रांची के रिम्स में लालू से मिलकर यूं गरजे बिहारी बाबू- ‘खामोश’

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इस वर्ष लालू प्रसाद से शत्रुध्न सिन्हा की रिम्स में हुई दूसरी मुलाकात के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि वो भी भाजपा को झटका देकर जल्द ही महागठबंधन में शामिल हो जाएंगे…”

रांची (INR). भाजपा और शीर्ष नेतृत्व से रुठे और बगावती तेवर अख्तियार कर चूके बिहार के भाजपा सांसद व अभिनेता शत्रुध्न सिन्हा आज दूसरी बार रिम्स पहुंचकर यहां इलाजरत राजद सुप्रीमो से मुलाकात की।

शत्रुघ्न शनिवार को कांग्रेस नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के हाथ में हाथ डाले रिम्स लगभग रिम्स पहुंचे और लालू प्रसाद का कुशल क्षेम पूछा।

इसके पहले कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री शकील अहमद व झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन भी रिम्स में लालू प्रसाद से मुलाकात की। इन सभी नेताओं ने बारी-बारी से लालू से मिलकर उनका कुशलक्षेम पूछा।

गौरतलब है कि इन दिनों विपक्षी धड़े के बड़े नेता माने जाने वाले लालू प्रसाद यादव की तबीयत उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है। लालू से मुलाकात के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने राजद और लालू की जमकर तारीफ की।

सिन्हा ने कहा, “मैं लालू का हालचाल जानने के लिए आया हूं। आज पारिवारिक बातें ज्यादा हुईं। राजनीतिक बातें नहीं की। मैं लालू की पार्टी की काफी इज्जत करता हूं। लालटेन को दुनिया पहचानती है। आज उनकी पार्टी की लहर है।”

उन्होंने कहा कि लोगों का मानना है कि बदले की भावना से लालू को प्रताड़ित किया गया है। महागठबंधन को लेकर चर्चा के सवाल पर कहा कि खरमास में इसपर चर्चा ठीक नहीं है।

इससे पहले शुक्रवार को देर शाम शत्रुघ्न सिन्हा रांची पहुंचे। रांची पहुंचने के बाद उन्होंने कहा था कि वे अपने लोगों से मिलने आये हैं। यह राजनीतिक दौरा नहीं है।

भाजपा की हार के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पार्टी को अब भी सीख लेनी चाहिए। तीन राज्यों में जनता ने उन्हें नकार दिया है। मैंने पहले ही पार्टी को आगाह कर दिया था, लेकिन मेरी बातों को नहीं माना गया।

उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा व्यक्ति से बड़ी होती है और पार्टी से बड़ा देश। मैं भाजपा नेता से पहले भारत का सच्चा नागरिक हूं। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है इसी के तहत हमने पार्टी को आगाह किया  था।

उन्होंने कहा कि अभी बहुत ज्यादा समय बर्बाद नहीं हुआ है। अब भी पुराने लोग लालकृष्ण आडवाणी, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी सहित अन्य बड़े नेता को मना कर उन्हें गले लगायें ताकि पार्टी और मजबूत हो सके। 

चुनाव के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे पहले ही कह चुके हैं कि अपना स्थान नहीं बदलेंगे। चुनाव पटना साहिब से ही लड़ेंगे। खरमास के बाद अपना निर्णय सुनायेंगे कि उन्हें क्या करना है।

गौरतलब है कि इसके पूर्व शत्रुध्न सिन्हा बीते 24 मार्च को भी रिम्स जाकर लालू प्रसाद से मुलाकात की थी और 26 मार्च को पटना में लालू आवास में जाकर राबड़ी देवी और उनके दोनों पुत्रों से मिलकर उनका हालचाल जाना था और उनका साहस बंधाया था।

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