतिक छेड़छाड़ किये बगैर पूरा करना है।

कुल 480 एकड़ में स्वर्णगिरी और वैभारगिरी पर्वत के बीच घाटी वाले हिस्से में इसका निर्माण किया जाना है। 191.12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 72 हेक्टेयर क्षेत्रफल पुराना मृग विहार भी शामिल है। कुल पांच जोन बाघ, शेर, तेंदुआ, भालू और हिरण के बनाए जायेंगे। इसके अलावा एक एरियरी भी होगी।

हर जोन 30 फीट ऊंची ग्रिल से घेरा होगा और डबल इंट्री वाला ऑटोमेटिक गेट का निर्माण किया जायेगा। कुल पांच टिकट काउंटर खोले जाएंगे। लोग यहां रात्रि सफारी का भी आनंद ले सकेंगे।

500 हेक्टेयर को नेचर सफारी के रूप में विकसित कर जंगल ट्रेल की व्यवस्था की जायेगी। यहां मौसम के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी की व्यवस्था होगी।

पुरातत्व विभाग के अनुसार प्राचीन स्मारक, पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम 2010 के द्वारा संरक्षित सीमा 100 मीटर के क्षेत्र को प्रति निषिध क्षेत्र और इससे परे 200 मीटर के क्षेत्र को विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया है।

विभाग द्वारा बताया गया कि ऐसे इलाके में किसी भी तरह का निर्माण कार्य और खुदाई के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है।

पुरातत्व विभाग के संरक्षण वाले इलाके को लेकर काम रोके जाने के बाद जल्द इस मसले का हल नहीं निकाला गया तो निर्माण कार्य का समय प्रभावित हो सकता है। इसमें देरी होनी लाजमि है।

लेकिन सबसे बड़ी बात कि बिना सर्वेक्षण के राजगीर वाइल्ड लाइफ सफारी पार्क की कार्य योजना तैयार करना और उसे सरकारी टेंडर के तहत शुरु कर देना क्या दर्शाती है। क्या राज्य सरकार और उसके प्रशासनिक अमलों को यह पता नहीं है कि उसका अधिकार पृष्ठ क्या है और वह कहां तक कार्य करने को स्वतंत्र है?

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