मगध सम्राट जरासंध की अतीत संवर्धन के लिए होगा आंदोलन

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(INR) अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी  राजगीर के महाभारत कालीन मगध साम्राट जरासंध के अखाड़े के विकास के लिए चन्द्रवंशी समाज के लोगों ने चरणबद्ध आंदोलन करने का संकल्प लिया है।

राष्ट्रीय जरासंध अखाड़ा परिसर के बैनर तले आयोजित संकल्प सम्मेलन में देश भर से काफी संख्या में प्रतिनिधि जुटे और वहां की मिट्टी का तिलक लगाकर चरणबद्ध आंदोलन का एलान किया।

मौके पर एक डंडा, एक झंडा हमारा है जरासंध अखाड़ा हमारा है जैसे नारे के साथ एकजुटता दिखाई। सबने एक सुर में देशव्यापी मुहिम छेड़ी जाएगी।

सम्मेलन में कहा गया कि मगध इतिहास के पन्नों में राजगीर का ऐतिहासिक महत्व रहा है और यहां के कण-कण में मगध सम्राट जरासंध की पहचान मिलती है लेकिन कालांतर से वर्तमान तक जरासंध से जुड़े ऐतिहासिक धरोहरों की घोर उपेक्षा हो रही है।

एक समय था जब जरासंध अखाड़े की मिट्टी के तिलक और पूजा के बाद ही कोई शुभ कार्य होता था। जरासंध ने मगध साम्राज्य महाजनपद की पहली राजधानी राजगीर को बनाया था।

यह विडंबना है कि मगध साम्राज्य की प्रथम राजधानी राजगीर स्थित जरासंध अखाड़ा के लंबित विकास की फाइलें सरकार के विभिन्न कार्यालयों में धूल फांक रही है।

इसके विकास के कार्य को अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लिया जाएगा। भारतीय पुरातत्व विभाग, वन विभाग और पर्यटन विभाग की तिकड़ी कानूनी पचड़े की चपेट में फंसे इस भारतीय ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व खतरे में है।

पाण्डु पोखर, घोड़ाकटोरा झील जैसे स्थलों को गुमनामी के अंधेरे से निकालकर विकास किया गया, लेकिन जरासंध अखाड़ा को अलग रखा गया, जो निंदनीय है। वर्तमान में राजगीर के प्रवेश व निकास द्वार अथवा किसी भी स्थान पर जरासंध की पहचान नहीं झलकती।

जबकि जरासंध की अहम भूमिका ने यहां के इतिहास को भारतीय सभ्यता संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। सरकार ऐतिहासिक व प्राचीन जरासंध अखाड़ा की अनदेखी कर रही है। मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में सम्राट जरासंध का अद्वितीय योगदान रहा है।

सम्राट जरासंध सुबह-शाम दूध से अखाड़ा को पटाया करते थे। किसी जमाने में अखाड़े की मिट्टी सफेद हुआ करती थी। जिसका तिलक माथे पर लगाने अथवा दंगल प्रतियोगिता में शामिल होने से पहले पहलवान इस अखाड़े में पहुंचते थे लेकिन वर्तमान समय में यह लुप्तप्राय हो गया है।

जरासंध अखाड़ा के साथ-साथ वैभार गिरी पर्वत पर स्थित जरासंध का बैठका बाबा सोमनाथ सिद्धनाथ शिव मंदिर सहित गुमनामी के गर्त में छुपे अन्य धरोहरों की खोज कर उसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास के लिए देशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा।

सम्मेलन में उत्खनन व पुरातत्व विभाग के अलावा वन एवं पर्यावरण विभाग, पर्यटन विभाग को ज्ञापन सौंपकर जरासंध अखाड़े के विकास व जीर्णोद्धार सहित अन्य मांगें भी की जायेगी।

लोगों ने आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा इन धरोहरों के प्रति बरती जा रही उपेक्षा को चन्द्रवंशी समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।

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