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मनोरम वादियों के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व धार्मिक सभ्यताओं का संगम है राजगीर

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राजगीर (INR)। मठ मंदिरों का नगर राजगीर अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक सभ्यताओं का संगम स्थल है। जहां हिंदू धर्मावलंबियों का तीर्थ स्थल ब्रह्मकुंड स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर बौद्ध अनुयायियों का रत्नागिरी पर्वत व वेणुवन विहार स्थित भगवान गौतम बुद्ध की तपस्थली इस्लाम धर्म के मखदुम कुंड स्थित, मुस्लिमों के महान साधक औलिया व मखदुल्मुल्क शेख शफरुद्दीन याहिया मनेरी की तथा जैन धर्म के चौबीसवें एवं अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के तपस्थली के कारण राजगीर से सत्य अहिंसा करुणा मैत्री सह अस्तित्व व सर्वधर्म समभाव का संदेश देश दुनिया में प्रसारित हो रहा है ।

इस क्रम में राजगीर में सालों भर काफी संख्या मे दिगंबर व श्वेतांबर जैन पर्यटकों का आगमन भारी संख्या में होता है। जो राजगीर के विभिन्न पंच पहाड़ियों पर स्थित जैन मंदिरों में विधिवत पूजा अर्चना करते हैं।

ऐसे में जैन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक राजगीर में जैन धर्म के 12वें तीर्थकर भगवान वासु पूज्य स्वामी ने यहां कठोर तप साधना के बाद प्रथम पारणा राजगीर में किया था। वहीं 24वें व अंतिम तीर्थंकर भगवान मुनि सुब्रत नाथ स्वामी के चार कल्याणक च्यवन, जन्म, दीक्षा व केवल ज्ञान भी यहीं हुआ था।

इस क्रम में भगवान महावीर के प्रथम गणधर गौतम स्वामी का मोक्ष और धन्नाशालीभद्र का देवलोक राजगीर के पांचवें पर्वत वैभारगिरी पर हुआ था।

इसी प्रकार से दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने राजगीर में प्रथम पर्वत विपुलांचल गिरी पर अपना प्रथम उपदेश दिया था तथा लोक कल्याण के लिए अपना संदेश देकर गौतम गोत्रीय प्रकांड वैदिक विद्वान इंद्रभूति को दीक्षित किया था। जो भगवान महावीर के प्रथम शिष्य के रूप में विश्व विख्यात हुए।

तब मगध के तत्कालीन सम्राट श्रेणिक ने इसी पर्वत पर भगवान के प्रथम समोशरण यानि धर्मसभा में उनसे साठ हजार प्रश्न किए थे और भगवान की दिव्य वाणी के श्रोता के रुप मे जगत प्रसिद्ध हुए थे ।

राजगीर के विभिन्न पंच पहाड़ियों पर अनेक जैन मंदिर बने हुए हैं। जिसमें प्रथम पर्वत विपुलांचल गिरी पर चार जैन दिगंबर मंदिर हैं। जिनमे मूलनायक भगवान महावीर की प्रतिमाएं विद्यमान हैं। चूंकि भगवान महावीर के द्वारा समोशरण नामक धर्मसभा में उपदेश दिया गया था। इसलिए दिगंबर समाज के द्वारा एक विशाल और भव्य समोशरण मंदिर का निर्माण कराया गया है।

इसी पर्वत पर जैन श्वेतांबर समाज का द्वारा निर्मित मंदिर मे भगवान मुनि सुब्रत नाथ स्वामी की प्रतिमा विराजमान हैं। इस पर्वत के मंदिर तक जाने के लिए 5 सौ 55 सीढ़ियां बनाई गई हैं।

रत्नागिरी पर्वत विपुलांचल गिरी पर्वत से सटा हुआ है। जहां निर्मित तीन दिगंबर जैन मंदिरों में मुनि सुब्रत नाथ स्वामी की प्रतिमा स्थापित हैं। इसी पर्वत पर एक श्वेतांबर जैन मंदिर है। जिसमें भगवान श्री चंद्रप्रभु श्री शांतिनाथ व श्री नेमीनाथ भगवान की प्रतिमाएं विराजमान हैं।इन मंदिरों तक पहुंचने के लिए 12 सौ 77 सीढियों का निर्माण कराया गया है।

उदयगिरी पर्वत पर भी तीन दिगंबर जैन मंदिर हैं। जिनमे मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की खड़गासन प्रतिमाएं स्थापित हैं। एक श्वेतांबर जैन मंदिर भी यहां है जिसमे भगवान सांवब्भिया पारस नाथ जी की प्रतिमा है। पहाड की तलहट्टी मे श्वेतांबर और दिगंबर की ओर से भाताघर बनाया गया है। जहां जैन तीर्थयात्रियों के लिए जलपानए चाय की व्यवस्था की जाती है।

संथारा भूमि इसी तलहट्टी में है। जहां जैन तपस्वी जगजीवन जी महाराज ने पैंतालिस दिनों तक उपवास और तपस्या के माध्यम से देवलोक प्राप्त किया था । तपस्या के माध्यम शरीर त्याग किया जाना जैन धर्म मे मोक्ष की प्राप्ति का आधार माना जाता है। इस पर चढने के लिए 7 सौ 82 सीढियां है।

स्वर्ण गिरी पर्वत पर निर्मित तीन दिगंबर जैन मंदिरों मे शांतिनाथ भगवान की प्रतिमाए विराजमान हैं। यहां एक श्वेतांबर जैन मंदिर भी है। जिसमे आदिश्वर भगवान की प्रतिमा स्थापित है।

इस पर्वत पर आवागमन के लिए 1 हजार 64 सीढियां बनाई गई हैं। वैभारगिरी पर्वत पर स्थित एक ¨दगंबर जैन मंदिर मे महावीर की प्रतिमा स्थापित है। तथा पांच श्वेतांबर जैन मंदिर हैं जिनमें भगवान महावीर स्वामीए श्री मुनि सुब्रत नाथ स्वामीए श्री धन्नाशाली भद्र के अलावे श्री गौतम स्वामी आदि अनेक गणधरों की प्रतिमाए तथा चरण चिन्ह विराजमान हैं।

यहां पुरात्तात्विक महत्व को देखते हुए की गई खुदाई के दौरान मिले खंडहर के अवशेषों से जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुए । जो अभी पुरातत्व विभाग के देख रेख मे है। इस पर्वत पर जाने के लिए 5 सौ 31 सीढ़ियां हैं।

इस प्रकार से राजगीर पर्यटन स्थल पर सालाना भ्रमण पर आने वाले लाखों देशी विदेशी पर्यटकों मे जैन पर्यटकों का एक बड़ा वर्ग भी शामिल होता है। कठिन चढ़ाई कर इन जैन मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।

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