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भाजपा की 20-20 खेल में यूं उलझे नीतिश-कुशवाहा

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(INR). भले ही लोकसभा चुनाव में अभी कई महीने बाकी है। लेकिन बिहार में एनडीए घटक दलों में सीटों को लेकर उलझन और खींचतान दिख रही है।पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए में जदयू शामिल नहीं थीं।

जदयू पिछले लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव मैदान में थी। लेकिन इस बार जदयू फिर से एनडीए में साझेदार है। पिछले लोकसभा चुनाव में दो सीट जीतनेवाली जदयू इस बार 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का ख्वाब देख रही थी। लेकिन उसका ख्वाब सच होता नहीं दिख रहा है।

राजनीतिक गलियारें में कल से जदयू को संभावित 12 सीट लोजपा को 5 रालोसपा को 2 तथा सांसद  अरूण सिंह को एक सीट देने की चर्चा चल रही है। यानी बाकी बचे 20 सीट पर भाजपा अपना उम्मीदवार उतारेगी।

बीजेपी ने पिछले चुनाव में 22 सीटें जीती थीं।बावजूद वह अपनी दो जीती सीटें पटना साहिब और दरभंगा सीट पर दावेदारी छोड़ सकती है। भाजपा के ‘शत्रु’ शत्रुहन सिन्हा तथा भागलपुर से कीर्ति आजाद का पता कट सकता है। दोनों इन दिनों भाजपा से नाराज चल रहे हैं।

हालाँकि सीटों के बंटबारे को लेकर डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि अभी कोई ऐसा निर्णय नहीं लिया गया है। हमारा लक्ष्य सभी सीटों पर चुनाव जीतना है।एनडीए एकजुट है। सीटों को लेकर एनडीए में कोई विवाद नहीं है।

राजनीतिक गलियारे में आसन लोकसभा चुनाव को लेकर जो सूचना मिल रही है, उसके अनुसार बीजेपी बिहार की 40 लोकसभा सीटों को लेकर ट्वेंटी-ट्वेंटी फार्मूले पर काम कर रही है। बिहार में बीजेपी आधे सीटों पर चुनाव लड़ेगी तथा 20 सीट जदयू के लिए छोड़ेगी। इसी बीस सीट में जदयू को 12 लोजपा को 5 रालोसपा को 2 तथा अरूण गुट के अरूण कुमार सिंह को जहानाबाद की सीट मिलेगी।

बीजेपी सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक बीजेपी का मिशन बिहार का यह फार्मूला पिछले चुनाव को ध्यान में रखते हुए पटल पर रखा गया है। बीजेपी ने 2014 में 22 सीटें जीती थी। वह अपनी दो सीट सहयोगी दल के लिए छोड़ने को तैयार है।

पटना साहिब से शत्रुहन सिन्हा तथा दरभंगा से कीर्ति आजाद का पता कटने की संभावना ज्यादा दिख रही है।

इधर जदयू शुरू से ही 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा पेश किए हुए है। बिहार में लोकसभा चुनाव में सीएम नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ने का एलान जदयू ने कर रखा है। जबकि सहयोगी भाजपा पीएम को फिर से बिहार में प्रोजेक्ट करना चाह रही है।

जदयू शुरू से ही सीट शेयरिंग को लेकर एक्शन में है। जदयू 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान बनाए फार्मूले को लागू करने के पक्ष में है क्योंकि उस समय दोनों साथ थे।

जदयू ने 2009 में 25 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। ऐसे में 12 सीट मिलना उसे स्वीकार नहीं है। लोजपा और रालोसपा भी अपने सीट का दायरा बढ़ाना चाहेंगे।

रालोसपा सुप्रीमों उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए में  सीएम नीतीश कुमार के साथ सहज नहीं दिख रहे हैं। जदयू के एनडीए में शामिल होने से पूर्व श्री कुशवाहा बिहार में ‘बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर ‘शिक्षा बचाओं’ मुहिम चला रखा था।

पिछले दिनों भी प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव से उनकी मुलाकात को लेकर सियासी घमासान मच चुका है। उनके अंदर सीएम बनने की महत्वाकांक्षा उजागर भी हो चुकी है।

फिलहाल भाजपा के इस ट्वेंटी-ट्वेंटी फार्मूले पर बीजेपी के नेताओं ने कहा कि सीटों के बंटबारे पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। एनडीए एकजुट है।उनमें सीटों के बटबारे को लेकर कोई मनमुटाव नहीं है। बीजेपी भले ही इस मामले में कुछ बोले लेकिन  सीटों के बटबारे को लेकर एनडीए में सबकुछ ठीक ठाक नहीं है।

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