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ये हैं चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और उन पर सवाल उठाने वाले 4 जज

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नई दिल्ली। पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये चारों जज सुप्रीम कोर्ट में वरीयता के मामले में जस्टिस दीपक मिश्रा से नीचे दूसरे से पांचवें नंबर पर हैं।

कई ऐतिहासिक फैसले देने वाले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने पिछले साल ही यह पद संभाला है। वह 2 अक्टूबर 2018 तक इस पद पर बने रहेंगे। आइए आपको बताते हैं चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और उन पर सवाल उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के 4 जज से जुड़ी अहम बातें…

चीफ जस्टिस दीपक मिश्राः

जस्टिस दीपक मिश्रा का जन्म 3 अक्टूबर 1953 को हुआ था। 14 फरवरी 1977 में उन्होंने उड़ीसा हाई कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी। 1996 में उड़ीसा हाई कोर्ट का अडिशनल जज बनाया गया और बाद में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट उनका ट्रांसफर किया गया, 2009 के दिसंबर में पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया।

फिर 24 मई 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस उनका ट्रांसफर हुआ। 10 अक्टूबर 2011 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को फांसी की सजा जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने ही सुनाई थी। याकूब के मामले में आजाद भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में रात भर सुनवाई चली थी।

सुप्रीम कोर्ट में रात के वक्त सुनवाई करने वाली बेंच की अगुवाई जस्टिस दीपक मिश्रा ने ही की थी और दोनों पक्षों की दलील के बाद याकूब की अर्जी खारिज की गई थी और फिर तड़के उसे फांसी दी गई थी।

ये हैं जस्टिस दीपक मिश्रा के बड़े फैसले…

 जस्टिस दीपक मिश्रा ने आपराधिक मानहानि से संबंधित कानूनी प्रावधान के संवैधानिक वैधता को सही ठहराया था।

उन्होंने कहा था कि विचार अभिव्यक्ति का अधिकार असीमित नहीं है।

 अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि पूरे देश में सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए।

इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद तमाम लोग खड़े होंगे। राष्ट्रगान के सम्मान में तमाम लोगों को खड़ा होना होगा।

इसी साल 5 मई को बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप केस में तीनों दोषियों की फांसी की सजा को जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने बरकरार रखा था।

मिश्रा ने एक फैसले में दिल्ली पुलिस से कहा था कि वह एफआईआर दर्ज करने के 24 घंटे बाद उसे वेबसाइट पर अपलोड करे।

जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में स्पेशल बेंच बनाई गई है जो अयोध्या मामले की सुनवाई करेगी।

कौन हैं CJI पर सवाल उठाने वाले जज?

  1. जस्टिस चेलामेश्वरः

23 जून 1953 को आंध्र प्रदेश में जन्मे जस्टिस चेलामेश्वर 1997 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज बने थे। उन्हें 2007 में गुवाहाटी हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया।

इसके बाद साल 2010 में वह केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने और फिर 20 अक्टूबर 2011 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।

  1. जस्टिस रंजन गोगोईः

18 नवंबर 1954 को जन्मे जस्टिस गोगोई ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में ही अधिकांश प्रैक्टिस की। साल 2001 में उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट में परमानेंट जज नियुक्त किया गया।

इसके बाद जस्टिस गोगोई का ट्रांसफर साल 2010 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया। 23 अप्रैल 2012 को जस्टिस गोगोई को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया।

  1. जस्टिस मदन भीमराव लोकुरः

साल 1974 में दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक करने वाले जस्टिस मदन भीमराव लोकुर गुवाहाटी और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। उन्हें 4 जून 2012 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।

  1. जस्टिस कुरियन जोसेफः

30 नवंबर 1953 को जन्मे जस्टिस कुरियन जोसेफ दो बार केरल हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस रह चुके हैं। उन्हें 2013 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया था और फिर 8 मार्च 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस जोसेफ कुरियन 30 नवंबर 2018 को सेवानिवृत्त होंगे।

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