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बिहारियों के दर्द को समझिए सीएम साहब

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-:  जयप्रकाश नवीन :-

INR.हैं जो तूफान में साहिल बिहार वाले हैं,  जो मेहनतों का है हासिल बिहार वाले हैं। यह केवल मैं नही इतिहास कहता  रहता है, जमीन -ए-हिंद में काबिल बिहार वाले हैं।” ….मशहूर शायर  तहसीन मुनव्वर की उक्त पंक्तियाँ बिहारियों के मेहनत और परिश्रम की कहानी कहती है।

यह कहानी है उन बिहारियों की जो अपना खून-पसीना बहाकर परिवार से सैकड़ों मील दूर  दूसरे राज्य में रहकर देश की उत्पादकता को बढ़ाने में लगें हुए हैं। लेकिन गुजरात की आग में अपना सब कुछ छोड़ कर भागने की विवशता बिहारियों के लिए एक त्रासदी बन गई है।

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन गुजरात के ब्रांड एम्बेसडर हैं। जिनका एक बहुत ही लोकप्रिय विज्ञापन आता है ‘ कुछ दिन तो गुजारिये गुजरात में ‘ उसी गुजरात में बिहारियों के साथ मारपीट की जाती है, उन्हें गुजरात छोड़ देने की धमकी मिलती है।

देखते-देखते हजारों बिहार और यूपी के लोग गुजरात से भागने को लाचार है। अपने ही देश में बिहारियों के साथ दुश्मनों के जैसा सलूक हो रहा है। वो भी ‘सबका साथ -सबका विकास ‘ की बात करने वाली राजनीतिक दल के शासनकर्ता के राज्य में। जबकि बिहार में भाजपा भी सरकार में शामिल है।

सीएम नीतीश कुमार ‘बिहारी अस्मिता ‘की बात करते हैं। लेकिन उन्हें बिहार से बाहर रहने वाले बिहारियों के दर्द नजर नही आता। गुजरात हिंसा में बिहार के गया का अमरजीत कुमार की हत्या हो जाती है।

अमरजीत पिछले 15 साल से मकान बनाकर सूरत में रह रहा था। उतर भारतीयों पर हमले के बाद वह घर लौट रहा था। लेकिन वह हिंसक भीड़ की चपेट में आ गया।

बिहार के मेधावी छात्रों के साथ दूसरे राज्य में पिटाई के मामले देखने को मिलते रहते थे। कभी कर्नाटक में बिहारी छात्रों के साथ पिटाई, रेलवे, बैंक तथा अन्य प्रतियोगिता परीक्षा देने गए बिहारी छात्रों के साथ पिटाई के कई मामले सामने आए हैं।

लेकिन पिछले एक सप्ताह से शांति एवं अहिंसा के पूजारी महात्मा गाँधी की धरती गुजरात में बिहारियों पर हमला तथा भगाए जाने की घटना ने देश को हिला दिया है। गुजरात से हजारों उतर भारतीय खासकर बिहार यूपी के लोग जान बचाकर भागने को विवश है।

गुजरात में रहने वाले बिहारी साल में दो बार ही अपने घर लौट पाते थें ।एक होली और दूसरा छठ। इस दौरान बिहार आने वाली ट्रेन हाउस फूल हो जाती थी। लेकिन दीपावली -छठ के पूर्व ही गुजरात से बिहार आने वाली ट्रेन फूल दिख रही है। गुजरात से बिहारियों का पलायन के पीछे डर, दहशत और हिंसा दिख रही है।

गुजरात के साबरकांठा में एक बच्ची से रेप कांड की घटना के बाद गुजरातियों का गुस्सा फूट पड़ा। कारण कि बच्ची से दुष्कर्म का आरोपी एक बिहारी था।जिसे पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया था।

लेकिन राज्य सरकार समय रहते उन तत्वों पर लगाम नहीं लगा सकी जो बिहार और यूपी के लोगों को धमकाने तथा गुजरात से वापस चलें जाने की धमकी देने लगे थे। जो पिछले 20 साल से गुजरात में रह रहे थे, वे भी गुजरात से पलायन को विवश है।

उतर भारतीयों के साथ गुजरात में जो कुछ हुआ या हो रहा है, उन सब के बीच नहीं भुलना चाहिए कि गुजरात के गांधी को बिहार में ही ‘महात्मा’ का उपाधि दिया गया था।

गुजरात में जिस बीजेपी की सरकार है, वही बिहार में बीजेपी भी सरकार में सहयोगी दल है। इन सब के बाद भी बिहार के सीएम ने गुजरात में बिहारियों पर हुए अत्याचार को लेकर अपनी चुप्पी देर से तोड़ी।

बिहार के लाखों लोग देश के किसी न किसी राज्य में रोजी रोटी को लेकर वर्षों से  पलायन को मजबूर है। आजादी के पहले भी यह सिलसिला जारी था आज भी कायम है।

ऐसा नहीं है कि झारखंड बंटबारे के पहले भी हमारे राज्य में खाने थी।प्राकृतिक संसाधन थें उपजाऊ जमीन थीं। कई फैक्टरी थी। फिर भी यह त्रासदी बिहारियों के साथ ही क्यों? 

बिहारियों को ही रोजगार के लिए क्यों भटकना पड़ता है। धीरे -धीरे भटकने की रफ्तार बढ़ गई। नब्बे के दशक में बिहारी दूसरे राज्यों में रोजी रोटी को लेकर स्थापित हो चुके थे। कई राज्य में बिहारी लोगों की वजह से ही उधोग धंधे गुलजार हो गए। देश की उत्पादकता में इनका योगदान बढ़ने लगा था।

पंजाब, महाराष्ट्र असम सहित कई राज्य को पश्चिम बंगाल से सीख लेनी चाहिए कि बिहारियों ने ही अपनी श्रमशक्ति से पश्चिम बंगाल को विकास की राह पर ले गए हैं। बिहारी कई राज्य में ‘लाइफलाइन’ नजर आते हैं।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बिहार की गद्दी संभालते वक्त कहा था कि बिहार के लोगों को बाहर कमाने के लिए जाना नही पड़ेगा। बिहार में उधोग धंधे का जाल बिछेगा।हर हाथ को काम मिलेगा।

लेकिन सवाल यह उठता है कि पिछले 18 साल में सीएम बिहार की तस्वीर और तकदीर कितनी बदली। नीतीश कुमार की घोषणा कितनी फलीभूत हुई। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहारियों पर हमले रूके नहीं,यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। जिसकी आग गुजरात के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र तक भी पहुँच गई।

सीएम नीतीश कुमार को सार्थक और ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि बिहारियों का पलायन रूक सकें ।लोगों को बिहार से बाहर जाने की जरूरत न पड़े।

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