‘बिहारी बाबू’ के दही-चूड़ा भोज से बीजेपी नेताओं के किनारे के मायने

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(INR). बिहारी बाबू’ और ‘शॉटगन’ के नाम से मशहूर पटना साहिब के सांसद शत्रुघ्नन सिन्हा का सिने स्टार वाला आकर्षण भी बिहार के भाजपा नेताओं को लुभा नहीं पा रहा है।

नए साल में पहली बार पटना आए शत्रुघ्न सिन्हा ने मंगलवार को खुद चूड़ा-दही का भोज दिया। लेकिन बिहार भाजपा का कोई चर्चित नेता इसमें शामिल नहीं हुआ। हालांकि आमंत्रण पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से जुड़े सभी विधायक से लेकर मंडल अध्यक्ष तक को था। 

चूड़ा-दही भोज का आयोजन पटना आयकर गोलम्बर से सटे गार्डिनर रोड अस्पताल के हीमोफिलीया सोसाईटी के सभागार में था। दिन के 12 बजे से शुरू भोज शाम चार बजे तक चला।

एक हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज हुई। इसमें समाज के हर वर्ग के लोग आए। चिकित्सक, समाजसेवी, व्यापारी, मीडियाकर्मियों से लेकर उनके प्रशंसक व उनके मतदाताओं ने हाजिरी लगाई।

सबों के बीच बिहारी बाबू के आकर्षण का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था। हर कोई उनके साथ तस्वीर खिंचवाने को आतुर दिखा। लेकिन आयोजन स्थल पर जिन राजनेताओं की तस्वीर लगी थी, उनकी अनुपस्थिति इस भोज की दशा-दिशा ही बदल दे रही थी।

बात चाहे पटना साहिब के विधायक व पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, कुम्हरार के विधायक अरुण कुमार सिन्हा, बांकीपुर के नितिन नवीन या फिर दीघा के विधायक संजीव चौरसिया, इनमें कोई नहीं दिखा। वह भी तब जबकि आयोजन भाजपा सांसद शत्रुघ्नन सिन्हा का ही था। राजधानी पटना के इन चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक हैं। 

पार्टी के इन विधायकों से लेकर संसदीय क्षेत्र से जुड़े किसी प्रमुख नेता के नहीं आने से राजनीतिक गलियारे में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

बिहारी बाबू जिस बेबाकी से प्रदेश से लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को लक्ष्य कर अपनी बात कहते रहे हैं, भोज में बिहार इकाई के नेताओं के शिरकत नहीं करने से कई तरह के कयासों को भी बल मिले।

जानकार इसे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में बिहारी बाबू को लेकर भाजपा के निर्णय के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। 

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