बिहार के साहब के सामने लोग चिल्लाए- मुर्दाबाद, वापस जाओ!

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“इस साल फिर बड़ी संख्या में बच्चों की मौत होने के बावजूद 2 हफ्तों तक नीतीश का मुजफ्फरपुर न आना सवालों के घेरे में था। लोगों के विरोध को देखते हुए अस्पताल और आसपास की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई। मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई…..”

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को एईएस के पीड़ित बच्चों से मिलने के लिए मुजफ्फरपुर के एचकेएमसीएच अस्पताल पहुंचे और उन्होंने एसकेएमसीएच में बच्चों के इलाज आदि की व्यवस्था का जायजा लिया। अब तक चमकी बुखार के 390 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 138 बच्चों की मौत हुई है।

उधर, एसकेएमसीएच के बाहर पीड़ित बच्चों के परिजन को मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिए जाने पर हंगामा शुरू हो गया है । यह लोग अस्पताल की खराब स्थिति से नाराज थे।

लोगों का कहना था कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उनसे बात करना चाहते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें मिलने नहीं दे दिया जिससे नाराज लोगों ने मुख्यमंत्री वापस जाओ और नीतीश मुर्दाबाद के नारे लगाना शुरू कर दिया ।

बता दें कि चमकी बुखार से पीड़ित ज्यादातर मरीज मुजफ्फरपुर के सरकारी श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में एडमिट हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के खिलाफ बीमारी से पहले एक्शन नहीं लेने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। बच्चों की मौत पर मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा है।

नारे लगा रहे लोग नीतीश कुमार और उनकी ‘सुशासन’ वाली सरकार से काफी नराज दिखे। लोगों का कहना था कि बच्चों का इलाज सही से नहीं हो रहा है और रोज ही उनकी जान जा रही है।

उन्होंने कहा नीतीश अब क्यों जागे हैं, उनको यहां से वापस चले जाना चाहिए। नीतीश ने चमकी बुखार या इनसेफ्लाइटिस को लेकर डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।

लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से जर्जर है, गांव में स्वास्थ्य केंद्रों का अभाव है और जहां केंद्र है, वहां डॉक्टर नहीं है।

अज्ञात बुखार के बारे में जांच, पहचान एवं स्थाई उपचार के लिये स्थानीय स्तर पर एक प्रयोगशाला स्थापित करने की मांग लंबे समय से मांग ही बनी हुई है, लेकिन इस बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

वहीं, एक डॉक्टर के मुताबिक अस्पताल में इस समय मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि हम भले ही एक बेड पर 2 मरीज रख रहे हैं, लेकिन उनका इलाज लगातार जारी है।

बता दें कि 2000 से 2010 के दौरान इस बीमारी की चपेट में आकर सैकड़ो से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। सबसे खतरनाक बात यह है कि अभी तक इस बीमारी की साफ वजह पता नहीं चल पाई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुजफ्फरपुर जिले में इंसेफेलाइटिस वायरस की वजह से बच्चों की मौत की बढ़ती संख्या पर सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और बिहार सरकार से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक नोटिस जारी किया है।

बिहार में महामारी की तरह फैल रहे चमकी बुखार को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक की थी, जिसके बाद मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि बिहार सरकार ने फैसला किया है कि उनकी टीम हर उस घर में जाएगी जिस घर में इस बीमारी से बच्चों की मौत हुई है।

टीम बीमारी के बैक ग्राउंड को जानने की कोशिश करेगी, क्योंकि सरकार अब तक यह पता नहीं कर पाई है कि आखिर इस बीमारी की वजह क्या है? कई विशेषज्ञ इसकी वजह लीची वायरस बता रहे हैं, लेकिन कई ऐसे पीड़ित भी हैं, जिन्होंने लीची नहीं खाई।

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