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बढ़ते अपराध को लेकर सीएम की समीक्षा बैठक में लिए गए ये निर्णय

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“थाना से लेकर जिला तक कहां कितने अपराध हो रहे हैं, इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। पटना और मुजफ्फरपुर जोन अपराध के मामले में सबसे अधिक संवेदनशील है……”

INR. बिहार में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

समीक्षा बैठक में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया गया। मुख्यमंत्री ने डीजीपी से लेकर डीएसपी तक सभी अधिकारियों को फील्ड में जाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कहा है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के बाद गृह सचिव आमिर सुबहानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पुलिस को यह तय करने के लिए कहा गया है कि गश्त अच्छी तरह से हो। हर जगह पुलिस की मौजूदगी नजर आए। सीनियर ऑफिसर फिल्ड में जाकर खुद पेट्रोलिंग की स्थिति को देखे।

डीआईजी सप्ताह में तीन दिन, एसपी सप्ताह में चार दिन, डीएसपी सप्ताह में पांच दिन फील्ड में रहें। मुख्यमंत्री ने पुलिस मैनुअल नए सिरे से बनाने का निर्देश दिया है।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि अनुसंधान को विधि व्यवस्था से अलग किया जाएगा। ऐसा फ्रेमवर्क बनाया जा रहा है। जिसमें थाना से लेकर पुलिस मुख्यालय तक अनुसंधान और विधि व्यवस्था के लिए अलग-अलग पुलिस होगी।

अनुसंधान ईकाई के जवान विधि व्यवस्था में नहीं आएंगे। इसी तरह विधि व्यवस्था वाले अनुसंधान ईकाई में नहीं जाएंगे। ऐसा कम से कम तीन साल होगा। ट्रांसफर भी उसी ईकाई में होगा।

सारे आईजी 30 में से 10 दिन फिल्ड में रहेंगे। उन्हें अनुमंडल मुख्यालय में कैंप करना होगा। एक आईजी के पास अगर दस जिले हैं तो वह हर जिले में जाएंगे। हर अनुंडल की जांच करेंगे और वहां रात्रि विश्राम करेंगे।

ताकि वहां की स्थिति के बारे में पता कर सकें। वह देखेंगे कि उस अनुंडल में कितने पदाधिकारी हैं जो ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाएगा।

डीआईजी को भी 30 में से 10 दिन फिल्ड में रहना होगा। लापरवाह और दोषी डीएसपी को चिह्नित करना होगा। आईजी को यह टास्क दिया गया था कि वे अपने क्षेत्र के पांच ऐसे डीएसपी को चिह्नित करें जो लापरवाह हैं, अपने काम में रूचि नहीं लेते। सभी आईजी ने अपने जोन से पांच डीएसपी की सूची दी है।

20 ऐसे एसडीपीओ की सूची आ गई है, जिनका काम संतोषजनक नहीं है। ऐसे लोगों को फील्ड से हटाया जाएगा और काम करने वालों को फील्ड में रखा जाएगा।

डीजीपी ने कहा कि थाने से लेकर जिला तक कहां कितने अपराध हो रहे हैं, इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। पटना और मुजफ्फरपुर जोन अपराध के मामले में सबसे अधिक संवेदनशील है।

पटना जोन के पटना जिले में और मुजफ्फरपुर जोन के वैशाली और मुजफ्फरपुर जिले में अधिक अपराध हो रहे हैं। ऐसे जिले जहां अधिक अपराध हो रहे हैं वहां डीजी टीम के अधिकारी जाएंगे।

गृह सचिव आमिर सुबहानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा………..

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