बजट का है पुराना इतिहास और चर्चा में रहे कई बजट !

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INR (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)।  मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पांच जूलाई को पेश होगा। इससे पहले चार जूलाई को वित मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी। बजट का इतिहास भी पुराना है।

‘बजट’ लैटिन शब्द ‘बोजते’ से बना है। जिसका अर्थ होता है चमडे का थैला। मध्यकाल में पश्चिमी देशों के व्यापारी रूपये पैसे रखने के लिए चमडे के थैले का ही प्रयोग करते थे।

बाद में आय-व्यय का ब्यौरा बजट भी सदन में पेश करने के लिए बैग में रखकर लाया जाने लगा।तब से इसे बजट शब्द ही माना जाने लगा।

भारत का पहला बजट 18 फरवरी,1860 को एक अंग्रेज जेम्स विल्सन ने पेश किया था। दरअसल जेम्स ब्रिटिश वायसराय काउंसिल के मेंबर फाइनेंस थे। अंतरिम सरकार का पहला बजट लियाकत अली खान ने पेश किया था। दरअसल यह बजट 9 अक्टूबर, 1946 से लेकर 14 अगस्त, 1947तक के ही लिए था।

भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाली वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1867 से हुई।

आजाद भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आर के षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 में पेश किया था। यह एक अंतरिम बजट था।संसद में पहली बार बजट प्रस्तुत करने का श्रेय पंडित जवाहरलाल नेहरू को जाता है।

वित्तीय वर्ष 1967-68 का बजट एक विशेष सम्मान में अपनी तरह का पहला बजट था। पहली बार बजट को उप प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने पेश किया था जो उस समय वित्त मंत्री भी थे।

मोरारजी देसाई ने अपने आठ साल के कार्यकाल में 10 बार बजट पेश किया। श्री देसाई ने अपने जन्मदिन के मौके पर बजट पेश करने वाले वे एकमात्र वित मंत्री थे।

माना जाता है कि1968-69 का बजट भी काफी चर्चा में रहा। क्योंकि इस बजट में ‘स्पाउस अलाउंस’को समाप्त कर दिया गया। जो टैक्स बचाने का एक माध्यम हुआ करता था। इस अलाउंस के चरिए पति-पत्नी दोनों अपना इंकम टैक्स बचा सकते थे।

वर्ष 1969-70 का आम बजट को ‘स्टेटस सिंबल ‘के रूप में देखा गया। इस बजट के बाद कुछ उत्पादों की कीमत में तेजी से वृद्धि हुई। इस बजट में कई टैक्स बढ़ाए गए।ऐसी आयातित कारें जिनकी इंपोर्ट ड्यूटी को 60 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी तक कर दी गईं थी। इसे अन्य लक्जरी वस्तुओं के बराबर लाया गया ।

1970-71 का बजट भी ऐतिहासिक माना जाता है क्योंकि पहली बार देश में आम बजट को एक महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने पेश की थी।श्रीमती गांधी तब वित्त मंत्री विभाग भी अपने पास रखें हुए थीं।

1971-72 का बजट में नकद सौदों पर अंकुश लगाने के लिए एक नई व्यवस्था की गई। इसका सीधा असर पर्यटन पर भी पड़ा था। इस व्यवस्था के तहत नकद टिकट खरीदने पर बीस फीसदी टैक्स का भुगतान करने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन यदि विदेशी मुद्रा में टिकट के लिए भुगतान करते हैं तो इस पर टैक्स नहीं लगता था।

वित्तीय वर्ष 1972-73 का बजट शब्दों और साहित्य से प्रेम करने वालो के लिएअच्छा नहीं रहा।इस बजट में प्रावधान किया गया कि क्रासवर्ड पजल्स को हल करके अर्जित पुरस्कारों पर साढ़े चौतीस फीसद का टैक्स प्रस्तावित कर दिया गया।

1974-75 का बजट इनकम टैक्स स्ट्रकचर में सुधार किया गया था।इसमें इनकम टैक्स और सरचार्ज को 97.75 से घटाकर 75 फीसदी कर दिया गया।

1975-76 का आम बजट भी अपने आप में खास था।इस बजट में सरकारी कर्मचारियों के लिए इंसेटिव बोनस स्कीम का लाभ शुरू किया गया।ताकि वे अपने भविष्य निधि अकाउंट से अक्सर पैसे नहीं निकाल पाएँ।

इसके अलावा बजट से जुडी कई रोचक तथ्य है…..

1970 में महिला प्रधानमंत्री के रूप में श्रीमती इंदिरा गाँधी ने बजट प्रस्तुत किया था।

वित पोर्ट फोलियो को हासिल करने राज्यसभा के पहले सदस्य प्रणव मुखर्जी थे, जिन्होंने 1982-83,1983-84,1984-85 के वार्षिक बजट पेश किया। राजीव गांधी ने 1987 के बजट में पहली बार कॉपरेट टैक्स का न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स से परिचय कराया।

1996 में चुनाव के बाद एक गैर कांग्रेसी नेता ने वित्त मंत्री का पद ग्रहण किया।पी चिदम्बरम उस समय तमिल मनीला कांग्रेस से जुड़े हुए थे और उन्होंने 1996-97 का अंतरिम बजट पेश किया।

एक संवैधानिक संकट के बाद जब पीएम इन्द्र कुमार गुजराल का कार्यकाल  खत्म हो रहा था तब पी चिदम्बरम के 1997-98 के बजट पारित करने को लेकर संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया था।

वर्ष 2000 तक बजट सदन में शाम को पेश किया जाता था।लेकिन 2001 में एनडीए से इस परंपरा को तोडते हुए शाम के बजाय सदन के पहले घंटे में शुरू किया।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, यशवंत सिन्हा, बाईबी चव्हाण और सीडी देशमुख ने देश के लिए 7-7बार बजट प्रस्तुत किया।पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वित्त मंत्री रहते छह बार बजट पेश कर चुके हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत के केन्द्रीय बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में निर्दिष्ट किया गया है, जो कि भारतीय गणराज्य का वार्षिक बजट माना जाता है।

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